न्यायियों 11:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब इस्राएल ने एदोम के राजा के पास दूतों से यह कहला भेजा, 'मुझे अपने देश में से होकर जाने दे;' और एदोम के राजा ने उनकी न मानी। इसी रीति उसने मोआब के राजा से भी कहला भेजा, और उसने भी न माना। इसलिए इस्राएल कादेश में रह गया।

न्यायियों 11:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

न्यायियों 11:17 पर टिप्पणी: अर्थ और संदर्भ

यही वचन कहता है कि इस्राएल ने ईदोम के राजा से मार्ग माँगा ताकि वह अपनी भूमि से होकर गुजर सके, पर राजा ने मना कर दिया; फिर उसी प्रकारMoab के राजा ने भी अनुमति नहीं दी। परिणामस्वरूप इस्राएल इस मार्ग से वंचित रह गया और उसे अपना मार्ग पृथक बनाना पड़ा।

संदर्भीय पृष्ठभूमि

न्यायियों के पुस्तक में पथ-रोधी घटनाओं का यह क्रम देशी सीमाओं के बाहर से आने वाले नेताओं के साथ इस्राएली वर्ग के संघर्ष को दिखाता है। उस समय इस्राएल एक अधिनायकिक व्यवस्था से निकलकर अधिकार-शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा था, पर मित्र-देशों के साथ भी मार्ग-नीति और सुरक्षा की जंग चलती थी। इस verse में, ईदोम और मोआब के राजा इस्राएल के आंतरिक और बाहरी सीमाओं से गुजरने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, जिससे इस्राएल को अपनी यात्रा के लिए वैकल्पिक रास्ते देखने पड़ते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

1) मार्ग माँगना: इस्राएल की योजना स्पष्ट रूप से उनकी सुरक्षा और तेज़ गति के लिये था, ताकि शत्रु से भिन्न मार्ग से यात्रा संभव हो। 2) राजाओं की अस्वीकृति: यह स्थिति क्षेत्रीय प्रभुत्व की सीमाओं और पड़ोसी राज्यों की आत्म-रक्षा की नीति को दर्शाती है। 3) परिणाम: इस्राएल को प्राकृतिक मार्ग पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे उनके ऐतिहासिक मार्ग और योजनाओं में बाधा आई।

मुख्य विचार

  • नम्रता और सुरक्षा की आवश्यकता: युग-निर्माताओं के लिये मार्ग चुनना अक्सर सुरक्षा की मांग होती है, पर यह भी सीमाओं के कारण कठिन बना देता है।
  • सम्पर्क की सावधानी: पड़ोसी राज्यों से मार्ग माँगना, और उनकी नीतियों को समझना, इस्राएल की外交 सूझ-बूझ को दर्शाता है।
  • आशीर्वाद बनाम बाधा: बाधाओं के सामने निर्णय लेने की क्षमता और परमेश्वर की योजना पर निर्भरता बना रहती है।

अन्य प्रासंगिक आयतें और उनके तात्पर्य

1) संदर्भ आयत: न्यायियों 11:18— इस्राएल ने अन्य मार्गों से भी यात्रा की, ताकि अपने उद्देश्यों को पूरा कर सके। यह दिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य पर पुनः ध्यान देता है।

2) संदर्भ आयत: 1 शमूएल 23:7— लेखन में पड़ोसी राज्यों से विनम्रता और वार्तालाप की प्रथा का संकेत मिलता है। यह हमें यह समझाता है कि कूटनीतिक विकल्प भी ईश्वर के प्रयोजन के भीतर आते हैं।

3) संदर्भ आयत: निर्भयता व्रित: यहूदियों की यात्रा और देश-निर्माण के दौरान ईश्वर की सुरक्षा की आशा को पुनः स्थापित करता है।

वहनीय पाठ

इस संदर्भ में प्रत्यक्ष पाठ से यह संदेश मिलता है कि ईश्वर के लोग यात्रा और योजना बनाते समय दुनिया की सीमाओं के भीतर सुरक्षा और मानवीय विवेक का उपयोग करें, पर परमेश्वर की योजना के अनुरूप सत्य और धैर्य बनाए रखें। जब मार्ग अवरुद्ध हो, तब भी परमेश्वर के मार्ग-निर्देशक पर भरोसा रखें और नई राहों की खोज में विवेक व ईमानदारी से आगे बढ़ें।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

  • सपनों और विकल्पों के बीच संतुलन बनाएं; सुरक्षा के साथ परमेश्वर की योजना पर निर्भर रहें।
  • परिस्थितियों के अनुसार विनम्रता और समझदारी से外交िक समाधान खोजें।

Cross-references with brief notes

- न्यायियों 3:12-14: पड़ोसी राज्यों के साथ संघर्ष और उनका नियंत्रण; प्रेरणा कि ईश्वर के लोगों को रणनीति बनाते समय नीति-निष्ठा बनानी चाहिए।

- स्पष्ट संदर्भ नहीं दिया जाता है, पर 1 समूएल 14:1-15 के युद्ध-योजना में मार्ग-निर्णय और सुरक्षा के पक्षों से सामान्‍य संवेदना मिलती है।

참: Matthew Henry (कभी-कभी “MH”), Albert Barnes (AB), Adam Clarke (AC) के उद्धरण यदि उपलब्ध हों, वे संक्षेप में और संदर्भित रूप में नीचे मिलेंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

न्यायियों 11:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जैसा सेईर के निवासी एसावियों ने और आर के निवासी मोआबियों ने मुझसे किया, वैसा ही तू भी मुझसे कर, इस रीति मैं यरदन पार होकर उस देश में पहुँचूँगा जो हमारा परमेश्‍वर यहोवा हमें देता है।'

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