Old Testament
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हबक्कूक 3:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तू क्रोध में आकर पृथ्वी पर चल निकला, तूने जाति-जाति को क्रोध से नाश किया।
हबक्कूक 3:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 3:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 51:33 (HINIRV) »
क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यह कहता है: बाबेल की बेटी दाँवते समय के खलिहान के समान है, थोड़े ही दिनों में उसकी कटनी का समय आएगा।”

मीका 4:12 (HINIRV) »
परन्तु वे यहोवा की कल्पनाएँ नहीं जानते*, न उसकी युक्ति समझते हैं, कि वह उन्हें ऐसा बटोर लेगा जैसे खलिहान में पूले बटोरे जाते हैं।

प्रेरितों के काम 13:19 (HINIRV) »
और कनान देश में सात जातियों का नाश करके उनका देश लगभग साढ़े चार सौ वर्ष में इनकी विरासत में कर दिया। (व्य. 7:1, यहो. 14:1)
हबक्कूक 3:12 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
हबक्कूक की पुस्तक में नबी का यह भाग परमेश्वर की महिमा और न्याय को देखने की गूंज से भरा है। तीसरे अध्याय में नबी एक आशीर्वचन की ध्वनि में परमेश्वर के प्रभावशाली कार्यों को याद कर रहा है—घोर क्रोध, अधिकार और विजय के क्षण। इस पंक्ति में देवता का क्रोध पृथ्वी पर प्रतिष्ठित हो रहा है, और जातियाँ-जातियाँ नाश के मुँह में हैं। यह चेतावनी और आशीर्वचन दोनों का मिश्रण है: परमेश्वर द्वारा पाप के परिणाम स्पष्ट होंगे, और उनकी ताकत से राष्ट्रों की सत्ता ध्वस्त हो जाएगी।
मुख्य अर्थ
पंक्ति बताती है कि परमेश्वर अपने क्रोध के समय में देश-देश के बीच की सीमाओं को नहीं देखता; उसकी योजना और न्याय बनकर रहता है। पृथ्वी पर आकाशगंगा की तरह फैला नहीं रहता, बल्कि नैतिक कर्तव्य और पाप के कारणों पर ठहराव बनता है। संदर्भगत रूप से यह एक युद्धक-गीत के रूप में है, जिसमें ईश्वर की क्रोध-पूर्वक शांत सत्ता दिखती है, और यह बताता है कि दयालुता के साथ साथ न्याय भी परमेश्वर का अटूट गुण है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ और संकलन प्रस्ताव
यहाँ मोटे तौर पर तीन प्रचलित प्रवचन मिलते हैं—
जीवन-प्रयोजन और व्यवहारिक प्रकाश डालना
व्यावहारिक रूप से यह वाक्य हमें स्मरण कराता है कि प्रेरित होकर हम भगवान के न्याय-राज्य के प्रति विनयशील रहें। कठिन समय में भी विश्वास की आशा बनाए रखें—क्योंकि परमेश्वर अपने मानवीय ठहराव के भीतर भी सत्य और उद्धार की राह दिखाते हैं। पाप के परिणामों से न डरें, बल्कि साहसपूर्वक उनके बीच ईश्वर के मोड़ों को समझें और सत्य के साथ आगे बढ़ें।
अनुच्छेद-आधारित टिप्पणी
2 बड़े विद्वान टिप्पणियाँ संक्षेप में:
Matthew Henry: यह Verse देव की क्रोध की निष्पत्ति को दर्शाता है—जहाँ अन्याय पर नैतिक हानि होती है, वहाँ परमेश्वर की पवित्रता की महिमा प्रकट होती है।
Albert Barnes: यहाँ क्रोध एक नैतिक व्यवस्था का हिस्सा है; पृथ्वी पर उसका आक्रमण पाप के कारण है और यह उद्धार के लिए नये रास्ते खोलता है।
Adam Clarke: यह क्रोध केवल दंड नहीं, बल्कि पाप से दूरी बनाकर परमेश्वर के राज्य के लिए आवश्यक ब्यौरा है; नष्ट होना शब्द नहीं, बल्कि पथ-निर्देशन है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और छोटे निर्माण
1) सृष्टि और न्याय के बारे में अन्य अभिलेख: इबरानी-याकूब की पुस्तकों में ईश्वर के शासन के साथ क्रोध और उद्धार के क्षणों का उल्लेख मिलता है।
2) मसीही विश्वास-उन्नति के पाठ: कठिन समय में भी परमेश्वर के उद्धार की गवाही मजबूत होती है।
3) प्रेरित-उद्धार के संदर्भ: विश्वासियों के लिए न्याय-सत्य और प्यार का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
संक्षिप्त समापन
हबक्कूक 3:12 में परमेश्वर का क्रोध और निर्णय-शक्ति स्पष्ट है: वह पृथ्वी पर उत्सर्ग और नाश लाकर अपनी पवित्रता को स्थापित करता है। यह न केवल न्याय का संदेश देता है, बल्कि विश्वास और आस्था की आवश्यकता भी दर्शाता है कि वक्त-बेवक्त परमेश्वर के चरणों में श्रद्धा बनी रहे।
संक्षिप्त संदर्भ-नोट: यह पाठ अन्याय के खिलाफ ईश्वर की सशक्तिकरण-योजना की याद दिलाता है—पाप के परिणाम स्पष्ट होते हैं, परंतु उद्धार की आशा स्थिर रहती है।