Old Testament
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हबक्कूक 3:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे यहोवा, क्या तू नदियों पर रिसियाया था? क्या तेरा क्रोध नदियों पर भड़का था, अथवा क्या तेरी जलजलाहट समुद्र पर भड़की थी, जब तू अपने घोड़ों पर और उद्धार करनेवाले विजयी रथों पर चढ़कर आ रहा था?
हबक्कूक 3:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 3:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 68:17 (HINIRV) »
परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन् हजारों हजार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्रस्थान में है।

व्यवस्थाविवरण 33:26 (HINIRV) »
“हे यशूरून, परमेश्वर के तुल्य और कोई नहीं है, वह तेरी सहायता करने को आकाश पर, और अपना प्रताप दिखाता हुआ आकाशमण्डल पर सवार होकर चलता है।

भजन संहिता 18:10 (HINIRV) »
और वह करूब पर सवार होकर उड़ा, वरन् पवन के पंखों पर सवारी करके वेग से उड़ा।
हबक्कूक 3:8 पर टिप्पणी—यहोवा का क्रोध और उद्धार का आरंभ
यह पद यह दर्शाता है कि परमेश्वर के क्रोध और शक्ति की क्रियाएं अक्सर प्राकृतिक घटनाओं से भी प्रकट होती हैं—यथा नदियाँ, समुद्र, घोड़ों और युद्ध-यात्राओं के माध्यम से। हबक्कूक के पाठ में यह प्रश्न उठता है: परमेश्वर कैसे देश और लोग के लिए अपने सच्चे न्याय के साथ प्रयोजन पूरा करते हैं, भले ही तब विश्वासियों को कठिन समय का सामना क्यों करना पड़ रहा हो? इसलिए यह वचन हमें न केवल परमेश्वर की महान सत्ता की याद दिलाता है, बल्कि उसकी उद्धारकारी कार्य की दिशा और प्रयोजन को भी समझाता है।
उच्चारण का मूल संदर्भ
हबक्कूक के समयजात में यह प्रार्थना-गीत परमेश्वर की दृढ़ निश्चयता को दर्शाता है। हबक्कूक भगवान से यह पूछते हैं कि जब अत्याचार बढ़ रहा है, और राष्ट्र अन्याय के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो परमेश्वर कहाँ है? उत्तर में पवित्र अध्याय यह दिखाते हैं कि प्रभु का क्रोध और उद्धार की शक्ति इतिहास के पन्नों में चढ़ती है—नदियों, समुद्र, और घोड़ों के साथ—यानी प्रकृति और ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से परमेश्वर अपनीमहिमा प्रकट करता है।
मुख्य संदेश
इस छंद में तात्त्विक संदेश यह है कि परमेश्वर अपने न्याय को विस्तृत रूप से ला रहा है—नदियाँ, समुद्र, और युद्ध-यात्राओं के संकेत एक साथ मिलकर उसकी आशीष और प्रतिशोध दोनों की गवाही देते हैं। यह एक दार्शनिक और वास्तविक विश्वास का मिश्रण है: कठिन समय में भी परमेश्वर की सत्ता, उद्धार का भरोसा और वह मार्ग, जो विजयी उद्धारक के रूप में प्रवेश करते समय प्रकट होता है।
कथन-आधार से जुड़े विषय
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संदर्भ) और उनके अर्थ
अन्वय: अन्य ग्रंथों में भी ईश्वर की समान शक्तिशाली क्रिया का उल्लेख मिलता है—यमुना, समुद्र, और युद्ध-यात्राओं के संदर्भों के साथ।
1) यशायाह में प्रभु के आकाशीय उपस्थिति और प्रजा पर उसकी दृष्टि—जो संकट के समय साहस बनाता है।
2) निर्गमन औरिमा-यात्राओं के समय परमेश्वर की वेगपूर्ण क्रिया—नदीयों और सागर पर नियंत्रण दिखाने का उल्लेख।
3) विकल्प-आत्मा के साथ विश्वासियों के लिए उद्धार की आशा—कठिन समय में भी परमेश्वर के पूर्ण राज्य की गवाही।
संप्रयुक्त टिप्पणी (संक्षिप्त समेकन)
मैथ्यू हेन्री, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क जैसे सार्वजनिक डाटा-आधारित टीका-स्रोतों में से समेटी हुई पंक्तियाँ मिलती हैं कि परमेश्वर की शक्ति केवल युद्ध-बारीकियों तक सीमित नहीं है; वह प्रकृति की शक्तियों पर उसका नियंत्रण रखता है और न्याय के समय में उद्धार को परम के सामने प्रस्तुत करता है। उनके विचारों के अनुसार इस वचन में प्रभु की नीतिगत श्रेष्ठता और धर्मी निर्णय की दृढ़ता स्पष्ट है—क्योंकि तब भी वह अपने लोक-हित के लिए मार्ग खोलता है।
किसी भी उद्धरण के संक्षिप्त अंश जो उनके कार्यों से सीधे लिए गए हैं, नीचे उद्धृत हैं: “कृपया ध्यान दें: यह भाग केवल सामान्य टिप्पणी के लिए है, सत्य उद्धरण पूरी पंक्ति में संलग्न नहीं किया गया है।”
देवोपचारक चिंतन
इस पद से प्रेरित होकर एक विश्वासी व्यक्ति यह समझ सकता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की सत्ता और उसकी उद्धार-योजना अडिग है। नदियों, समुद्र, और घोड़ों की भाषा से यह संदेश मिला है कि परमेश्वर हर क्षेत्र में राजा है—प्राकृतिक आपदाओं से लेकर ऐतिहासिक घटनाओं तक—ताकि उसका उद्धार-कार्य भय-शून्य न होकर पूर्ण हो। इसलिए हमारा उत्तर उद्धार के भरोसे के साथ, धैर्य और प्रार्थना है।
संक्षिप्त प्रार्थना
हे यहोवा, जब संकट घिर आता है तो तू ही हमारी सच्ची सहायता है। तू नदियों और समुद्र पर भी अपना राज्य स्थापित करता है; तेरे क्रोध और तेरी जलजलाहट में भी उद्धार का प्रकाश है। हमें अपने तरीकों पर भ्रम न हो, बल्कि तेरे द्वारा प्रदत्त विश्वास के साथ आगे बढ़ाते रहो।