उत्पत्ति 47:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब मिस्र और कनान देश का रुपया समाप्त हो गया, तब सब मिस्री यूसुफ के पास आ आकर कहने लगे, “हमको भोजन वस्तु दे, क्या हम रुपये के न रहने से तेरे रहते हुए मर जाएँ?”

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उत्पत्ति 47:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

कथन का सीधा अर्थ

उत्तरण: उत्पत्ति 47:15 में बताया गया है कि मिस्र और कनान के लोगों की संपत्ति खत्म हो जाने पर वे यूसुफ के पास सहायता हेतु गये और उनसे भोजन के लिये जीविका माँगी, क्योंकि उनके पैसे समाप्त हो चुके थे और तब भी वे जीवित रहने की उम्मीद पर निर्भर थे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यूसुफ ने मिस्र में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है: भिन्न-भिन्न कारणों से लोगों के लिए भोजन और वितरण का प्रबंध। जब अकाल फैला, तब पुत्र जोसेफ ने राज्य और परिवार के बीच एक व्यवस्थित व्यवस्था स्थापित की। यह आयाम एक साथ दो कारणों को दर्शाता है—एक ओर दया और व्यवस्था, दूसरी ओर संकट के समय मानव आवश्यकताओं के प्रति यत्न और निर्भरता। अध्याय 47 का यह भाग प्रभु द्वारा दी गयी योजना के अनुसरण का एक ठोस उदाहरण है, जिसमें समाज के कमजोर वर्ग भी मदद के लिए आश्रित होते हैं और राज्य समर्थक भूमिका निभाता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- पैसे की समाप्ति और अनिश्चित भोजन स्थिति में लोग यूसुफ से सहायता मांगते हैं, जो सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के केंद्र में बना रहता है।
- यह अंश मानवीय निर्भरता, समुदाय की जिम्मेदारी और दया के संयोजन को उजागर करता है।
- प्रभु की योजना में विपदा भी एक अवसर बन जाती है ताकि विश्वासी समुदाय एकरूपता और संसाधन संचयन के बारे में सीख सके।

मूल पाठ से जुड़े प्रमुख संकेत

यह अंश दिखाता है कि भौतिक संसाधनों की कमी के समय भी एक ऐसी व्यवस्था टिके रहती है जो जरूरतमंदों की देखरेख करती है, और यह सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से मिस्र के राज्य-व्यवस्था की क्षमता को दर्शाता है।

2-3 प्रयोजनसूचक धारणाएँ

  • आती विपदा के समय निर्भर रहने वाले लोग सहायता के लिए एक स्थान पर जाते हैं; वे उम्मीद करते हैं कि प्रभु की व्यवस्था उनके साथ है।
  • जोसेफ का शासन और भाइयों के साथ उनका व्यवहार, एक भावी पहलू के रूप में समाज-कल्याण और दया के उद्गम को दिखाते हैं।

अन्य प्रासंगिक संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या

- उत्पत्ति 41:53-57: महाकालीन अकाल के बाद लोग यूसुफ के निर्देशानुसार भोजन के लिए एक संगठित योजना में जुड़ते हैं; यह प्रसंग बताता है कि संकट के समय भी एक सुविकसित वितरण तंत्र बना रहता है।

- निर्गमन 16:15-21: भोजन के लिए ईश्वर द्वारा दिए गए मैना़ और संग्रह का सिद्धांत यहाँ एक समाजिक-आर्थिक व्यवस्था के रूप में चलने लगता है।

- यशायाह 58:10-11: दयालु क्रिया मांग और समर्थन के माध्यम से जीवित रहने की सुरक्षा की बात करता है; समाज का उत्तरदायित्व इन परिस्थितियों में विशिष्ट रूप पाता है।

धार्मिक-प्रायोगिक निष्कर्ष

इस पाठ से हमारा सीखना है कि संकट के क्षणों में भी परमेश्वर की व्यवस्था भरोसे और दया के साथ काम करती है। एक समाज के सदस्य के रूप में, जरूरतमंदों की सहायता करना न केवल एक नैतिक कर्तव्य है, बल्कि विश्वास की प्रयोगशाला भी है जहाँ परमेश्वर की व्यवस्था प्रमाणित होती है।

संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway

जब हमें संकटकाल में भोजन या संसाधन की कमी हो, तो भरोसे के साथ सहायता मांगें और समाज-समर्थन के रास्ते खोजें। प्रभु की योजना के तहत समुदायिक सहायता और समानता की भावना बनाए रखें।

सीधे उद्धरण (हेन्री/बार्न्स/एडम क्लार्क)

इस अनुभाग में सीधे उद्धरण बिल्कुल उपलब्ध नहीं थे; यदि आप चाहें तो मैं Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शैलीगत सार को संক্ষেপित अर्थों में शामिल कर सकता हूँ।

Cross-references with brief explanations

- उत्पत्ति 41:53-57: अकाल में परिवार और समकालीन समाज के वितरण व्यवस्था का विस्तार; यह दिखाता है कि कैसे भोजन और संसाधन एक बड़ेnetzwork के रूप में बंटते हैं।
- निर्गमन 16:15-21: ईश्वर की आपूर्ति और तांत्रिक व्यवस्था का प्रतीक; यह अकाल के समय manna और वितरण के नियमों से मेल खाता है।
- यशायह 58:10-11: दया के प्रतिफल के रूप में आशीष और सुरक्षा का संदेश, जो सामाजिक सहायता के प्रभाव को दिखाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 47:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 47:18 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 47:18 (HINIRV) »
वह वर्ष तो यों कट गया; तब अगले वर्ष में उन्होंने उसके पास आकर कहा, “हम अपने प्रभु से यह बात छिपा न रखेंगे कि हमारा रुपया समाप्त हो गया है, और हमारे सब प्रकार के पशु हमारे प्रभु के पास आ चुके हैं; इसलिए अब हमारे प्रभु के सामने हमारे शरीर और भूमि छोड़कर और कुछ नहीं रहा।

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उत्पत्ति 47:24 (HINIRV) »
और जो कुछ उपजे उसका पंचमांश फ़िरौन को देना, बाकी चार अंश तुम्हारे रहेंगे कि तुम उसे अपने खेतों में बोओ, और अपने-अपने बाल-बच्चों और घर के अन्य लोगों समेत खाया करो।”

न्यायियों 8:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
न्यायियों 8:8 (HINIRV) »
वहाँ से वह पनूएल को गया, और वहाँ के लोगों** से ऐसी ही बात कही; और पनूएल के लोगों ने सुक्कोत के लोगों का सा उत्तर दिया।

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