Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 5:15 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 5:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा की सेना के प्रधान ने यहोशू से कहा, “अपनी जूती पाँव से उतार डाल, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र है।” तब यहोशू ने वैसा ही किया।
यहोशू 5:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 5:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

निर्गमन 3:5 (HINIRV) »
उसने कहा, “इधर पास मत आ, और अपने पाँवों से जूतियों को उतार दे*, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र भूमि* है।” (प्रेरि. 7:33)

प्रेरितों के काम 7:32 (HINIRV) »
“मैं तेरे पूर्वज, अब्राहम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर और याकूब का परमेश्वर हूँ।” तब तो मूसा काँप उठा, यहाँ तक कि उसे देखने का साहस न रहा।

यहोशू 5:15 का मूल संदर्भ और पवित्रता की अनुभूति
परिस्थिति का तात्पर्य: यहोशू 5 के बीच का समय इस्राइल के प्रवास के बाद की एक ठोस चेतावनीभरी मुलाकात है। ईश्वर ने योरप के शहरों को conquista से पहले यहूदा के लोगों को नैतिक-पवित्रता और विश्वास की गहराई दिखाने को कहा। पवित्र कन्या-उपहार नहीं, बल्कि पवित्रता का संकेत है। यहोशू वही स्थान पर खड़ा था जिसे पवित्र माना गया, और यहोवा के सेना के प्रधान ने उसका जूता उतारने को कहा—क्योंकि वही स्थान पवित्र है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से मिलती सीख
यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक व्यावहारिक, स्थिर और प्रत्यक्ष रिश्ते में है। पवित्र स्थान की अनुभूति बनते ही युग-परिवर्तन का संकेत मिलता है कि प्रभु अपने लोगों के साथ एक नियमित, निकटस्थ संबंध बनाते हैं। यहोशू की प्रतिक्रिया—जैसा कि वह वैसा ही करता है—विश्वास की सरल, स्पष्ट धार्मिकता को प्रकट करता है: प्रभु के निर्देशों की तत्काल आज्ञा और उसका पालन।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
अन्य उपयोगी बिंदु और क्रॉस-रेफरेंस
• निर्गमन 3–4 में लोकेशन की पवित्रता और ईश्वर के सामने समर्पण के संकेत मिलते हैं, जहाँ पवित्रता और ईश्वर-आह्वान एक साथ चलते हैं।
• यूहन्ना 4:24 में आत्मा और सत्य की महिमा आती है; यहाँ पवित्र स्थान के साथ यहश्वर के वास्तविक उपस्थिति को मान्यता मिलती है।
• उच्च दृष्टिकोण से यह प्रेरणा देता है कि हर सुबह या हर कदम से पहले परमेश्वर के सामने विनम्रता और सम्मान आवश्यक है।
आज का अनुप्रयोग
जीवन के हर कदम में—चाहे संघर्ष हो, नए उद्देश्य की ओर बढ़ना हो, या कठिन निर्णय—हमें अपने जीवन को परमेश्वर के संदिग्ध, पवित्रता-स्तर के अनुरूप बनाना चाहिए। अपनी "जूती" नीचे रखकर, विनम्रता से प्रभु की उपस्थिति के सामने आना और उनके निर्देशों के अनुसार चलना, विश्वास को दृढ़ करें। घर-परिवार, कार्यस्थल और समुदाय में पवित्र आचरण का प्रचार करें; क्योंकि प्रभु की उपस्थिति हमारे व्यवहार से ही परिलक्षित होती है।
संक्षिप्त सार
यहोशू 5:15 में परमेश्वर के सामने विनम्रता और पवित्रता की आदर्श अवस्था उद्घाटित होती है—जिसमें न तो सम्मान को नज़रअंदाज किया गया है और न ही परमेश्वर के निर्देशों से टकराने का साहस किया गया। यह पाठ आज भी विश्वास के रास्ते में श्रद्धा, आज्ञापालना और पवित्रता के अन्वेषण की प्रेरणा देता है।
यह भाग Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain चिन्तन से मिले निरीक्षणों के अनुरूप समाहित किया गया है; जहाँ संभव रहा वहाँ उनके शब्द-उद्धरण के बजाय तात्पर्य और संदर्भ को हिन्दी में समाहित किया गया है।