Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 15:1 नीतिवचन 15:2 नीतिवचन 15:3 नीतिवचन 15:4 नीतिवचन 15:5 नीतिवचन 15:6 नीतिवचन 15:7 नीतिवचन 15:8 नीतिवचन 15:9 नीतिवचन 15:10 नीतिवचन 15:11 नीतिवचन 15:12 नीतिवचन 15:13 नीतिवचन 15:14 नीतिवचन 15:15 नीतिवचन 15:16 नीतिवचन 15:17 नीतिवचन 15:18 नीतिवचन 15:19 नीतिवचन 15:20 नीतिवचन 15:21 नीतिवचन 15:22 नीतिवचन 15:23 नीतिवचन 15:24 नीतिवचन 15:25 नीतिवचन 15:26 नीतिवचन 15:27 नीतिवचन 15:28 नीतिवचन 15:29 नीतिवचन 15:30 नीतिवचन 15:31 नीतिवचन 15:32 नीतिवचन 15:33



नीतिवचन 15:26 पर दृष्टिकोण: बुरे विचार ईश्वर के लिए घिनौने; पवित्र मन के वचन मनभावन
यह पद नीतिवचन-शृंखला में हमारे विचारों और शब्दों के.allocate प्रभाव को उजागर करता है. परमेश्वर को जो चीजें प्रिय लगती हैं, वे शुद्ध, सत्य, और निर्मल विचारों से मिलकर बनती हैं; जबकि बुरे कल्पनाएँ और दुर्भावनापूर्ण विचार उसकी दृष्टि में घिनौने माने जाते हैं. यह उद्धार का पुरज़ोर संकल्प नहीं, बल्कि लगातार जीवन-चरण है: मन की शुद्धता वह आधार है जिससे वाणी और कर्म सत्यापित होते हैं.
कथित सार: अध्याय के भीतर इस verse की भूमिका
नीतिवचन 15 में सामान्यतः चेतावनी है कि मन के भीतर के विचार कैसे व्यवहार पर असर डालते हैं. यहाँ कहा गया है कि बुरी कल्पनाएँ यहोवा को घिनौनी लगती हैं, जबकि शुद्ध जन के वचन मनभावन होते हैं. इसका तात्पर्य यह है कि ईश्वर मन के मंथन के मूल्य को पहचानते हैं: जो विचार स्वच्छ और नम्र होते हैं, वे उनकी इच्छा के अनुरूप हैं; और जो विचार पापपूर्ण, दुष्कर, या छलपूर्ण हैं, वे उनकी पवित्रता के विरुद्ध चलते हैं.
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुमानित तुलनात्मक शब्दार्थ
यहाँ परमेश्वर की दृष्टि में विचारों की पवित्रता और वाक्यों की शुद्धता एक साथ जुड़ी हुई है. अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकारों के अनुसार, विचारों की दिशा व्यक्ति के जीवन-चरणों को संरचित करती है—यदि मन शुद्ध है, तो वचन भी नम्र और दयालु बनते हैं; यदि मन दूषित है, तो वाक्यों में धृष्टता और छल-प्रपंच दिख सकता है. इस दृष्टिकोण से यह वाक्य हृदय की अखंडता की नैतिक चाभी प्रस्तुत करता है.
विवेकपूर्ण अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
यही संदेश अन्य स्थानों से संलग्न है, जहां विचारों और वचनों की पवित्रता का महत्व दर्शाया गया है: उदाहरणतः - मरकुस/मत्ती में मन की पवित्रता और हृदय से निकले विचारों के परिणाम; भजन 51 में आत्म-समर्पण और शुद्ध हृदय की मांग; और अय्यूब 28 में सत्य औरनीयता के मूल्य पर विचार.
नोट: उपरोक्त संदर्भ का उद्देश्य तात्पर्य को समझना है; उद्धृत पूर्ण पद नहीं दिए गए हैं।
संक्षेप
नीतिवचन 15:26 यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर मन के भीतर के विचारों को देखता है और उनकी शुद्धता को महत्व देता है. शुद्ध विचार, सत्य बोलना, और धार्मिक आचरण के साथ संगत वचन He enjoys; जबकि बुरी कल्पनाएँ His घिनौनी होती हैं. यह शिक्षा 오늘 के जीवन के लिए एक मार्गदर्शक है: अपने विचारों की निगरानी करें, और उनके अनुरूप अपने वचन और व्यवहार को ढालें.
cross-reference notes: यह वाक्य अन्य सत्यों के साथ मन की पवित्रता और आत्म-निर्माण पर बल डालता है; प्रेरितों के कार्यों में भी विचारों के परिवर्तन पर जोर मिलता है; भजन और धैर्य के पाठ में शुद्ध हृदय की आवश्यकता दोहराई जाती है.