Old Testament
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हबक्कूक 3:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो भी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूँगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूँगा
हबक्कूक 3:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 3:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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अय्यूब 13:15 (HINIRV) »
वह मुझे घात करेगा*, मुझे कुछ आशा नहीं; तो भी मैं अपनी चाल-चलन का पक्ष लूँगा।

यशायाह 61:10 (HINIRV) »
मैं यहोवा के कारण अति आनन्दित होऊँगा*, मेरा प्राण परमेश्वर के कारण मगन रहेगा; क्योंकि उसने मुझे उद्धार के वस्त्र पहनाए, और धर्म की चद्दर ऐसे ओढ़ा दी है जैसे दूल्हा फूलों की माला से अपने आपको सजाता और दुल्हन अपने गहनों से अपना सिंगार करती है। (इब्रा. 3:18, रोम. 5:11, प्रका. 19:7-8)

हबक्कूक 3:18 पर टिप्पणी — हिंदींदा परिप्रेक्ष्य
स्थिति का परिचय: इस छंद में नबी हबक्कूक विषमताओं के बीच परमप्रभु की महान अशांति-सम्बन्धी योजनाओं को देखते हुए अपनी आस्था व्यक्त कर रहा है। संदर्भ में वह यह दर्शाता है कि विपत्तियों के समय भी परमेश्वर के उद्धार और उसकी सत्ता के सामने हमारी अंतःस्थ.selection नहीं टूटती। शास्त्रीय संदर्भ से ज्ञात है कि यह भाग नबी के एक प्रार्थना-गीत जैसा है जहाँ विश्वास की अडिगता और परमेश्वर की महिमा एक साथ उभरती है।
1) पाठ का संदेश: ईश्वर के कारण आनंद और मगनता
शब्दार्थ में हबक्कूक कहता है: मैं यहोवा के कारण आनंदित रहूँगा और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूँगा। यहाँ “आनन्दित” और “मगन” दो उभरे हुए भाव हैं जो आस्था की गहिराई को दर्शाते हैं। यह सिर्फ जीवन-सुख के क्षण नहीं हैं, बल्कि यह विश्वास की गूंज है कि परमेश्वर की उपस्थिति और उसकी उद्धारकारी क्रिया हमारी दृष्टि को परिवर्तित कर देती है। अगर विपत्ति है, तब भी परमेश्वर के साथ जुड़ाव से मन शांत रहता है।
2) गूढ़ शब्दावली और imagery की सहायता
“आनन्दित” (गुरुत्वपूर्ण आस्थात्मक खुशियाँ) का तात्पर्य एक स्थिर आस्था से है जो हालात के परिवर्तन से प्रभावित नहीं होती। “मगन रहना” एक अधिक गहरे उत्साह और पूर्ण भरोसे का संकेत है कि उद्धारकर्ता के सामने मन सदैव प्रसन्न है। उद्धारकर्ता से आशय परमेश्वर स्वयं हैं—जो विश्वस्त के लिए सच्चा पलटन और सामर्थ्य हैं। यह छंद यह मिलन करवाता है कि हमारे सुख-पीड़ा के पर्याय नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा है जो मन को स्थिर बनाती है।
3) संबंधी आयतें (cross-references) और उनके सार्थक सम्बन्ध
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि धार्मिक अनुभव में आनंद और मगनता केवल सुख-सम्पन्न समय की नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा और सत्ता के प्रति दृढ़ विश्वास की उपज हैं।
4) तीन-चरणी व्याख्या: today’s application
इस पाठ का समेकित संदेश यह है कि संकट के समय भी ईश्वर के बारे में हमारी भरोसा-भावना अद्भुत गति से उन्नत होती है। लेखक हबक्कूक ने वही आकाशीय सत्य दोहराया है: परमेश्वर के कारण भीतर की खुशी और उद्धारकर्ता के भरोसे पर कायम मगनता। यह मानवीय अनुभूति को दिव्य नज़र देती है—कि जीवन-उद्धार की पूर्णता केवल परिस्थिति के अनुसार नहीं, बल्कि परमेश्वर की सच्चाई में है।
कथन-उद्धरण (पवित्र-अंश): Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के आधुनिक उद्धरणों के बजाय पाठ-स्तर पर उनके स्पष्ट तर्क का संकेत नीचे नहीं है; यदि आप चाहें तो उनके की-टिप्पणियाँ अलग पन्नों पर संक्षेप में दी जा सकती हैं।
संक्षिप्त सार
हबक्कूक 3:18 में नबी की अडिग आस्था यह बताती है कि अवस्था चाहे जैसी भी हो, परमेश्वर के कारण आंतरिक आनंद और उद्धारकर्ता में गहरी मगनता बनी रहती है। यह विश्वास की ठोस शाख है जो विपत्ति के बीच भीषण अंधकार को कट कर परमेश्वर की महिमा को उजागर करती है।