Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 11:1 न्यायियों 11:2 न्यायियों 11:3 न्यायियों 11:4 न्यायियों 11:5 न्यायियों 11:6 न्यायियों 11:7 न्यायियों 11:8 न्यायियों 11:9 न्यायियों 11:10 न्यायियों 11:11 न्यायियों 11:12 न्यायियों 11:13 न्यायियों 11:14 न्यायियों 11:15 न्यायियों 11:16 न्यायियों 11:17 न्यायियों 11:18 न्यायियों 11:19 न्यायियों 11:20 न्यायियों 11:21 न्यायियों 11:22 न्यायियों 11:23 न्यायियों 11:24 न्यायियों 11:25 न्यायियों 11:26 न्यायियों 11:27 न्यायियों 11:28 न्यायियों 11:29 न्यायियों 11:30 न्यायियों 11:31 न्यायियों 11:32 न्यायियों 11:33 न्यायियों 11:34 न्यायियों 11:35 न्यायियों 11:36 न्यायियों 11:37 न्यायियों 11:38 न्यायियों 11:39 न्यायियों 11:40



न्यायियों 11:27 का अर्थ को सरल शब्दों में
इस वचन में यह कहावत है कि मैं तुम्हारे अपराध के कारण नहीं लड़ रहा; तुमने मुझे युद्ध छेड़ दिया है, और अब यहोवा, जो न्यायी है, इस्राएल और अम्मोनियों के बीच में निर्णय लेगा। तथ्य यह है कि दाऊदी, या शेमसोन, या अन्य पात्रों के बीच का संघर्ष आज्ञाकारीता, प्रतिशोध और समाज के लिए न्याय का प्रश्न बन जाता है।
पृष्ठभूमि संक्षेप
यहोवा के देश में अम्मोनियों की आक्रमण से इज़राइल विचलित थे। नायबंधनलोग अपनी सुरक्षा, कड़वाहट और रिश्वतखोरी के कारण भ्रमित थे। इस आयत में गवाह घूमता है कि विजय-स्वरूप न्याय का निर्णय परमेश्वर करेंगे, और परमेश्वर के प्रतिनिधि न्याय के अधिनायक बनेंगे। इस पृष्ठभूमि में जुड़ा संदेश यह है कि दुष्कृत्यों के उत्तराधिकारी से पहले परमेश्वर न्याय करेगा, न कि मनुष्यों के ना-ना करने से।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
थीमैटिक लाइनें
अन्य उद्धरणिक विचार (संदर्भ-जोड़)
– एक पंक्ति के हिसाब से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से शास्त्रीय टिप्पणियाँ मिलती हैं, जो न्याय के उत्तरदायित्व और परमेश्वर के न्यायी होने पर बल देती हैं। यहां संक्षेप में उल्लेख योग्य विचार यह हैं: सवाल उठाने वालों को अपराध का ठप्पा नहीं है; परमेश्वर की न्याय व्यवस्था मनुष्यों की न्याय-आकांक्षा से ऊपर है; और समाज में स्थिरता के लिए परमेश्वर की धारा काम करती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षेप अर्थ
– न्याय और न्यायीकरण पर चर्चा: दूसरे भागों में यह दिखता है कि परमेश्वर न्यायी हैं और उनके निर्णय सुरक्षित रहते हैं।
– गांधीभक्ति/धर्म और समाज: यह संदेश बताता है कि जब लोग दुष्कर्म करते हैं, तब भी परमेश्वर का न्याय सही समय पर क्रियान्वित होता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष (Practical takeaway)
हम भरोसा रखें कि परमेश्वर सही समय पर न्याय करेगा: अपने दिल को दोष-भय से मुक्त रखें, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने में विवेक अपनाएं, पर अपने भीतर अहंकार और बदले की चाह को नियंत्रण में रखें ताकि ईश्वरीय न्याय के लिए स्थान बना रहे।
टेक-अवे उद्धरण
“यहोवा जो न्यायी है, वह इस्राएलियों और अम्मोनियों के बीच में आज न्याय करे।”