Old Testament
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हबक्कूक 3:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जैतून के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियाँ न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, (लूका 13:6)
हबक्कूक 3:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 3:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 5:17 (HINIRV) »
तुम्हारे पके खेत और भोजनवस्तुएँ जो तुम्हारे बेटे-बेटियों के खाने के लिये हैं उन्हें वे खा जाएँगे। वे तुम्हारी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को खा डालेंगे; वे तुम्हारी दाखों और अंजीरों को खा जाएँगे; और जिन गढ़वाले नगरों पर तुम भरोसा रखते हो उन्हें वे तलवार के बल से नाश कर देंगे।”

योएल 1:16 (HINIRV) »
क्या भोजनवस्तुएँ हमारे देखते नाश नहीं हुईं? क्या हमारे परमेश्वर के भवन का आनन्द और मगन जाता नहीं रहा?

आमोस 4:6 (HINIRV) »
“मैंने तुम्हारे सब नगरों में दाँत की सफाई करा दी, और तुम्हारे सब स्थानों में रोटी की घटी की है, तो भी तुम मेरी ओर फिरकर न आए,” यहोवा की यही वाणी है।
हबक्कूक 3:17 का संदर्भ-परिस्थितियाँ और पाठ का संदेश
इस पद के साथ हबक्कूक की अगुवाई में एक गम्भीर चिंता व्यक्त की गई है: परमेश्वर के दर्शन के अनुरूप विश्वास की दृष्टि से संसार की न चलने वाली घटनाओं के बीच भी भरोसे की गूँज है। “अगर अंजीर के वृक्ष पर फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें... भेड़शालाओं में भेड़-बकरियाँ न रहें… थानों में गाय बैल हों”—इस प्रकार के दृश्य अनिश्चितताएँ और बाधाएँ दिखाते हैं, परन्तु भक्त के हृदय में आस्था की आवाज़ बनी रहती है कि परमेश्वर ही हमारी सहायता है, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
परमेश्वर की ओर से देखें तो क्या स्पष्ट होता है
यह अंश कहानी का वह भाग है जहाँ भविष्य की अस्थिरताओं के बीच भी विश्वास की स्थिरता को केन्द्र में रखा गया है। कहीं-न-कहीं यह तस्वीर दिखाती है कि आस्था केवल हर चीज के योग्य परिणामों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि परमेश्वर के निश्चय और मार्ग पर भरोसा रखने की मांग करती है। समस्या चाहे पशुधन, फसल, या आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हो—परमेश्वर के लोगों के लिए मोड़ न बदले जाने वाले विश्वास की पुष्टि यही है कि वह संघर्ष के समय भी साथ है।
शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
- अंजीर के वृक्ष: बारहवें फलों की प्रतीकात्मकता के साथ प्रस्तुत होता है—परन्तु यदि अब फूल भी न लगे, तो जीवन की उम्मीद कैसे टिके?
- दाखलताओं/उपज: फसल की कमी का अर्थ है जीवन-निर्वाह पर हमला, जो विश्वास के गहरे परख को उजागर करता है।
- झील-घेरा से बाहर की चीजें: जल, जंगल, जंगल का जीवन—सब एक बार फिर से दिखाते हैं कि निर्भरता किस पर है।
संबन्धित बाइबिल अंश
1) लूका 13:6: एक वृक्ष-उच्चारण का उदाहरण है—कथित फल-फूल के अभाव में भी चेतावनी और परिष्कार का संकेत मिलता है।
2) यिर्मयाह 17:7-8: आत्म-विश्वास है जो निर्भर करता है प्रभु पर, सूखे समय में भी जीवित रहता है।
3) दानिएल 3:18: विश्वास के सामने परिणाम की अपेक्षा को पीछे छोड़कर, परमेश्वर की सामर्थ्य पर भरोसा रखना सीखाते हैं।
मूल संदेश और आज का अनुप्रयोग
यह इशारा करता है कि भक्त के लिए बाहरी संकेतों की कमी सदा निष्कर्ष नहीं बनती; आस्था में धैर्य बनाए रखना और परमेश्वर के सामर्थ्य पर टिके रहना महत्त्वपूर्ण है। आज के समय में भी बार-बार हमें यही याद दिलाया जाता है कि आर्थिक कठिनाइयाँ, स्वास्थ्य-चिंताएँ या सामाजिक दबाव कभी-कभी बढ़ सकता है, पर हमारे सच्चे स्रोत—ईश्वर के निश्छल प्रेम और प्रतिफल—हमारे भीतर रहते हैं।
कथन-गूँज: प्रसिद्ध मौलिक टिप्पणीकारों से संकेत
मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सामान्य-कथन से संक्षिप्त बिंदु जो यहाँ उपयुक्त हैं:
• हेनरी कहते हैं कि वास्तविक आस्था बाहरी सफलताओं से नहीं टूटती; यह परमेश्वर की सन्तुष्टि पर टिके रहने की है। उनकी ओजपूर्ण टिप्पणी से यह सार निकलता है कि भय के समय भी परमेश्वर की सत्ता में निष्ठा बनानी चाहिए।
• बार्न्स के अनुसार यह पाठ जीवन के अस्थिर भागों में भी ईश्वर के शासन की विश्वसनीयता को स्थापित करता है; भूख या कमी के क्षणों में भी भक्ति वैसी ही रहती है जैसी परमेश्वर के वचन पर आधारित होती है।
• क्लार्क संकेत देते हैं कि भय और निराशा के समय परमेश्वर के साथ रहना ही आत्मिक फल-उन्नति की कुंजी है; परिस्थिति चाहे जो हो, विश्वास की स्थिरता बनी रहे।
उद्धरण के लिए: अगर इन स्रोतों के छोटे-छोटे शब्द इस पाठ के अनुरूप हों, तो वे पाठ के साथ स्पष्ट रूप से उद्धृत किए जा सकते हैं, परन्तु यहाँ पूर्ण वाक्यों की प्रत्यक्ष पुनरुक्ति नहीं दी जा रही है।
संक्षिप्त साक्ष्य-आधार