Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 11:1 न्यायियों 11:2 न्यायियों 11:3 न्यायियों 11:4 न्यायियों 11:5 न्यायियों 11:6 न्यायियों 11:7 न्यायियों 11:8 न्यायियों 11:9 न्यायियों 11:10 न्यायियों 11:11 न्यायियों 11:12 न्यायियों 11:13 न्यायियों 11:14 न्यायियों 11:15 न्यायियों 11:16 न्यायियों 11:17 न्यायियों 11:18 न्यायियों 11:19 न्यायियों 11:20 न्यायियों 11:21 न्यायियों 11:22 न्यायियों 11:23 न्यायियों 11:24 न्यायियों 11:25 न्यायियों 11:26 न्यायियों 11:27 न्यायियों 11:28 न्यायियों 11:29 न्यायियों 11:30 न्यायियों 11:31 न्यायियों 11:32 न्यायियों 11:33 न्यायियों 11:34 न्यायियों 11:35 न्यायियों 11:36 न्यायियों 11:37 न्यायियों 11:38 न्यायियों 11:39 न्यायियों 11:40
न्यायियों 11:21 — संदर्भ का तात्पर्य और उद्घाटन
यह पद सीहोन के विरुद्ध इस्राएल के विजय की कथा का हिस्सा है, जहाँ परमेश्वर ने मोशलग्ध राजा सीहोन को शक्तिशाली ध्वस्त कर दिया और इस्राएल को एमोरी देशों पर अधिकार किया। पाठ बताता है कि किस प्रकार यहोवा ने अपनी शक्ति से शत्रुओं को हटा कर अपने लोगों की सीमा और आशीर्वाद स्थापित किया।
ईश्वर और विश्वास के बारे में गुरुत्वपूर्ण संकेत
मुख्य संदेश यह है कि परमेश्वर अपने चयनित लोगों के साथ विश्वासयोग्य है और वे उसके मार्गदर्शन में विजय पाते हैं। नियंत्रण और विजय की वेक्ति नहीं, बल्कि ईश्वर की शक्ति का कारण है। यहोवा ने यह स्पष्ट किया कि युद्ध की सफलता उसकी इच्छा और उसकी सहायता पर निर्भर है, न कि सिर्फ manusia के सैन्य कौशल पर।
शब्दों के अर्थ और चित्रों की स्पष्टता
– सीहोन: एमोरी राज्य का प्रमुख शहर, जिसे परमेश्वर ने सेना के हाथों पराधीन कर दिया। यह एक प्रतिक है कि बुराई के प्रमुख ठिकानों पर भी ईश्वर की कृपा व विजय पहुँचती है जब उसका परिवर्तनकारी काम होता है।
– सारे देश की अधिकारिता: इसका मतलब है कि इस्राएल ने केवल एक शहर नहीं, बल्कि वह देश जिसमें एमोरी निवास करते थे, उस पूरे क्षेत्र पर प्रभुत्व स्थापित कर लिया। यह ईश्वर के वादे की पूर्णता का प्रतीक है कि वह अपने लोगों को उनके क्षेत्र के भीतर सुरक्षा और व्यवस्था देता है।
संबद्ध आयतें और संदर्भ
पाठ का आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
– कठिन संघर्षों में भी हम देखते हैं कि अगर हम ईश्वर की इच्छा के अनुसार चलें और उसकी सहायता को स्वीकार करें, तो शांतिपूर्वक विजय संभव है। यह शिष्यों के लिए एक प्रेरणा है कि वे अपने प्रयासों को परमेश्वर की योजना की दिशा में केन्द्रित रखें, न कि केवल अपने सामर्थ्य पर निर्भर हों।
– विश्वास में सहयोग: समुदायिक जीवन में एकजुट होकर ईश्वर के वचन के अनुसार व्यवहार करने से समाजिक और आध्यात्मिक बनावट मजबूत होती है।
मुख्य विचार का संक्षिप्त सार
इस पाठ से मुख्यमान संदेश यह है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ है, उनकी विश्वासयोग्यता से वे विजय पाते हैं, और उसका राज्य क्षेत्रीय क्षेत्र पर भी प्रभाव डालता है।
मैथ्यू हेन्ली, आर्तर्ब Barnes और एडम क्लार्क के संकेतपूर्ण विचार
यह भाग पारंपरिक सार्वजनिक-डिज़ाइन टिप्पणीकारों के अनुसार इस प्रकार समझा गया है: परमेश्वर की सहायता और उसकी योजना को मानना ही विजय का आधार है। यदि लेखक अभी उद्धृत करें तो यह स्पष्ट है कि शिकायत और संघर्ष के बीच भी परमेश्वर का हाथ है, जो कि अपने लोगों के लिए सुरक्षा और अधिकार पैदा करता है।
टिप्पणियाँ: इस संरचना में 2–3 cross-reference साथ रखे गए हैं ताकि पाठक अन्य स्थानों से संगत शिक्षा प्राप्त कर सकें।