Old Testament
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नीतिवचन 15:12 का तुरन्त संदर्भ: ठट्ठा करनेवाला डाँटे जाने से प्रसन्न नहीं होता...
नीतिवचन 15:12 में ठट्ठा करनेवाला व्यक्ति डाँटे जाने पर प्रसन्न नहीं होता और न वह बुद्धिमानों के पास जाता है। यह पंक्ति बताएगी कि एक असंयमी, चंचल स्वभाव व्यक्ति उपदेश को बारम्बार न सुनना चाहता है और परामर्श से दूर रहता है। संयत, सुनने-योग्य मनुष्य वह है जो जब डाँटा जाए तो उसे सुधार के अवसर के रूप में ग्रहण करता है और बुद्धिमानों के साथ संवाद के लिए तैयार रहता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ का संदेश
यह पद यह दर्शाता है कि परमेश्वर का मनुष्यों के साथ संबंध अलंकारिक है: ईश्वर उन चेतावनियों और सुधारों को प्रकट करता है जो व्यक्ति को पथ्य से दूर न रहने दें। जो व्यक्ति अपने पाप या कमियों पर विनम्रतापूर्वक नहीं झुकता, वह ईश्वर के समीप नहीं आ सकता। डाँट-फटकार को एक मार्ग के रूप में देखें जो परमेश्वर का प्यानापन है ताकि व्यक्ति सही दिशा में विकास करे।
कुंजी शब्द और चित्र
इन विचारों से स्पष्ट होता है कि सीखना और सुधार स्वीकारना धर्मी जीवन का केंद्रीय हिस्सा है।
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त विवरण)
- नीतिवचन 9:8-9: जब आप डाँट सुनते हैं, तो सीखिए; शुभकर्म से लाभ होता है।
- कथन 12:1: जो शिक्षा को प्यार करता है, उसे विश्वास और विनय प्राप्त होते हैं; जो डाँट नहीं सहता, वह समझ नहीं पाता।
- इब्रानी 12:11: शिला के समय उठने वाली कड़वी डाँट भी बाद में धार्मिक परिपक्वता को बढ़ाती है।
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि विनम्रता, सुधार स्वीकारना और सही मार्गदर्शन की खोज होना परमेश्वर के साथ सम्बद्ध रहने की कुंजी है।
आज के दिन के लिए अनुप्रयोग
सार-सार: यह पद यह सुझाता है कि विनम्र कान बनाकर, डाँट को मानवीय और शिक्षाप्रद रूप में स्वीकारना चाहिए ताकि हम ज्ञान के रास्ते में स्थिर रहें और ईश्वर के पास बुद्धिमानी से बढ़ें।
उद्धरण-योग्य पुरानी टिप्पणीकारों से कुछ शब्द (यदि उपलब्ध):
Matthew Henry: “To be wise, we must be willing to be reproved.”
Albert Barnes: “Reproof is an instrument to bring the soul to humility and instruction.”
Adam Clarke: “He who loves rebuke loves knowledge; he who hates it remains in ignorance.”