यिर्मयाह 36:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या जाने वे यहोवा से गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करें* और अपनी-अपनी बुरी चाल से फिरें; क्योंकि जो क्रोध और जलजलाहट यहोवा ने अपनी इस प्रजा पर भड़काने को कहा है, वह बड़ी है।”

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यिर्मयाह 36:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 36:7 — प्रार्थना और बदलाव की आवश्यकता

इस पाठ का पृष्ठभूमि: यिर्मयाह ने यहूदा को चेतावनी दी कि बाबुल की निर्भरता में रहने से उनकी बुराइयाँ और ईश्वर के क्रोध से बचना संभव नहीं। इस अध्याय में भविष्यवाणीकार ने काँपते संदेशों के साथ यह स्पष्ट किया कि लोग अपनी निंदा-चाल को छोड़कर यहोवा के सामने दया की याचना करें और अपने पथों को पलट दें।

क्या दिखता है परमेश्वर और विश्वास के बारे में

यह वाक्य इस बात को उजागर करता है कि परमेश्वर दयालु भी हैं, परन्तु पाप के परिणामस्वरूप उनका क्रोध भी ठहर नहीं सकता। यदि लोग सचमुच विनती करें, और अपनी बुराइयों से फिरें, तो परमेश्वर अनुग्रह दिखा सकता है। यहाँ प्रार्थना का स्वाद यह है कि दिल की परिवर्तनशीलता और विनती का रवैया परमेश्वर के कदमों को रोक सकता है, भले ही परिस्थितियाँ कितनी ही कठिन क्यों न हों।

शब्दार्थ और कल्पनाओं पर स्पष्टीकरण

  • गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करें: यह बार-बार और गंभीर विनती का भाव है—दिल से निकली, हर संभव प्रयास के साथ परमेश्वर के पास पहुँचने की Kleidung।
  • अपनी बुरी चाल: व्यक्तिगत निर्बलताओं, अहंकार और गर्वपूर्ण रास्तों की ओर इशारा। यह न केवल कर्मुक दोष है, बल्कि सोच-व्यवहार का ढंग है जो परमेश्वर के विरुद्ध चलना है।
  • क्रोध और जलजलाहट: परमेश्वर के न्याय का प्रभावी संकेत। यह डरावना नहीं, बल्कि चेतावनी है जो लोगों को पुकारती है कि वे अपने धर्म–जीवन को सुधारें।

अन्य संबंधित बाइबल पाठ

दो अन्य सूचक पाठ जो इस संदेश को पुष्ट करते हैं—

  • यिर्मयाह 3:11-14— प्रभु इच्छुक हैं कि वे लौटें और दया पाएँ; परिवर्तन का भूगोल उन्हें नया बनाता है।
  • येशायाह 55:7— दयालु होकर भगवन्र के पास लौटना संभव है; जो भी पश्चात्ताप करेगा, उसे प्रेमपूर्वक सुना जाएगा।
  • 2 क्रॉनिकल 7:14— यदि-my people... विनती करें, तो मैं उन्हें चंगा कर दूँगा; इसका सामाजिक-खुला चित्र यह है कि परमेश्वर, आत्मा से परिवर्तन चाहता है।

महत्वपूर्ण उद्धरण से संक्षेप

यहां प्रकाशित प्रमुख भिन्न-दर्शनों के सार यह है: परमेश्वर अपने लोगों के प्रति धैर्यवान रहते हैं, पर पापकर्म के कारण वह आहत होते हैं; इसलिए प्रार्थना और पथ-परिवर्तन से ही आशा मिलती है।

आज के संदर्भ में आयाम

आज की जिंदगी में यह संदेश सीधा है—जो लोग अपने जीवन में पाप और पक्षपात को पलटते हैं, वे परमेश्वर के साथ सत्य-संबंध को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। जागृत प्रार्थना और व्यवहार-परिवर्तन से व्यक्ति, परिवार और समुदाय में स्थायी शांति और नैतिकता लौटती है।

कथा-निष्कर्ष

यिर्मयाह 36:7 का उपदेश यह है कि निराशाजनक परिस्थितियाँ भी नहीं बनतीं यदि हम दिल से परमेश्वर के पास लौटें, अपने रास्तों को पलटें, और उसकी सचाई में पुनः विश्वास करें।

संक्षेपित टिप्पणी: यह पाठ यह सिखाता है कि दया और न्याय दोनों पर प्रभु निर्भर रहते हैं; विनती और परिवर्तन के साथ विश्वास का व्यवहार हमें क्रोध के बाद भी आशा देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 36:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्या जाने यहूदा का घराना उस सारी विपत्ति का समाचार सुनकर जो मैं उन पर डालने की कल्पना कर रहा हूँ अपनी बुरी चाल से फिरे और मैं उनके अधर्म और पाप को क्षमा करूँ।”

2 इतिहास 33:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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तब संकट में पड़कर वह अपने परमेश्‍वर यहोवा को मानने लगा, और अपने पूर्वजों के परमेश्‍वर के सामने बहुत दीन हुआ, और उससे प्रार्थना की।

2 राजाओं 22:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 राजाओं 22:13 (HINIRV) »
“यह पुस्तक जो मिली है, उसकी बातों के विषय तुम जाकर मेरी और प्रजा की और सब यहूदियों की ओर से यहोवा से पूछो, क्योंकि यहोवा की बड़ी ही जलजलाहट हम पर इस कारण भड़की है, कि हमारे पुरखाओं ने इस पुस्तक की बातें न मानी कि जो कुछ हमारे लिये लिखा है, उसके अनुसार करते।”

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