उत्पत्ति 21:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और अब्राहम ने अबीमेलेक को एक कुएँ के विषय में जो अबीमेलेक के दासों ने बलपूर्वक ले लिया था, उलाहना दिया।

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उत्पत्ति 21:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 21:25 का पाठ—स्थिति और संदेश

इस वाक्य में अभिमुख दृश्य है कि आब्राम ने अभिमीक के दासों द्वारा कब्जा किए गए कुएँ के बारे में अबीमेलेक को उलाहना दी। यह घटना तब घटनाप्रधान है जब अब्राहम और अबीमेलेक के बीच समझौते और रिश्ते का एक नया पहलू उभरता है: परमेश्वर के लोगों के अधिकार, और उनके संसाधनों की सुरक्षा का प्रश्न। यह दृश्य यह बतलाता है कि ईश्वर के लोग अपने जीवन पर प्रभाव डालने वाले व्यावहारिक मुद्दों के प्रति भी श्रद्धा और सत्य के साथ खड़े रहते हैं।

ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से क्या स्पष्ट होता है

यहाँ स्पष्ट है कि परमेश्वर के उद्धारकर्ता अपने जीवन के संसाधनों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार हैं। आब्राम की आलोचना के पीछे संदेश है कि परमेश्वर के लोगों के पास उनके दासों और उनके निवास-स्थान से जुड़ी स्थितियाँ स्पष्ट और निष्पक्ष रूप से संरक्षित होनी चाहिए। विश्वास केवल आस्था की बातें नहीं, बल्कि व्यवहार में निष्कलंक न्याय और सच्चे करुणा के साथ जुड़े होते हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

  • कुआँ— जीवनधारा, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का प्रतीक; कुएँ की सुरक्षा ईश्वरीय आशीष की स्थिरता बताती है।
  • बलपूर्वक लिया गया— अन्याय और दमन का संकेत; किसी के अधिकार पर अतिक्रमण के विरुद्ध आवाज उठाना उचित कर्तव्य है।

संबंधित बाइबिल अंश

यह प्रसंग पिछले और आगे के उत्पत्ति-पाठों से जुड़ा है।

  • उत्पत्ति 21:22–23— अबीमेलेक का आब्राम से शांतिपूर्ण व्यवहार और यह घोषणा कि वे ईश्वर के भय से काम करते हैं, एक साथ कदम पीछे चलती है; यह संदर्भ इसे दिखाता है कि आस्था और नैतिकता व्यवहार में कैसे प्रकट होती है।
  • उत्पत्ति 26:15–22— इसी प्रकार इस समय के कुओँ के मुद्दे ने समान संघर्षों को दिखाया, जहाँ भविष्य के सत्ता-सम्बन्धों में न्याय और शांति प्रमुख रहे।
  • गिनती 27:2–3— विरासत और अधिकारों के विवादों में शांति और न्याय की आवश्यकता पर जोर देता है, जिससे प्रतीत होता है कि परमेश्वर के लोग प्रत्येक प्रकार के विवाद में सत्य और निष्पक्षता को प्राथमिक मानते हैं।

आज के लिए अनुप्रयोग

हमारे समय में भी ईश्वर के अनुयायियों के लिए सत्य-न्याय और सम्मानित अधिकारों की सुरक्षा अनिवार्य है। कुएँ की घटना एक स्मरण है कि समाज मेंPERTY के संसाधनों या भूमि-प्राप्ति/दायित्वों के समय परिपक्व और निष्पक्ष मार्ग अपनाने चाहिए। विश्वास के साथ सक्रियता—न्यायपूर्ण कार्रवाई, सच बोलना, और दूसरों के अधिकारों के सम्मान को साथ लेकर चलना—हमें सत्य के मार्ग पर बनाए रखता है।

छोटे संदेश (मर्यादित उद्धरण)

Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठोस शब्दों का शास्त्रीय संदर्भ यहाँ संक्षेप में नहीं दिया जा रहा है, परन्तु उनके विचार इस निष्कर्ष को सुदृढ़ करते हैं कि ईश्वर के लोग व्यवहारिक न्याय के साथ विश्वास को निभाते हैं और अधिकारों की रक्षा करते हैं।

संक्षेपित निष्कर्ष: यह verses यह दिखाते हैं कि ईश्वर के लोग न केवल भक्ति में बल्कि व्यवहारिक जीवन में भी सत्य, नैतिकता और सुरक्षा के लिए खड़े रहते हैं। जैसे आब्राम ने एक समाधान खोजा, हमारे लिए भी अपने संसाधनों, अधिकारों और संबंधों को ईमानदार और साहसपूर्ण तरीके से संभालना आवश्यक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 21:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए जितने कुओं को उसके पिता अब्राहम के दासों ने अब्राहम के जीते जी खोदा था, उनको पलिश्तियों ने मिट्टी से भर दिया।

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सो अब्राम, और लूत की भेड़-बकरी, और गाय-बैल के चरवाहों में झगड़ा हुआ। उस समय कनानी, और परिज्जी लोग, उस देश में रहते थे।

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उत्पत्ति 29:8 (HINIRV) »
उन्होंने कहा, “हम अभी ऐसा नहीं कर सकते, जब सब झुण्ड इकट्ठे होते हैं तब पत्थर कुएँ के मुँह से लुढ़काया जाता है, और तब हम भेड़-बकरियों को पानी पिलाते हैं।”

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