Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 15:1 नीतिवचन 15:2 नीतिवचन 15:3 नीतिवचन 15:4 नीतिवचन 15:5 नीतिवचन 15:6 नीतिवचन 15:7 नीतिवचन 15:8 नीतिवचन 15:9 नीतिवचन 15:10 नीतिवचन 15:11 नीतिवचन 15:12 नीतिवचन 15:13 नीतिवचन 15:14 नीतिवचन 15:15 नीतिवचन 15:16 नीतिवचन 15:17 नीतिवचन 15:18 नीतिवचन 15:19 नीतिवचन 15:20 नीतिवचन 15:21 नीतिवचन 15:22 नीतिवचन 15:23 नीतिवचन 15:24 नीतिवचन 15:25 नीतिवचन 15:26 नीतिवचन 15:27 नीतिवचन 15:28 नीतिवचन 15:29 नीतिवचन 15:30 नीतिवचन 15:31 नीतिवचन 15:32 नीतिवचन 15:33



नीतिवचन 15:33 का संदेशनिर्देशन: यहोवा के भय से बुद्धि और नम्रता
यह वचन नीतिवचन-सूत्रों के समृद्ध मार्गदर्शन का भाग है, जहाँ प्रत्यक्षWisdom का स्रोत व्यक्ति के आचरण और आत्म-प्रकाश से जुड़ा है। यहाँ यह बताया गया है कि ईश्वर के भय से मिलने वाली शिक्षा, बुद्धि के मार्ग को खोलती है, और मानव-गुरुत्वाकर्षण से पहले नम्रता को स्थान देती है।
यहोवा के भय पर प्रकाश: विश्वास और विद्वत्ता
यह पाठ बताता है कि ज्ञान केवल ज्ञान-विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि भक्ति और भय से जुड़ी जिम्मेदारी है। ईश्वर के भय में रहने से व्यक्ति अपनी सीमा को समझता है, दुष्कृत्यों से बचता है, और जीवन के कठोर निर्णयों में सचेत और विवेकपूर्ण रहता है। यह शिक्षा का स्रोत है, जो तर्क-युक्ति के साथ हृदय की नम्रता को भी विकसित करती है।
“महिमा से पहले नम्रता आती है” का अर्थ
इस भाग में नम्रता को ज्ञान-विज्ञान की अग्रणी भूमिका के रूप में देखा गया है। महिमा, प्रभावशाली बातों या प्रतिष्ठा से जुड़ी हो सकती है, परन्तु ये पहले नम्रता के बिना अराजक या अधूरा है। नम्रता ईश्वर के सामने विनयपूर्वक रहने की अवस्था है, जो सही निर्णय, दयालुता और दूसरों के लिए सम्मान को प्रेरित करती है।
अनुवाद-निर्देशन और शब्दार्थ स्पष्टता
- “यहोवा के भय मानने से बुद्धि की शिक्षा प्राप्त होती है” का तात्पर्य है कि परमेश्वर की महिमा और पवित्रता की दी हुई सचेतनता, जीवन के व्यवहारिक निर्णयों में विवेक देती है।
- “महिमा से पहले नम्रता आती है” में नम्रता एक मार्ग है जो हमें प्रतिष्ठा-मानदंडों से ऊपर उठाकर ईश्वर के पथ पर चलने के लिए तैयार करती है।
सम्बद्ध आयतन पंक्तियाँ (cross-references)
ये संदर्भ दिखाते हैं कि विवेक, विनय और भय एक साथ काम करते हैं ताकि व्यक्ति सत्य-पथ पर चले और सामाजिक संबंधों में सच्चा नेतृत्व कर सके।
आज के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
कथित शब्द-आंशिक उद्धरण (महत्वपूर्ण नोट)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों से प्रकटन-उद्धरणों की आवश्यकता होने पर यह कहा गया है कि उनके मूल वाक्यों का संक्षिप्त और संदर्भानुसार उपयोग किया जाएगा. नीचे केवल वही छोटे कथन उद्धृत हैं जो पाठ के साथ सीधे संगत हैं:
उद्धरण (कम-शब्दित): “यहोवा के भय से बुद्धि की शिक्षा प्राप्त होती है” — यह सामान्यत: उनके तात्त्विक विवरण में उपलब्ध संपूर्ण टिप्पणियों का सार है।
सार-संयोजन: इस वाक्य में बुद्धि और नम्रता एक साथ Biblically समाहित हैं—ईश्वर के भय से ज्ञान बढ़ता है और नम्रता पहले आती है, जो महिमा के पीछे आना चाहिए। यह एक ऐसी शिक्षा है जो आज के समय में भी नीतिगत निर्णयों, रिश्तों और व्यवहारों में स्पष्ट और केंद्रित मार्गदर्शन देती है।