यिर्मयाह 22:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु जिस देश में वे लौटने की बड़ी लालसा करते हैं, वहाँ कभी लौटने न पाएँगे।”

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यिर्मयाह 22:27 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 22:27 पर केंद्रित व्याख्या

मुख्य interpretive point: यिर्मयाह 22:27 में "परन्तु जिस देश में वे लौटने की बड़ी लालसा करते हैं, वहाँ कभी लौटने न पाएँगे" इस संदेश का मूल भाव यह है कि परमेश्वर के निर्णय से बाहर निकलना कठिन है और जो लोग अपने आप को देश से अधिक प्रेम करते हैं, वे अपनी ईस्त/स्वतंत्रता की आशा खो बैठेंगे। यह वचन हर उस व्यक्ति के लिए सच है जो पृथ्वी के सुखों के लिए जीवन भर भागता है और परमेश्वर की पहचानी दिशा से विचलित हो जाता है। यह उद्धार की योजना के भीतर एक चेतावनी है कि लौटना केवल राजधानी नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छानुसार सच्चे आचरण के साथ जीवन बिताने से है।

पारिवारिक-लिखित संदर्भ और साहित्यिक संरचना

यह उद्धरण यिर्मयाह के बहुवचन आह्वान, न्याय-व्यवस्था और अन्त में दयालु-प्रतिष्ठा की धारा में आता है। यिर्मयाह की पुस्तक में यह समयातीत चेतावनी है कि इस्रायली नेताओं और वहाँ के लोगों के पास देश-प्रेम का अन्यायपूर्ण भारी बोझ है, जो राष्ट्र के कल्याण के बजाय अपने व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देते हैं।

धार्मिक-तत्त्व और सिद्धान्तगत संकेत

1) स्थायी निर्भरता: परमेश्वर के साथ जीवन-यात्रा केवल भू-देश के आग्रह पर नहीं रुकनी चाहिए; असली वापसी और सच्ची सुरक्षा परमेश्वर की इच्छा में है।

2) निष्क्रिय-गति के खतरे: देश-प्रेम के अंधे प्रेम में लोग कथित “वापसी” का भ्रम पाले रहते हैं, परन्तु प्रभु के निर्णय से अलग चलना एक दुष्कर मार्ग बन सकता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संकेत

  • θεम 1:11–12 (याद दिलाता है कि परमेश्वर अपनी योजना के अनुसार चलता है, चाहे मनुष्य उसे कैसे भी समझें) — यह बताता है कि लौटना परमेश्वर के योजनाबद्ध उपाय से जुड़ा है, न कि मानव-इच्छा के अनुरूप स्वयं-निर्माण से।
  • रोम 8:28 (सब मिलाकर वे जो परमेश्वर को प्रेम करते हैं) — यह संकेत देता है कि परमेश्वर हर स्थिति में सामर्थ्य देता है, भले ही लोग देश-प्रेम में फंस जाएँ।
  • यहोशू 1:9 (जो हमारा विश्वास बढ़ाता है, वही लौटना भी है) — साहस और विश्वास पर बल देता है कि परमेश्वर के साथ रहते हुए ही सही वापसी संभव है।

संक्षेप में, ये क्रॉस-रेफरेंसेस एक दूसरे के साथ यह दिखाते हैं कि वास्तविक वापसी परमेश्वर के नेतृत्व में होती है, न कि मानव-झुकाव के आधार पर।

हमें धारणीय पूछताछ

  • क्या मैं अपने जीवन में देश-प्रेम को परमेश्वर के प्रेम से ऊपर रख रहा/रही हूँ?
  • क्या我的 निर्णय में मैं परमेश्वर की इच्छा को पहले रख रहा/रही हूँ, चाहे परिणाम कुछ भी हो?
  • कैसे मैं अपनी आशाओं को परमेश्वर के वचन के अनुरूप तौल सकता/सकती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 22:27 एक सचेत चेतावनी है कि पृथ्वी-शक्ति और देश-प्रेम से आने वाली आशाएं अस्थायी हो सकती हैं जब तक वे परमेश्वर की योजना से जुड़े न हों। परमेश्वर ही वह मार्ग दिखाते हैं जिसमें सचो वापसी, अस्तित्व-और उद्धार का स्रोत निहित है। इसलिए हमारी लौ मौलिक रूप से उसी दिशा में होनी चाहिए जो परमेश्वर की वाणी और आज्ञाओं के अनुसार है।

खास उद्धरण-उद्धृत टिप्पणीकारों से: "इस प्रकार के संदेश में परमेश्वर की योजनाओं के साथ हमारी प्रतिबद्धता को फिर से परखना आवश्यक है" (एलबर्ट बार्न्स के समान भावधारा के विचारों के अनुरूप, सहज सारगर्भी व्याख्या)।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 22:27 समानांतर पद और संबंधित वचन

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कि जो बचे हुए यहूदी मिस्र देश में परदेशी होकर रहने के लिये आए हैं, यद्यपि वे यहूदा देश में रहने के लिये लौटने की बड़ी अभिलाषा रखते हैं, तो भी उनमें से एक भी बचकर वहाँ न लौटने पाएगा; केवल कुछ ही भागे हुओं को छोड़ कोई भी वहाँ न लौटने पाएगा।”

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फिर यहूदा के राजा यहोयाकीन की बँधुआई के तैंतीसवें वर्ष में अर्थात् जिस वर्ष बाबेल का राजा एवील्मरोदक राजगद्दी पर विराजमान हुआ, उसी के बारहवें महीने के सताईसवें दिन को उसने यहूदा के राजा यहोयाकीन को बन्दीगृह से निकालकर बड़ा पद दिया।

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अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूँ।

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