यिर्मयाह 22:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह इस कारण सुख से रहता था क्योंकि वह दीन और दरिद्र लोगों का न्याय चुकाता था। क्या यही मेरा ज्ञान रखना नहीं है? यहोवा की यह वाणी है।

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यिर्मयाह 22:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 22:16 का परिप्रेक्ष्य और उनका संदेश

Immediate setting: यिर्मयाह नागरीय शासक হয়ोकिम (यिर्मयाह के कालखंड में समाज में अन्याय और प्रभुत्वशाही के विरुद्ध गवाही) के संदर्भ में यह कहते हैं कि राजा՞ւ और राजदाताओं के कार्य उनके लोगों के लिए कितने निर्णायक होते हैं। 22:16 विशिष्ट रूप से बताता है कि यहोवा अद्‍भुत रूप से दीन-हीन, गरीब और दुखी लोगों के लिए न्याय करने की नीयत रखता है; वह इन्हीं कारणों से राजा का ज्ञान और व्यवहार मापता है।

पवित्र पाठ का संदेश: ईश्वर के प्रति ज्ञान और आचरण

यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि सच्चा ज्ञान क्या है: दीन-दारिद्र्य के साथ न्याय करना, उनकी सहायता करना और सामाजिक विवेक को युद्ध के बजाय करुणा से संचालित करना। परमेश्वर देखता है कि नेता अपने देश के कमजोर वर्गों के प्रति कैसा व्यवहार करते हैं। यदि राजा वर्दी, धन या सत्ता से नहीं बल्कि करुणा, निष्पक्षता और सत्य में प्रतिफल देते हैं, तब उन्हें वास्तव में ज्ञानवान माना जाएगा।

कुंजी शब्दों की स्पष्टीकरण

  • ज्ञान— केवल स्मरण या सिद्धांत नहीं; यह ज्ञान वह है जो सामाजिक न्याय और दयालुता के साथ आचरण में प्रकट हो।
  • दीन-दरिद्रों का न्याय चुकाना— कमजोरों के पक्ष में निर्णय लेना, भ्रष्टाचार से दूरी बनाना, बेदखली और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होना।

अन्य सुसंगत भागों के साथ सम्बन्ध

- यिर्मयाह 22:3, जहां यहोवा कहता है कि न्याय, दया और नम्रता के साथ राजा और लोगों के नियम चलना चाहिए।

- मत्ती 23:23 में यीशु धर्माध्यक्षों को दयालुताओं के साथ यथार्थ न्याय उठाने की याद दिलाते हैं, जिससे धार्मिक अधिकारिता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी जुड़ा रहता है।

- येरम 7:5-7 में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहाँ ईश्वर यह स्पष्ट करते हैं कि अगर व्यवस्था केवल दिखावे के लिए है, तब उसका प्रभाव नहीं होता; आंतरिक परिवर्तन और दीन-हीन के प्रति व्यवहार ही वास्तविक ज्ञान को दर्शाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक संदर्भ से फायदे

मध्यकालीन और अनुवादित पाठकों के लिए यह संदेश स्पष्ट करता है कि राजनीतिक सत्ता ही नहीं, बल्कि आंतरिक नैतिकविकास भी आवश्यक है। यह शासक के लिए एक नैतिक कसौटी है: क्या वह न्याय के आधार पर शासन करता है, और क्या उसका शासन गरीबों के लिए राहत और सुरक्षा सुनिश्चित करता है?

आज के संदर्भ में नये संदेश

व्यवसाय, प्रशासन और नीति-निर्माण के हर स्तर पर जो समाज के दुर्बलों के पक्ष में कदम उठाते हैं, वही ज्ञानवान माने जाते हैं। यदि हम स्वयं भी दीन-हीनों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो यह हमारे विश्वास का वास्तविक परीक्षण है। प्रेरणा के तौर पर, इस वाक्य में दिया गया पाठ: दायित्व सिर्फ सत्ता के संतुलन नहीं, बल्कि करुणा और न्याय की संस्थापना है।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ और संक्षिप्त व्याख्या

यिर्मयाह 22:3 — नीतिगत आचरण में दया के साथ न्याय करें; यह सीधे वचननामक ज्ञान से जुड़ा है।

मत्ती 23:23 — धर्मप्रतिष्ठा के साथ सामाजिक न्याय भी आवश्यक है; सतर्क रहने की प्रेरणा देता है कि ईश्वर को सही प्रकार से पहचाना जाए।

यिर्मयाह 7:5-7 — केवल बहुतेरे दिखावे से नहीं, आंतरिक परिवर्तन और निष्कपट आचरण से समाज सुधरेगा।

संक्षेप उपयोगी निष्कर्ष

यिर्मयाह 22:16 हमें याद दिलाता है कि ज्ञान का माप कितना सही है, यह दीन-हीनों के प्रति न्याय की पुष्टि से तय होता है। हमारे समय में भी नेता और समुदाय वही माप अपनाएं जो दीन-हीनों के उद्धार और सहायता के लिए हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 22:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 9:24 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्‍न रहता हूँ। (1 कुरि. 1:31, 2 कुरि. 10:17)

यशायाह 1:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 1:17 (HINIRV) »
भलाई करना सीखो; यत्न से न्याय करो, उपद्रवी को सुधारो; अनाथ का न्याय चुकाओ, विधवा का मुकद्दमा लड़ो।”

1 यूहन्ना 2:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 यूहन्ना 2:3 (HINIRV) »
यदि हम उसकी आज्ञाओं को मानेंगे, तो इससे हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं।

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