उत्पत्ति 18:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस प्रकार का काम करना तुझ से दूर रहे कि दुष्ट के संग धर्मी को भी मार डाले और धर्मी और दुष्ट दोनों की एक ही दशा हो। यह तुझ से दूर रहे। क्या सारी पृथ्वी का न्यायी न्याय न करे?”

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उत्पत्ति 18:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 18:25 पर व्याख्या: न्याय और निष्पक्षता का मूल सिद्धांत

मुख्य विचार: परमेश्वर का न्याय और दया दोनों एक साथ चलते हैं। इस वचन में आत्म-प्रमाणित नीतिगत निष्कर्ष है कि वह दुष्ट के साथ धर्मी को भी मार डालने का विचार नहीं करता; पूरे विश्व का न्याय वह निश्चय ही करेगा, और यह न्याय व्यर्थ नहीं जाएगा। हमारे प्रभु का उद्देश्य सत्य और धर्म की स्थिरता है, न कि किसी एक समूह की सुरक्षा या अधिकतर भाग की क्षति।

साहित्यिक संदर्भ: पाठ का संरचना और संदर्भ

यह पाठ उत्पत्ति के इतिहास में अब्राहमी संधि के पूर्व के समय का भाग है, जहां प्रभु पवित्र नगरिया के निवासियों के साथ बात कर रहे थे। इस संदर्भ में तीन प्रमुख तत्व उभरते हैं: (1) धर्म और दुष्ट के बीच समानता की धारणा से परे न्याय की सार्वभौमिकता, (2) परमेश्वर की इच्छा कि न्याय सत्य के अनुसार हो, न कि मानवीय औचित्य के अनुसार, और (3) साक्ष्य-आधारित निर्णय का महत्त्व।

पंक्तिगत महत्व और थियोलॉजिक संकेत

उक्त वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की दृष्टि में निष्पक्ष न्याय एक निर्विकल्प मानदंड है। धर्मी और दुष्ट—दोनों के प्रति एक ही मानक लागू होता है। यह समुदायों के बीच भेदभाव को हराने का संदेश है: न्याय सिर्फ सजाय पाने वालों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समस्त पृथ्वी के लिए लक्ष्य है।

बाइबलीय संबंध (Cross-references)

  • न्याय का सार्वभौम मानक: गलत के विरुद्ध सत्य का निष्पादन — यह परमेश्वर के राज्य के मूल नियमों में से है (यशायाह 5:20; रोम 2:11). यह बताता है कि परमेश्वर किसी को भी निष्पक्षता से नहीं छोड़ते।
  • दया और न्याय का संतुलन: न्याय के साथ दया भी परमेश्वर का गुण है, जो पाप के बावजूद उद्धार का मार्ग बनाता है (भजन 85:11; वाक्य 6:24-26).
  • विश्व का न्याय: हो सकता है कि मनुष्यों के व्यवहार से अस्थायी असमानताएं दिखें, पर परमेश्वर हर चीज़ का न्याय करेगा और उसकी विहित व्यवस्था से ऊपर नहीं उठ सकता (मत्ती 12:36-37; 1 पतरस 1:17).

प्रतिबिंब के लिए प्रश्न

  • क्या मैं अपने जीवन में निष्पक्षता और ईमानदारी का उदाहरण देता/देती हूँ, भले किसके साथ हो?
  • क्या मैं यह मान लेता/लेती हूँ कि यदि मैं दुष्ट के साथ कुछ करूँ, तो अंततः न्याय में बाधा डाल सकता हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस वचन से सुसंगत पाठ यह है कि परमेश्वर का न्याय विश्वसनीय और सार्वभौमिक है। वह धर्मी और दुष्ट के बीच भेदभाव नहीं करता, बल्कि सत्य के अनुसार न्याय करेगा। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपनी जिंदगी में समान मानक अपनाएं और परमेश्वर की न्यायप्रियताओं के अनुसार व्यवहार करें।

अनुवादित टिप्पणी स्रोतों के संकेत

इस अनुभाग में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से प्रत्यक्ष उद्धरणों की आवश्यकता मात्र यदि उपलब्ध हों। इस प्रस्तुति में हमने इन ठोस मार्गदर्शनों के सामान्य तत्वों को समाहित करते हुए एक नए, भारतीय पाठक के लिए उपयुक्त अभिव्यक्ति दी है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 18:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“देख, परमेश्‍वर न तो खरे मनुष्य को निकम्मा जानकर छोड़ देता है*, और न बुराई करनेवालों को संभालता है।

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क्या परमेश्‍वर अन्याय करता है? और क्या सर्वशक्तिमान धर्म को उलटा करता है?

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“वह चट्टान है, उसका काम खरा है*; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा परमेश्‍वर है, उसमें कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है। (रोमी. 9:14)

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