Old Testament
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हबक्कूक 3:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पहाड़ तुझे देखकर काँप उठे; आँधी और जल-प्रलय निकल गए; गहरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात् लहरों को ऊपर उठाया।
हबक्कूक 3:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 3:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 11:29 (HINIRV) »
विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे। (निर्ग. 14:21-31)

भजन संहिता 93:3 (HINIRV) »
हे यहोवा, महानदों का कोलाहल हो रहा है*, महानदों का बड़ा शब्द हो रहा है, महानद गरजते हैं।

यहोशू 4:23 (HINIRV) »
क्योंकि जैसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने लाल समुद्र को हमारे पार हो जाने तक हमारे सामने से हटाकर सूखा रखा था, वैसे ही उसने यरदन का भी जल तुम्हारे पार हो जाने तक तुम्हारे सामने से हटाकर सूखा रखा;
हबक्कूक 3:10 पर टिप्पणी
पद का संदर्भ हबक्कूक के गीतात्मक प्रकोप में आता है, जब पैगंबर परमेश्वर के नियन्त्रण और शक्ति के सामने दुनिया की अशांत स्थितियों को देखता है। यहाँ दृश्य शक्ति की भाषा है: पहाड़ काँपते हैं, आँधी-जल-प्रलय निकलते हैं, समुद्र लहरों को उठाते हैं। यह प्रभाव से भरी प्रकृति के प्रतिकार को दिखाता है, जो परमेश्वर की दिव्य अवज्ञा-अनुमति के समय भी उसी की महिमा और न्याय का उद्घोष करती है।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य पर्वतों, आँधियों और समुद्री लहरों के एकत्रित प्रतिरोध का प्रतीक है जो परमेश्वर के अद्भुत प्रभाव के सामने विवश होते हैं। यह दिखाता है कि परमेश्वर की उपस्थिति ब्रह्मांड के प्राकृतिक चक्रों को भी हिला कर रख देती है; उनके भय से पहाड़ कांपते हैं और जल-प्रलय जैसे दृश्य निकलते हैं। यह पवित्र दैवीय क्रोध, पक्का निर्णय और उद्धार की भाषा में एक चेतावनी नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज्य की पूर्णता की पुष्टि है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित पल
1) नहेमियाह 1–2 की घटनाएँ जहाँ पृथ्वी और सत्ता परमेश्वर के सामने अपनी स्थिति स्वीकार करते हैं।
2) विमानह 11 का भाग्य और तीनों ऋतुओं में प्रकृति के नियंत्रण का संकेत दिखाने वाले भाग।
3) युवा बाइबलों में सॉफ्ट समर्थनों के संदर्भ, जहाँ प्राकृतिक/design-रखा गया भय मनुष्य के लिए परमेश्वर के महिमामय काम की याद दिलाता है।
व्यावहारिक विचार
जब हमारे जीवन में उत्तेजक परिस्थितियाँ आएँ—चिंता, विपत्ति या अनिश्चितता—तो इस वचन से प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर की सत्ता हर स्थिति पर विजय रखती है। हमारे भय को परमेश्वर की पवित्र महिमा के सामने समर्पित करना सीखना चाहिए, और विश्वास से यह मानना चाहिए कि उनका राज्य स्थिर है।
छोटा-सा क्रॉस-रेफरेंसे
1) दानियेल 4:35 — पृथ्वी की सब चीजें परमेश्वर के साथ सामंजस्य में अणु-परमाणु तक परिवर्तन शो करती हैं।
2) रोम 8:38–39 — परमेश्वर के प्रेम के सामने कुछ भी पृथक नहीं।
3) यूहन्ना 1:3 — प्रभु के शब्दों से प्रकृति भी उनके आदेश के अनुसार चलती है।
सारांश
हबक्कूक 3:10 में प्रकृति की शक्तियाँ परमेश्वर की महिमा के समक्ष घबराती हैं—यह दिखाता है कि परमेश्वर का न्याय और उद्धारपूर्ण कर्तव्य अक्षुण्ण है। यह पाठ हमें यही सिखाता है कि भय के स्थान पर विश्वास और सच्चे आराधन का उत्तर है: परमेश्वर के नियंत्रण में हर हालत सुधर सकती है, और उसकी महिमा हर तंत्र से ऊँची है।
नोट: इस पवित्र पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मूल टिप्पणियों से पंक्तियाँ या संक्षेप उद्धरण आवश्यक जगहों पर उपयोग किए गए हैं।