Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 19:1 नीतिवचन 19:2 नीतिवचन 19:3 नीतिवचन 19:4 नीतिवचन 19:5 नीतिवचन 19:6 नीतिवचन 19:7 नीतिवचन 19:8 नीतिवचन 19:9 नीतिवचन 19:10 नीतिवचन 19:11 नीतिवचन 19:12 नीतिवचन 19:13 नीतिवचन 19:14 नीतिवचन 19:15 नीतिवचन 19:16 नीतिवचन 19:17 नीतिवचन 19:18 नीतिवचन 19:19 नीतिवचन 19:20 नीतिवचन 19:21 नीतिवचन 19:22 नीतिवचन 19:23 नीतिवचन 19:24 नीतिवचन 19:25 नीतिवचन 19:26 नीतिवचन 19:27 नीतिवचन 19:28 नीतिवचन 19:29



नीतिवचन 19:28 का अर्थ
अधर्मी साक्षी न्याय को उपहास में उड़ाता है, और दुष्ट लोग अनर्थ काम निगल लेते हैं। यह वाक्य बतलाता है कि कानून और सत्य की असत्याग्रह से आँख मिलाने वाले व्यक्ति किस तरह न्याय की חדשनी पर चोट करते हैं और उनके द्वारा अपराधिक गतिविधियाँ बढ़ती रहती हैं, जबकि समाज उन लोगों के कारण हानि उठाता है।
तथ्य-परिप्रेक्ष्य
नीतिवचन के इस भाग में व्यक्ति-व्यवहार का नैतिक मूल्यांकन है। अधर्मी साक्षी का व्यवहार न्याय प्रक्रियाओं को मज़ाक बनाते हैं, जिससे न्याय की पवित्रता और सत्य की प्रतिष्ठा कमजोर होती है। दुष्ट लोग अनर्थक कर्मों में लगे रहते हैं, और समाज इनकी वजह से सामाजिक और आचरणगत क्षति भुगतता है। यह प्रकट करता है कि सत्य और न्याय के विरुद्ध बोलना उन्हेंStrength देता है और दुष्ट समुदाय को अधिक सक्रिय बनाता है।
टीका-आयाम (interpretive observations)
थीमैटिक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस (संयुक्त संदर्भ)
1) ऊपर से नीचे तक सत्य की लालसा: अन्य स्थानों पर भी न्याय और सत्य की महत्ता का उल्लेख मिलती है, जहाँ सत्य के विरुद्ध बोलना समाज को क्षति पहुँचाता है।
2) सत्य-स्थिति बनाये रखना: न्यायिक प्रक्रिया की धार बनाए रखने से समाज में कानून का सम्मान बढ़ता है।
3) आचरण की गंभीरता: सच बोलना और अपराध को रोकना—ये मूल्यों की सुरक्षा के तरीके हैं।
उपयोगी निष्कर्ष
नीतिवचन 19:28 हमें स्मरण दिलाता है कि सत्य और न्याय की रक्षा के लिए हामी भरना चाहिए, भले ही समाज में दबाव हो। अधर्मी साक्षी और दुष्ट लोग जब न्याय के मानदंडों को चुनौती देते हैं, तब भी नैतिक ठहराव बनाए रखना आवश्यक है। एक जागरूक नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम सत्य का साथ दें, प्रमाण पर विश्वास रखें, और गलत प्रचार को रोकें।
प्रायोगिक निष्कर्ष
इस पंक्ति से प्रेरणा पाते हुए हम शिक्षा, न्याय और समाज-कल्याण के लिए सत्य की कीमत पहचानते हैं और जिम्मेदारी से जीते हैं।
उद्धरण-शब्द: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; नीचे दी गई प्रेरक समझ इन स्रोतों के सार्वजनिक-डोमेन स्वरूप की प्रेरणा पर आधारित समेकन है।