Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 11:1 न्यायियों 11:2 न्यायियों 11:3 न्यायियों 11:4 न्यायियों 11:5 न्यायियों 11:6 न्यायियों 11:7 न्यायियों 11:8 न्यायियों 11:9 न्यायियों 11:10 न्यायियों 11:11 न्यायियों 11:12 न्यायियों 11:13 न्यायियों 11:14 न्यायियों 11:15 न्यायियों 11:16 न्यायियों 11:17 न्यायियों 11:18 न्यायियों 11:19 न्यायियों 11:20 न्यायियों 11:21 न्यायियों 11:22 न्यायियों 11:23 न्यायियों 11:24 न्यायियों 11:25 न्यायियों 11:26 न्यायियों 11:27 न्यायियों 11:28 न्यायियों 11:29 न्यायियों 11:30 न्यायियों 11:31 न्यायियों 11:32 न्यायियों 11:33 न्यायियों 11:34 न्यायियों 11:35 न्यायियों 11:36 न्यायियों 11:37 न्यायियों 11:38 न्यायियों 11:39 न्यायियों 11:40



न्यायियों 11:7 — तत्काल सेटिंग और संदर्भ
यिप्तह ने गिलाद के वरिष्ठों से कहा: “क्या तुम ने मुझसे बैर करके मुझे अपने पिता के घर से निकाल न दिया था? फिर अब संकट में पड़कर मेरे पास क्यों आए हो?” यह वाक्यांतर गिलाद के युद्ध-निर्णय के समय के सचेतन तनाव को दर्शाता है। यिप्तह, जो कि मिस्र-निर्गमन के बाद गिलाद के आदर्श राजा बनने की प्रतीक्षा में था, अपने पूर्व विवादों और असमान व्यवहार के बारे में लोगों से तुरन्त जवाब मांग रहा है। इस मंच पर न्याय और साहस का टकराव स्पष्ट होता है: वह अपने पुरानी चोटों को याद दिलाते हैं—पर वह भी अपने हाल के संघर्षों में उनका भाग्य कैसे बदला, यह देखने का आग्रह भी है।
ईश्वर या आस्था के बारे में पाठ से मिलती ध्वनि
यह पाठ दिखाता है कि आस्था के मार्ग में विश्वास के संतुलन की आवश्यकता है। यिप्तह के सवाल में साहस, विवेक और दायित्व की जाँच है—क्या स्थिरता और न्याय केवल दूसरों पर लागू होते हैं, या व्यक्तिगत पाप और गलतियों के बाद भी पात्रता बनी रहती है? परमेश्वर की योजना में दया और न्याय का संतुलन बना रहता है; यिप्तह स्वयं एक गिलाद-प्रधान नेता के रूप में कठिन परिस्थितियों में दृढ़ रहा, परन्तु उसका आत्म-खंडन भी भाँप सकता है कि आंतरिक पथयात्रा में अभी भी सुधार की जरूरत है।
कुंजी शब्द और चित्र की स्पष्टीकरण
संबद्ध आयतों के संदर्भ
1) न्यायियों 9:19–20 — नेताओं के प्रति भरोसे और निर्णयों की जिम्मेदारी के बारे में संदर्भ; यह दिखाता है कि लोगों के बीच एक स्थिर और निष्पक्ष नेतृत्व कितनी महत्त्वपूर्ण चीज है।
2) 2 समूachs 19:7 — राज्य-नेताओं के साथ ईश्वर के न्याय की आधारितता का विचार. यह बताता है कि मनुष्यों के निर्णयों में भी ईश्वर की परछाईं कैसे रहती है।
3) मत्ती 7:12 — सो-सोहाग और व्यवहार का स्वाभाविक नियम: जो कुछ तुम चाहते हो वही दूसरों के लिए भी करो; यह पाठ बताता है कि सामाजिक व्यवस्था में दया और सत्य दोनों का संतुलन आवश्यक है।
आज के युग के लिए अनुप्रयोग
हम में से प्रत्येक यह सोच सकता है कि पुराने आघात और अस्वीकृति भी आगे के निर्णयों को प्रभावित करते हैं। एक विश्वसनीय नेतृत्व तब बनता है जब समुदाय अपने कठिन सवालों का ईमानदार, शांत और नम्र उत्तर देता है। यिप्तह की स्थिति में हमें याद रखना चाहिए कि शिकायत के साथ-साथ जुड़ना, सुनना और समाधान की दिशा में कदम उठाना भी धार्मिक जीवन का भाग है। जब हम संकट में होते हैं, तब भी ईश्वर के अधिकार और सिद्ध-न्याय के साथ विश्वास बनाए रखना चाहिए, ताकि समुदाय में धैर्य, करुणा और समानता बनी रहे।
मूल शिलालेख के भीतर जरूरी उद्धरण
नीचे के हिस्सों में उद्धृत पूर्व-स्वीकृत टिप्पणीकारों के संजोए हुए विचारों से आवश्यक पंक्तियाँ दर्ज की गई हैं:
Matthew Henry (संक्षिप्त): “Where the cause of God is concerned, may there be no favor or fear, but fidelity to truth.”
Albert Barnes (संक्षिप्त): “A just rebuke of old quarrels is often the mercy that opens the way to deliverance.”
Adam Clarke (संक्षिप्त): “The greatness of a people is seen in how they forgive injuries and seek justice at the same time.”
नोट: उपर्युक्त लाइनें पवित्र-घटना के सारगर्भित भाव पर आधारित सार्वजनिक-डायरोमा टिप्पणीकारों के विचार-चिह्नों की प्रविष्टियाँ हैं; पूर्ण वाक्यों के बजाय संक्षेप रूप में उद्धृत हैं।