Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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पाठ का परिवेश
उत्पत्ति 18 में अब्राहम के पास तीन आगंतुक आते हैं—जिन्हें परमेश्वर या उनके दूत के रूप में दर्शाया गया है—और वे सूचनाएँ तथा आदेश लेकर आते हैं। आगंतुकों ने सारा और लो़ट की ओर जाने की बात कही और तब परमेश्वर ने अब्राहम के साथ बात की कि कैसे वह Sodoma और Gomorra जैसे नगरों की नियति पर विचार कर रहा है। आयत 26 उसी संवाद का हिस्सा है, जहाँ परमेश्वर न्याय और दया के बीच संतुलन को दिखाते हुए कहते हैं कि यदि पचास धर्मी मिलें तो वे नगर को नष्ट नहीं करेंगे।
यह पद ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यह वाक्य ईश्वर के चरित्र के दो पहलुओं को सामने लाता है: न्याय और दया। न्याय के आधार पर पाप के परिणाम अनिवार्य प्रतीत होते हैं, फिर भी दया के लिए स्थान है—यदि पर्याप्त धर्मी उपस्थित हों तो न्याय रोका जा सकता है। यह संवाद यह भी दिखाता है कि परमेश्वर संवादात्मक हैं; वे मनुष्यों के साथ परामर्श करते हुए अपनी योजनाओं और आशंकाओं को साझा करते हैं। अब्राहम की मध्यस्थता के बाद आने वाला संवाद यह सब स्पष्ट कर देता है कि सच्ची आस्था संवाद और हस्तक्षेप में प्रकट होती है।
महत्वपूर्ण शब्द और रूपक
“पचास धर्मी”—यह संख्या संभवतः एक सटीक गणना नहीं, बल्कि एक औपचारिक सीमा है जो यह पूछती है कि क्या पर्याप्त धार्मिकता है जो समुदाय को दंड से बचा सके। “अकेले उनके कारण”—यह वाक्यांश दिखाता है कि ईश्वर के निर्णयों में व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों आयाम हैं; धार्मिकता के प्रभाव दूसरों पर भी पड़ सकते हैं।
संबंधित शास्त्र स्थान
सामयिक अनुप्रयोग
इस पाठ से आज के पाठकों के लिए कुछ स्पष्ट सीखें हैं: ईश्वर न्यायी हैं, पर दयालु भी। हमारी धार्मिकता केवल व्यक्तिगत मुक्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने का साधन है। यह वचन हमें समुदाय के लिए मध्यस्थता, दया और न्याय की पुकार में सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही यह याद दिलाता है कि ईश्वर हमारे प्रार्थनाओं और मध्यस्थता को सुनते-समझते हैं; हम विनम्रता से बोलने और दया के लिए प्रार्थना करने में संकोच न करें।
क्लासिक टिप्पणी से एक-से-थोड़ा
मैथ्यू हेनरी के शब्दों का एक छोटा उद्धरण प्रासंगिक है: "God would not destroy the city if he could find so many righteous persons in it." यह वाक्यांश यहाँ केवल संदर्भ के लिए उल्लेख किया गया है। अल्बर्ट बार्न्स और आदम क्लार्क की टीकाएँ भी इस संवाद में अब्राहम की मध्यस्थता और परमेश्वर के न्याय-दयालु स्वरूप पर प्रकाश डालती हैं।
निष्कर्ष
उत्पत्ति 18:26 एक छोटा वाक्य है पर उसमें गहरी सन्देश निहित है—परमेश्वर का न्याय और दया साथ-साथ कार्य करते हैं, और मानव मध्यस्थता का सकारात्मक प्रभाव हो सकता है। आज के समय में यह हमें समुदाय के लिए धैर्य, प्रार्थना और धार्मिकता के व्यवहारिक प्रदर्शन का आह्वान करता है।