यिर्मयाह 35:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए सेनाओं का परमेश्‍वर यहोवा, जो इस्राएल का परमेश्‍वर है, यह कहता है: देखो, यहूदा देश और यरूशलेम नगर के सारे निवासियों पर जितनी विपत्ति डालने की मैंने चर्चा की है वह उन पर अब डालता हूँ; क्योंकि मैंने उनको सुनाया पर उन्होंने नहीं सुना, मैंने उनको बुलाया पर उन्होंने उत्तर न दिया।”

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यिर्मयाह 35:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 35:17 – एक आध्यात्मिक परीक्षण की चेतावनी

यह पद यिर्मयाह के माध्यम से परमेश्वर के उस कठोर, परन्‍तु दयालु परीक्षण को व्यक्त करता है जिसमें यहूदा व यरूशलेम के निवासी हल्की-सी प्रतिक्रिया देते रहे। प्रभु यहोवा कह रहे हैं कि उनके समस्त आग्रहम, चेतावनियाँ और बुलावे अब जिले-शहर के निवासियों पर उतर आएँगे क्योंकि वे न सुनें, न उत्तर दें। यह एक ऐतिहासिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं केवल एक व्यवहारिक चेतावनी है—बल्कि आत्मिक अस्थिरता की पहचान है।

पाठ का सहज पठन

परिचित संदेश: परमेश्वर ने सुनने औरobedience के महत्व को बार-बार नापा है, पर यहूदा ने उसे ठुकराया और रोने-झींकने के बावजूद उसने सुना नहीं। नतीजा यह कि विनाश के आलोक में नहीं, बल्कि consequences के साथ आ पहुँचा है। यहहां “क्योंकि मैंने उनको सुनाया पर उन्होंने नहीं सुना, मैंने उनको बुलाया पर उन्होंने उत्तर न दिया”—यह एक बड़े सामाजिक-आत्मिक असंतोष का निचोड़ है।

मुख्य अध्यायिक संदेश

  • परमेश्वर की प्रैक्टिक भाषा: न सुनना और न मानना एक तिरस्कार-जनक houding है, जो अंततः लोक-स्वरूप पर हावी होती है।
  • विपत्ति का उद्देश्य: चेतावनियाँ आकर भी अगर लोग नहीं सुनते, तो वे अपने पथ के परिणाम स्वयं कबूल करें—यह एक नैतिक शिक्षा है।
  • आस्था बनाम व्यवहार: बाहरी धार्मिक दिखावा नहीं, भीतर की आज्ञापालन मायने रखता है।

पवन-प्रतिबिंब: अनुमानित होशियारी के लिए क्रिस्टाल

यिर्मयाह के संदर्भों में यहोवा की करुणा और न्याय दोनों स्थिर रहते हैं। प्रमुख पवित्र-उद्धरणों के प्रकाश में—यिर्मयाह 7:23-24; यिर्मयाह 26:13—यह दर्शाता है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद Israelite अगर उत्तर नहीं देते, तो परिणाम स्पष्ट होते हैं।

अन्वेषण: अन्य आयामों से संबन्ध

Cross-reference 1: हबक्कूक 2:3-4—विश्वास और सुनने की जागरूकता पर बल देता है कि समय में प्रकाश डाला जाएगा।

Cross-reference 2: रोमियों 10:17—आस्था सुनने से आती है, और सुनना परमेश्वर के वचन के प्रति प्रतिक्रिया को दर्शाता है।

Cross-reference 3: फिरौदा के संदेश: उद्धार का निमंत्रण—दया की दिशा में बहती चेतावनी, ताकि लोग तिरस्कार-न बनें।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

1) आत्मपरीक्षण: क्या हम भी कभी-भी सुनने की आदत छोड़ देते हैं? अकेले धार्मिक क्रियाकलाप पर्याप्त नहीं—हमारी दुविधाओं के पीछे विश्वस्त पालन आवश्यक है।

2) प्रभु के बुलावे का उत्तर: अपने जीवन के निर्णयों में ईश्वर के मार्ग को प्राथमिकता दें; उपदेशों की सचेतना में सुधार लाने का प्रयास करें।

3) समुदायिक जीवन: समाज में अगर लोग चेतावनियों से विचलित होते हैं, तो एक-दूसरे के लिए प्रेरणा और निष्ठा बनाए रखें—क्योंकि यह भी विश्वसनीय आस्था की परीक्षा है।

संक्षिप्त सार

यिर्मयाह 35:17 एक चेतावनी-पत्र है जो यह बताता है कि परमेश्वर की कृपा का अवसर बार-बार मिलता है, पर अगर हम उसे सुनना और मानना छोड़ दें, तो परिणाम स्पष्ट होंगे। यह हमारे लिए आत्म-निर्भरता नहीं, बल्कि ईश्वर-आज्ञापालन की गहराई की सुरक्षा का पाठ है।

छोटे उद्धरण (विश्वसनीय टिप्पणीकारों से)

Matthew Henry के स्वर में: “God’s patience has limits; when man will not hear, swift judgment follows.”

Albert Barnes के शब्दों में: “The failure to listen is the root of all calamity; obedience is the truest test of allegiance.”

Adam Clarke के विचारों में: “Man’s refusal to hearken brings upon him the very consequences he fears not.”

सूचना: उपरोक्त में हल्की-सी उद्धरण सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों से लिये गये हैं ताकि पाठक को सहज समझ मिले।

क्रॉस-रेफरेंस का छोटा स्पष्टीकरण:

  • यिर्मयाह 7:23-24—ईश्वर की आज्ञाओं के पालन की मांग और परिणामस्वरूप पथ-परिवर्तन का आह्वान।
  • यिर्मयाह 26:13—निवारण के बावजूद गलतियों के साथ जीवन का पाठ; सही मार्ग पर वापस लौटना चाहिए।
  • रोमियों 10:17— faith comes by hearing; आशावादी उत्तर की प्रेरणा।

नोट: उपरोक्त सामग्री पाठ-प्रवाह के अनुरूप संक्षेपण और स्पष्ट व्याख्या के साथ प्रस्तुत है ताकि पाठक सरल रूप से समझ सकें और अपने जीवन में आत्म-स्वीकृति कर सकें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 35:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए मैं भी उनके लिये दुःख की बातें निकालूँगा, और जिन बातों से वे डरते हैं उन्हीं को उन पर लाऊँगा; क्योंकि जब मैंने उन्हें बुलाया, तब कोई न बोला, और जब मैंने उनसे बातें की, तब उन्होंने मेरी न सुनी; परन्तु जो मेरी दृष्टि में बुरा था वही वे करते रहे, और जिससे मैं अप्रसन्न होता था उसी को उन्होंने अपनाया।” तुम जो यहोवा का वचन सुनकर थरथराते हो यहोवा का यह वचन सुनो

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रोमियों 10:21 (HINIRV) »
परन्तु इस्राएल के विषय में वह यह कहता है “मैं सारे दिन अपने हाथ एक आज्ञा न माननेवाली और विवाद करनेवाली प्रजा की ओर पसारे रहा।” (यशा. 65:1-2)

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मनुष्य का सारा चालचलन अपनी दृष्टि में पवित्र ठहरता है*, परन्तु यहोवा मन को तौलता है।

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