उत्पत्ति 18:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर उसने कहा, “हे प्रभु, सुन, मैंने इतनी ढिठाई तो की है कि तुझ से बातें करूँ: कदाचित् उसमें बीस मिलें।” उसने कहा, “मैं बीस के कारण भी उसका नाश न करूँगा।”

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उत्पत्ति 18:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 18:31 पर व्याख्या—कौन कहता है और क्यों?

मुख्य interpretive point: पिता-पुत्र-राज्यमंडल के बीच ईमानदार विनम्रता और दयालुता का आरोहण। अब्राहम का पुत्री-प्रश्न नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ खुली बातचीत का नमूना दिखता है: बंधुत्व भरे मानवीय साहस के साथ एक नेक अंत के लिए मिनी-अर्जन। यहां संदेश यह है कि परमेश्वर किसी भी ढीठता पर नहीं टालते, परन्तु सच्ची विनम्रता के साथ विनती करने पर भी दया बनती है।

साहित्यिक संदर्भ

यह दृश्य त्रुटिहीन है: अब्राहम संवाद में एक सजीव और संरचनात्मक प्रतिभा देखता है—पिता-लड़ते प्रश्न, विनम्र निवेदन, और परमेश्वर की अनुदयकारी प्रतिक्रिया। यह अध्याय यह भी दर्शाता है कि परमेश्वर की दशा और नीति मानवीय रिश्तों के साथ कैसे जुड़ती है। “बीस के कारण भी उसका नाश न करूँगा” का कथन ईमानदार तर्क और शांत धैर्य का परिचायक है।

पवित्र उद्धार का theological significance

परमेश्वर की उदारता और न्यायप्रणाली में स्थायित्व। जब अब्राहम ने छोटा-सा द्वार खोलकर कहा, “कदाचित् उसमें बीस मिलें,” तब परमेश्वर ने भविष्यवाणी-निर्भर दया को बरकरार रखा। यह दिखाता है कि परमेश्वर न्याय के साथ करुणा में भी स्थिर रहता है; वह अधर्म से नहीं, आस्थावान खोज से चलता है।

अनुशंसा-बंध: अन्य आयाम

Cross-reference ideas (संक्षेप):

  • बराक-व्यवहार में विनीत प्रार्थना: यह पाठ स्मरण कराता है कि साथ में माफ करने योग्य उद्धार के लिए विनती प्रभावी हो सकती है।
  • उत्पत्ति 18:20-21—परमेश्वर की दृष्टि से गलत कार्यों की गिनती और उनकी परिणाम-निर्धारण की प्रक्रिया में संतुलन।
  • याकूब 5:16—हमारी प्राथनाओं में विश्वास और विनम्रता कैसे प्रभाव डालते हैं।

जीवंत प्रश्न—आंतरिक विचार

  • क्या आप जीवन में समस्या के सामने भी विनम्रता और धैर्य बनाए रखते हैं? परमेश्वर के साथ सीधी बातचीत कैसे आपकी परिस्थितियों पर प्रभाव डालती है?
  • क्या आप दूसरों के साथ न्याय की मांग करते समय दयालुता और धैर्य बनाए रखते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 18:31 हमें यह सिखाता है कि ईमानदारी, विनम्र निवेदन और विश्वासपूर्वक प्रार्थना परमेश्वर के न मैंने-न यहाँ तक कि समाज के निर्णयों पर भी प्रभाव डालते हैं। परमेश्वर न केवल बिगड़े हुए दायरे को सुधारते हैं, बल्कि आत्मीय वार्ता के माध्यम से मनुष्यों को अपने विचार-योजना के अनुरूप ढालते हैं।

कथन-टिप्पणी (प्रासंगिक उद्धरण, यदि उपलब्ध)

Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन प्रवचन में यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर की दीप्ति और करुणा, आदती धारणाओं के भीतर स्थिर रहती हैं—और यदि आप किसी निर्णय के सामने विनती करें, तो परमेश्वर स्मरणीय दया दिखाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 18:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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