उत्पत्ति 18:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब अब्राहम उसके समीप जाकर कहने लगा, “क्या तू सचमुच दुष्ट के संग धर्मी भी नाश करेगा?

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उत्पत्ति 18:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 18:23 का स्पष्ट अर्थ

यह वाक्य कहता है कि जब परमेश्वर ने अब्राहम के साथ बात करते हुए शहर Sodom के दुष्टों के बारे में निर्णय की बात की, तब अब्राहम ने मध्यस्थता की चिंता से पूछा— क्या तू सचमुच दुष्ट के साथ धर्मी भी नाश करेगा? इसका साफ तात्पर्य यह है कि ईश्वर धर्म और न्याय के साथ दया और संयम प्रस्तुत करते हैं; एक न्यायी दयालुता का सवाल उठाते हुए भी निर्दोषों की रक्षा करना चाहते हैं।

पृष्ठभूमि संक्षेप

घटना तब की है जब परमेश्वर ने ग्रामों के दुष्कर्मों की बात करते हुए अब्राहम से बात की। अब्राहम ने स्नेहपूर्वक मध्यस्थता की और दया–न्याय के संतुलन कीällen पर विचार किया। यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर न सिर्फ न्यायी हैं, बल्कि वह न्याय के साथ करुणा के मार्ग भी खोलते हैं, तथा धर्मी व्यक्ति का intercession भी महत्व रखता है।

व्याख्यात्मक निरीक्षण

  • धर्म और दया का संतुलन: अब्राहम एकदम स्पष्ट रूप से पूछते हैं कि अगर शहर में कुछ भी धार्मिक हों, तब भी क्या पूरी तरह से दुष्टों के लिए नाश ठीक होगा? यहाँ धर्म और दया के बीच संतुलन का प्रश्न उभरता है।
  • न्याय की पराकाष्ठा: देव का निर्णय अगर समग्र दुष्टों के विरुद्ध लिया जाए, तो कभी-कभी धर्मी भी खतरे में पड़ते हैं। इस संदर्भ में परमेश्वर धर्म और दया का उचित माप दिखाते हैं।
  • शांति-संरक्षण का लक्ष्य: परमेश्वर की योजना में इन्सान-सम्भावना बनी रहती है; मध्यस्थता से वह अवसर देता है कि भलाई की राह खोजी जाए।

संरचित थीमात्मक बिंदु

अनुकूलित क्रॉस-रेफरेंसेस

1) यिर्मयाह 7:23–24: ईश्वर कहता है कि उनकी राह पर चलते हुए धर्मी लोग मान्य होते हैं, परन्तु वे अपनी राहों से हटते हैं; यहां न्याय और करुणा का संतुलन दिखता है।

2) रोम 3:29–31:UEST: ईश्वर न केवल धर्मियों के लिए, बल्कि सभी के लिए न्यायी हैं; विश्वास के साथ धर्मी ठहरना नियम है, ना कि परंपराओं के कारण।

3) प्रेरित 17:26–27: परमेश्वर सबकी सीमाओं के ऊपर हैं और वे खोज करने के लिए मनुष्यों को विस्तार देते हैं—मध्यस्थता और आस्था के द्वार खोलते हैं।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हम भी जीवन में किसी अन्य के बारे में निर्णय लेते समय दया और न्याय के संतुलन को याद रखें। कठिन निर्णयों में दयालुता से प्रश्न पूछना, और यदि संभव हो तो दूसरों के लिए सच्ची मध्यस्थता बनना हमारी प्रेरणा होनी चाहिए।

उद्धृत भाग-नोट

यदि आवश्यक हो, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों को संदर्भित किया गया है; यहाँ उनके पूर्ण उद्धरण का उल्लेख नीचे नहीं दिया गया है, ताकि मूल विचार पढ़ने वाले के लिए स्वच्छ बने रहें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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