यिर्मयाह 36:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं उसको और उसके वंश और कर्मचारियों को उनके अधर्म का दण्ड दूँगा; और जितनी विपत्ति मैंने उन पर और यरूशलेम के निवासियों और यहूदा के सब लोगों पर डालने को कहा है, और जिसको उन्होंने सच नहीं माना, उन सब को मैं उन पर डालूँगा।'”

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यिर्मयाह 36:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 36:31 का संदर्भ और अभिधान

यिर्मयाह ने बाबत का शासन–व्यवस्था और यहूदा–नगरों के कटु अनुभव के बीच परमेश्वर की आज्ञा और न्याय की गूंज को उजागर किया है। वंशावली–कथा में शासन के निर्णयों और उनके परिणामों के बीच यह संदेश उभरता है कि परमेश्वर के दोष-निर्णय के लिए किसी को अपवाद नहीं। इस वचन में यरूशलेम के शुभ-चिन्हों के साथ वे लोग शामिल हैं जिन्होंने प्रभु की चेतावनियों को ठुकराया, और अब उनकी कठोर दण्ड की योजना स्पष्ट हो उठती है।

मुख्य विचार

यह वचन सीधे यिर्मयाह के अद्वितीय दायित्व की पुष्टि करता है—यहोवा ने भविष्यवक्ता के माध्यम से लोगों को उनके पापों के परिणामों से सचेत किया, और अब दण्ड की कार्य-योजना स्पष्ट होती है। दण्ड के संदेश में विवेकपूर्णता और न्याय शामिल है: जो नहीं माना गया, उसे उसी दण्ड के साथ अनुभूत कराया जाएगा। यहां परमेश्वर की पवित्रता और लोगों की अवज्ञा के बीच स्पष्ट संतुलन दिखता है—न्याय के साथ करुणा की संभावना तब तक खुली रहती है जब तक लोग पथ परिवर्तन के लिए लौटते हैं।

दो-तीन प्रमुख थीमै

  • न्याय का स्पष्टता: परमेश्वर अपने दुष्कर्मों के लिए जिम्मेदारियों को नहीं छोड़ते; दण्ड की योजना और समय स्पष्ट है।
  • यतिकाल की चेतावनी और प्रेम: दण्ड के पीछे चेतावनी होती है ताकि लोग पुनः लौटें; यह चेतावनी उनकी भलाई के लिए है, न कि केवल कठोर नियम-पालन के लिए।
  • विशेष और सार्वभौमिकता: यहूदा और यरूशलेम पर लागू दण्ड का संदेश सामान्य नियम बनकर अन्याय के विरुद्ध भी सत्य रहता है—किसी भी इंसान के पाप पर न्याय का सूत्र बराबर चलता है।

अन्य शास्त्रीय संदर्भ (Cross-references)

1) नियम–कथन में चेतावनी और दण्ड का महत्व सीमाओं के भीतर मिलता है—यहाँ दण्ड, चेतावनी और लौट आने की संभावना एक साथ मिलती है।

2) अन्य भविष्यवाणियाँ जहाँ परमेश्वर पाप के परिणाम दिखाते हैं, परन्तु वापसी के अवसर भी देते हैं—यह संदेश एकात्म रूप से सत्य को बताता है कि परमेश्वर का लक्ष्य लोग तौबा में लौटें, न कि केवल दण्ड पाएं।

3) उद्धार और न्याय का संतुलन: पाप के दुष्प्रभावों को स्पष्ट करते हुए उद्धार-रास्ते की संभावना भी खुली रहती है—यहोवा की करुणा और नियम दोनों का संतुलन प्रस्तुत है।

व्यावहारिक विचार

इस वचन से सीख मिलती है कि व्यक्तिगत और सामूहिक पाप के परिणाम समय पर सामने आते हैं। Tauba और परिवर्तन की इच्छा को बनाए रखना चाहिए; दण्ड से बचने का एक ही मार्ग है—मन से लौटना और ईश्वर के आदेशों के अनुरूप जीवन जीना। समुदाय के स्तर पर भी जब लोग सचेत रहते हैं और परमेश्वर की ओर पलटते हैं, तब सामूहिक विनाश के बजाय सुधार की राह खुलती है।

संक्षिप्त सार

यिर्मयाह 36:31 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिन लोगों ने परमेश्वर के निर्देशों को नहीं माना, उन्हें उनके अधर्म के अनुसार दण्ड मिलेगा—यही दण्ड–न्याय का ईश्वर-नियमन है। यह संदेश नहीं कि दया समाप्त हो, बल्कि यह संकेत है कि चेतावनी और अवसर के साथ लौटना उद्धार की दिशा है।

शब्द-शास्त्र उद्धरण (स्वतंत्र पाठ से संलग्न नोट)

केवल सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों से प्राप्त सार और अनुरूप पंक्तियाँ यहाँ समाहित की गई हैं। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के किसी भी शाब्दिक संपूर्ण उद्धरण उपलब्ध हों तो उन्हें नीचे उद्धृत किया गया है:

“अर्थात् उनके अधर्म का दण्ड उनके ऊपर आयेगा; और जो कुछ मैंने कहा, वही होगा—क्योंकि वे नहीं माने।” (यह संकल्पना सामग्री के अनुसार सामान्य टिप्पणी-उद्धरण के रूप में प्रस्तुत है, पूर्ण वाक्यों के लिए मूल स्रोत देखें।)

नोट: यदि आवश्यकता हो तो नीचे दी गई संरेखित उद्धरण-रेफरेंसों को देखना उचित होगा—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सहारे विस्तृत विवेचन मिल सकता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 36:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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नीतिवचन 29:1 (HINIRV) »
जो बार-बार डाँटे जाने पर भी हठ करता है, वह अचानक नष्ट हो जाएगा* और उसका कोई भी उपाय काम न आएगा।

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यिर्मयाह 19:15 (HINIRV) »
“इस्राएल का परमेश्‍वर सेनाओं का यहोवा यह कहता है, देखो, सब गाँवों समेत इस नगर पर वह सारी विपत्ति डालना चाहता हूँ जो मैंने इस पर लाने को कहा है, क्योंकि उन्होंने हठ करके मेरे वचन को नहीं माना है।”

यिर्मयाह 35:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 35:17 (HINIRV) »
इसलिए सेनाओं का परमेश्‍वर यहोवा, जो इस्राएल का परमेश्‍वर है, यह कहता है: देखो, यहूदा देश और यरूशलेम नगर के सारे निवासियों पर जितनी विपत्ति डालने की मैंने चर्चा की है वह उन पर अब डालता हूँ; क्योंकि मैंने उनको सुनाया पर उन्होंने नहीं सुना, मैंने उनको बुलाया पर उन्होंने उत्तर न दिया।”

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