Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 11:1 न्यायियों 11:2 न्यायियों 11:3 न्यायियों 11:4 न्यायियों 11:5 न्यायियों 11:6 न्यायियों 11:7 न्यायियों 11:8 न्यायियों 11:9 न्यायियों 11:10 न्यायियों 11:11 न्यायियों 11:12 न्यायियों 11:13 न्यायियों 11:14 न्यायियों 11:15 न्यायियों 11:16 न्यायियों 11:17 न्यायियों 11:18 न्यायियों 11:19 न्यायियों 11:20 न्यायियों 11:21 न्यायियों 11:22 न्यायियों 11:23 न्यायियों 11:24 न्यायियों 11:25 न्यायियों 11:26 न्यायियों 11:27 न्यायियों 11:28 न्यायियों 11:29 न्यायियों 11:30 न्यायियों 11:31 न्यायियों 11:32 न्यायियों 11:33 न्यायियों 11:34 न्यायियों 11:35 न्यायियों 11:36 न्यायियों 11:37 न्यायियों 11:38 न्यायियों 11:39 न्यायियों 11:40



न्यायियों 11:32 का पाठ: त्रास से मुक्त करते हुए परमेश्वर की सहायता
नीतिवचन जैसी संगत घटनाओं से जुड़ी पंक्ति में यिप्तह अम्मोनियों के विरुद्ध युद्ध की तैयारी दिखाई देती है। तब वह अम्मोनियों से लड़ने को उनकी ओर गया; और यहोवा ने उनको उसके हाथ में कर दिया। इसेक साथ यह संदेश छिपा है कि परमेश्वर विश्वासयोग्य लोगों के लिए कैसे संचालन करता है और उनके कदमों के पीछे उसकी शक्ति कैसे काम करती है।
इस पाठ के निकटस्थ प्रसंग में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता
यहोवा ने यिप्तह के पक्ष में लड़ाई की कमान दी; यह दर्शाता है कि नेतृत्व के समय परमेश्वर का निर्देश और सहायता निर्णायक होती है। यह बताता है कि विश्वास के मोड़ पर भी मानवीय कमजोरियों के बीच ईश्वर का सामर्थ्य कैसे उभरता है। इस घटना में यहोवा ने कड़ी परीक्षा के बीच भी अपने सच्चे अनुयायियों के लिए विजय निर्धारित की।
महत्वपूर्ण शब्दो और रूपकों की स्पष्टता
अन्य जुड़ी पाठ प्रस्तुतियाँ
- पूर्वकथा: यहोवा का युद्ध में भाग लेना और मनुष्य के हाथ में विजय देना एक सामान्य थीम है, जो निर्णायक समय पर ईश्वर की कृपा और मार्गदर्शन को दर्शाती है।
- महत्त्वपूर्ण संदर्भ: यहूदा के युद्धों में ईश्वर के साथ साथ मनुष्यों की विश्वासयोग्यता का मेल दिखता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
1) यहोवा के निर्णयों में विश्वास रखें, ताकि भय के बीच भी विजय संभव हो।
2) नेताओं के लिए ईश्वर की अनुमति और मार्गदर्शन अनिवार्य है।
3) संकट के समय ईश्वर हमारे पक्ष में क्रिया-प्रक्रिया बनाते हैं ताकि परिश्रम से प्राप्त परिणाम मिलें।
आज के लिए अनुप्रयोग
जब हमारे ऊपर कठिन परिस्थितियाँ आयें, तब भी हमें यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर हमारी सुरक्षा और मार्गदर्शन का स्रोत है। विश्वास से प्रार्थना और समर्पण के साथ कदम उठाने से हम देखेंगे कि परमेश्वर कैसे हमारे साथ होता है और बाधाओं को भी पीछे हटा देता है।
पूर्व-प्रेरक उद्धरण (एवरीज)
एडम क्लार्क और अन्य सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों के समान भाव में यह संदेश है कि परमेश्वर के सहयोग के बिना मानव प्रयास न शोभायमान होता है न सफल। यदि आप गहराई से देखें, तो यह पाठ यह भी सीख देता है कि विधायदारी और आस्था के बीच संतुलन आवश्यक है।
यहोवा के साथ मिलकर लड़ने से ही विजय संभव है; यही संदेश आज भी विश्वसनीय है।