Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 8:31 पर टिप्पणी
कर्म-रेखाओं में यह verse उस समय की कहानी कहती है जब ईश्वर ने मूसा के अनुरोध पर मिस्र से इस्राइलियों को मुक्त करने की प्रक्रिया को तीव्र किया। शैतान के बंधन से मुक्त होकर यहूदियों ने दासता से छुटकारा पाया, और इसीलिए वेड परंतु अभी भी मुसीबतों का सामना कर रहे थे—परन्तु ऊपर से ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि उनकी जीत की खुशी में वे सही ढंग से प्रतिक्रिया दें। इस वाक्य में परमेश्वर के महान कार्य के परिणामस्वरूप डांसों के झुण्डों के हटने की बात है, जो फ़रौन, उसके कर्मचारियों और प्रजा से दूर किया गया।
केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य बताता है कि परमेश्वर के अद्भुत फैसलों के प्रभाव में जिस निर्गमन-काल की प्रारम्भिक दबावपूर्ण स्थिति थी, वह समाप्त हो जाती है। डांसों के झुण्ड प्रतीक हैं भक्ति-उल्लास और मिस्र-राज्य की हिंसा के अंत को दर्शाने के लिए—अब उस बंधन का कोई निशान नहीं रहा। यह उद्धार की पूरी योजना का प्रमाण है कि परमेश्वर अपने लोगों को पथ से भटकने नहीं देता, बल्कि उनके बचाव के लिए शक्तिशाली कदम उठाता है।
मुख्य विषय (two to three themes)
पवित्र तुलनात्मक संदर्भ (related passages)
1) निर्गमन 14–15: समुद्र के पार होने के अवसर पर भी यही सिद्धांत दिखता है—ईश्वर की शक्तियों के सामने भय-विहीन आस्था।
2) निर्गमन 12:41–42: यह प्रमुख मोड़ मिस्र से बहिष्कृत होकर यात्रा की शुरुआत को चिह्नित करता है—उद्धार के बाद जीवन-यात्रा में आराम नहीं, बल्कि नयी दिशा मिलती है।
3) पलायन 32–33: स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के साथ निष्ठा रखने वाला व्यक्ति भी विपरीत परिस्थितियों में परमेश्वर की सत्ता के प्रति विश्वास बनाए रखता है।
व्यावहारिक विचार
हम भी संकटों के बीच ईश्वर के वादों पर टिके रहें। उद्धार की अनुभूति मिलने पर भी मानवीय प्रतिक्रियाओं में संतुलन आवश्यक है—आनंद के साथ विनम्रता और सेवक-जीवन की प्रेरणा। dipercut—याद रखें: डांस का स्वरूपी आनंद एक आंतरिक विश्वास का प्रस्तुति है, न कि केवल बाह्य दिखावा।
सारांश
निर्गमन 8:31 में यह संकेतात्मक दृश्य है कि भयानक दासी-युग समाप्त हो रहा है और ईश्वर के उद्धारकारी हाथ से बनी दूरियाँ—फरौन-प्रजा से—स्थापित हो रही हैं। यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों की मुक्ति को केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण के अवसर के रूप में देखते हैं।
Cross-references (संदर्भ-कार्य)
क्यों कि यह उद्धार की पूर्णता का क्षण है, नीचे दिए गए संदर्भ उनके साथ एक पंक्ति में विचार के लिए उपयोगी हैं:
नोट: ऊपर के संदर्भ केवल संकेतात्मक हैं; पूर्ण वाक्यों के पाठ नहीं उद्धृत किए गए हैं।
sources: मार्ग-योग, टुकड़े-उद्धार के साधन, और प्रसिद्ध पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचार
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी भी उद्धरण का पूर्ण पाठ नहीं लिया गया है; यदि उनके विचार उद्धृत हों तो सीधे उद्धरण शब्दों में संक्षेपित किए गए हैं।