Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 18:25 पर व्याख्या: न्याय और निष्पक्षता का मूल सिद्धांत
मुख्य विचार: परमेश्वर का न्याय और दया दोनों एक साथ चलते हैं। इस वचन में आत्म-प्रमाणित नीतिगत निष्कर्ष है कि वह दुष्ट के साथ धर्मी को भी मार डालने का विचार नहीं करता; पूरे विश्व का न्याय वह निश्चय ही करेगा, और यह न्याय व्यर्थ नहीं जाएगा। हमारे प्रभु का उद्देश्य सत्य और धर्म की स्थिरता है, न कि किसी एक समूह की सुरक्षा या अधिकतर भाग की क्षति।
साहित्यिक संदर्भ: पाठ का संरचना और संदर्भ
यह पाठ उत्पत्ति के इतिहास में अब्राहमी संधि के पूर्व के समय का भाग है, जहां प्रभु पवित्र नगरिया के निवासियों के साथ बात कर रहे थे। इस संदर्भ में तीन प्रमुख तत्व उभरते हैं: (1) धर्म और दुष्ट के बीच समानता की धारणा से परे न्याय की सार्वभौमिकता, (2) परमेश्वर की इच्छा कि न्याय सत्य के अनुसार हो, न कि मानवीय औचित्य के अनुसार, और (3) साक्ष्य-आधारित निर्णय का महत्त्व।
पंक्तिगत महत्व और थियोलॉजिक संकेत
उक्त वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की दृष्टि में निष्पक्ष न्याय एक निर्विकल्प मानदंड है। धर्मी और दुष्ट—दोनों के प्रति एक ही मानक लागू होता है। यह समुदायों के बीच भेदभाव को हराने का संदेश है: न्याय सिर्फ सजाय पाने वालों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समस्त पृथ्वी के लिए लक्ष्य है।
बाइबलीय संबंध (Cross-references)
प्रतिबिंब के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस वचन से सुसंगत पाठ यह है कि परमेश्वर का न्याय विश्वसनीय और सार्वभौमिक है। वह धर्मी और दुष्ट के बीच भेदभाव नहीं करता, बल्कि सत्य के अनुसार न्याय करेगा। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपनी जिंदगी में समान मानक अपनाएं और परमेश्वर की न्यायप्रियताओं के अनुसार व्यवहार करें।
अनुवादित टिप्पणी स्रोतों के संकेत
इस अनुभाग में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से प्रत्यक्ष उद्धरणों की आवश्यकता मात्र यदि उपलब्ध हों। इस प्रस्तुति में हमने इन ठोस मार्गदर्शनों के सामान्य तत्वों को समाहित करते हुए एक नए, भारतीय पाठक के लिए उपयुक्त अभिव्यक्ति दी है।