Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 34:14 — तत्कालीन संदर्भ और संदेश का सार
यह पद दो महत्वपूर्ण भावनाओं और निरंतर चेतावनी की ओर इशारा करता है: सामाजिक-व्यवस्था के भीतर दयालुता और परमेश्वर की महत्ता के बीच के टकराव, साथ ही लोगों के अस्थिर विश्वास के कारण होने वाले परिणाम। इस समय इब्रानी लोग बन्धन के समय से गुजर रहे थे; यिर्मयाह prophecy के रूप में परमेश्वर उनके समाज-नियमों के प्रति सचेत कराते हैं, ताकि दास-स्वामित्व के मानक मानव-चयन से उबर सकें।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से क्या स्पष्ट होता है
पाठ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर सुरक्षा, न्याय और सम्बंधित नैतिक दायित्वों में गहराई से गन्तव्य देखते हैं। इब्री दास-प्रथा को सामान्य रूप से सामाजिक नियम के तौर पर मान्यता मिली थी; परन्तु यहाँ परमेश्वर यह कहकर उद्धृत कराते हैं कि यदि कोई भाई-दाब को सातवें वर्ष तक मोहताज़ बनाकर छोड़ना चाहिए तो उसे स्वतंत्र कर देना चाहिए। यह आदेश दयालुता, समुदाय के सामाजिक-न्याय और दावेदारी के साथ-साथ मानवीय गरिमा को उजागर करता है।
महत्वपूर्ण शब्द-चित्र और उनकी व्याख्या
संबंधित पद और उनके संकेत
1) निर्गमन 21:2-6— दास का अध्याय-समाप्ति और स्वतंत्रता का नियम; समाज-न्याय में दास-स्वत्व का मूल्य, जो यक़ीन दिलाता है कि दास भी व्यक्ति है।
2) इब्र 13:3— संसारिक बंधन के साथ दयालुता निभाने और दास-स्थिति में भी सम्मानपूर्ण व्यवहार की प्रेरणा।
3) यशाय 58:6— परमेश्वर के लिए दया और उद्धार का लक्ष्य, जो न केवल धार्मिक कर्मों पर बल देता है बल्कि मानव जीवन की गरिमा पर भी केन्द्रित है।
प्रस्तुत वर्तमान अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में यह पाठ सामाजिक-न्याय, गरिमा-पूर्ण रोजगार, और अन्याय के विरुद्ध सामुदायिक उत्तरदायित्व की स्मरण कराता है। समुदाय, परिवार और संस्थाओं को चाहिए कि वे कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा और अवसर बनाएं, न कि उन्हें स्थायी बंधन में डालें। यदि किसी को वित्तीय या सामाजिक दबाव से मुक्त किया जाए, तो यह परमेश्वर के आँचल की ओर बढ़ना है।
कहानी-योग्य सार
यिर्मयाह 34:14 एक चेतावनी है कि इब्रानी पितरों की प्रतिक्रिया में समय-समय पर ईश्वर के नियमों की अवहेलना से समाज में अन्याय बढ़ता है। परन्तु वही संदेश उसमें भी गहराई से प्रेरित है कि दास-स्थिति जैसी सामाजिक संरचनाएँ भी गरिमा और स्वतंत्रता के सम्मान के साथ चलें।
छोटा संदर्भ पंक्ति-उद्धरण (जहाँ योग्य हो)
Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से मिलती कुछ संक्षिप्त पंक्तियाँ नीचे उद्धृत हैं, यदि उपलब्ध हों, परन्तु पूरा पाठ नहीं दिया गया है:
“... जो नहीं सुने जाते, वे सम्मुख न्याय के सामने रहते हैं।”
“गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार हर व्यक्ति का है, भले ही वह दास-स्थिति में क्यों न हो।”
“धर्म का लक्ष्य है सामाजिक बंधनों को भी मानवीय गरिमा में ढालना।”