Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 8:1 निर्गमन 8:2 निर्गमन 8:3 निर्गमन 8:4 निर्गमन 8:5 निर्गमन 8:6 निर्गमन 8:7 निर्गमन 8:8 निर्गमन 8:9 निर्गमन 8:10 निर्गमन 8:11 निर्गमन 8:12 निर्गमन 8:13 निर्गमन 8:14 निर्गमन 8:15 निर्गमन 8:16 निर्गमन 8:17 निर्गमन 8:18 निर्गमन 8:19 निर्गमन 8:20 निर्गमन 8:21 निर्गमन 8:22 निर्गमन 8:23 निर्गमन 8:24 निर्गमन 8:25 निर्गमन 8:26 निर्गमन 8:27 निर्गमन 8:28 निर्गमन 8:29 निर्गमन 8:30 निर्गमन 8:31 निर्गमन 8:32



पवित्र निर्गमन 8:20 पर टिप्पणी—सवेरे उठकर फि़रोन के सामने खड़ा होना
यह पद मोशे और फि़रोन के बीच संघर्ष की एक निर्णायक चिन्हक कथा का भाग है। परमेश्वर मूसा से कह रहा है कि वह सवेरे उठकर फ़िरौन के सामने खड़ा हो और जल के किनारे आने पर यह संदेश दे—मेरी प्रजा को जाने दें ताकि वे मेरी पूजा कर सकें। यह वचन दिखाता है कि प्रभु की करुणा और पवित्र आदेश के बीच समय-योजना कैसे जुड़ा रहता है, और कैसे ईश्वरीय न्याय भी दया में ढाला जाता है।
पद का संदेश और अध्याय के भीतर का स्थान
निर्गमन 8:20 परमेश्वर के द्वारा मूसा के लिए निर्देश का एक चरण है जो जल-आग्नेय स्थितियों के बीच आता है। पृथ्वी पर नील की रेखाओं के साथ साथ, पत्थर-चलती मुसीबतों के बाद भी परमेश्वर अपने लोगों की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए कदम उठाते हैं। इस वचन में प्रभु स्पष्ट कहते हैं कि वे अपनी प्रजा की स्वतंत्रता पर जोर देते हैं—यह मजबूत और स्पष्ट प्रस्ताव है, जो फ़िरौन के सम्मुख मूसा को एक निर्णायक संदेश देता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल संदर्भों से तुलनात्मक अनुप्रयोग
1) शौर की बंधन से मुक्ति—पूर्ववत् उद्धारक योजनाओं में परमेश्वर कभी-कभी तीव्र चपलता के बावजूद अवसर देते हैं ताकि लोगों को स्वतंत्रता का अनुभव हो।
2) प्रगट दया के साथ न्याय—पहले दया, फिर क्रिया: प्रभु के प्रकार-परिवर्तन में, नम्रता और आस्थावानता के साथ आगे बढ़ना चाहिए, ताकि दया के साथ अनुयायियों के लिए मार्ग खुल सके।
3) नीति बनाम आज्ञा—परमेश्वर की आज्ञा मानना समाज के मतभेदों के बावजूद एकता और सुरक्षित नेतृत्व प्रदान करती है।
कथन-उद्धरण से प्रेरणा (सारांश)
यह पंक्ति बताती है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए स्पष्ट योजनाओं के साथ उपस्थित रहते हैं, और उनके द्वारा दिए गए आदेशों का पालन मुक्ति के मार्ग को प्रशस्त करता है।
कथा के सार में मूसा-फ़िरौन संवाद एक नीतिगत चेतावनी है: परमेश्वर की ओर से उपहार के रूप में स्वतंत्रता, और उसका उपासना-ग्रहण।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
निर्गमन 8:20 में ईश्वर मूसा के माध्यम से स्पष्ट संकेत देते हैं कि उनकी प्रजा को जाने देना है ताकि वे प्रभु की उपासना कर सकें। यह घटना, प्रभु की सत्ता और दोनों पक्षों के उत्तरदायित्वों को स्थापित करती है और उद्धार की दिशा में एक ठोस कदम की याद दिलाती है।
Cross references: निर्गमन 7:26–8:1 (पहली बार मुक्त करने की तैयारी), निर्गमन 9:13–16 (स्वाधीनता के संघर्ष में दया और न्याय का संयोजन), प्रवेश 1:7–12 (निश्चय और विश्वास के साथ प्रभु की योजनाओं को मानना).
नोट: नीचे उद्धरणात्मक पंक्तियाँ केवल संदर्भ के लिए हैं; पूर्ण ग्रंथों को यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है।