Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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नीतिवचन 23:10 का तात्पर्य (HINIRV)
पद यह बताता है कि बारह-खानपान और आभा-लिप्सा की दुनिया में भी उन सिद्धांतों का पालन कितना आवश्यक है जो सामाजिक व्यवहार को सुधारे। पुरानी सीमा (old boundary) और अनाथों के खेत की चोट से संबन्धित एक नैतिक धारणাকে उजागर करता है। यह वचन विशेषकर उन ऐतिहासिक जागीरदार-उपजाऊ क्षेत्रों के दृश्य में मिलता है जहाँ संपत्ति-संरक्षण व सुरक्षा का मुद्दा था। नीतिवचन सामान्यत: व्यवहारिक ज्ञान देते हैं; यहाँ भी यह चेतावनी देता है कि संपत्ति के दावे में दया और निष्पक्षता का संतुलन रहे।
मुख्य आधिकारिक अर्थ
यह वचन स्पष्ट करता है कि किसी रूप में पुरानी सीमाओं को पार करना या अय्याशी द्वारा अनाथों के खेतों में घुसना, न केवल नैतिक दोष है, बल्कि न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है। सामाजिक सहारा और कमजोरों की रक्षा करना परमेश्वर के मनोनुकूल व्यवहार का भाग है। जब समुदाय शक्ति में होता है, तो भी दया-नीति और invaded संपत्ति के प्रति सम्मान मुख्य मानदंड बने रहने चाहिए।
दो-तीन मुख्य विषय
related passages (संเกี่ยว)
कुल मिलाकर यह सोच, नीत-पर्व के अन्य भागों से जुड़ी है जहाँ दयालुता, सत्य और न्याय का संयुक्त आह्वान है। संदर्भ के तौर पर:
व्यावहारिक विचार
आज के संदर्भ में यह वचन हमें提醒 देता है कि सफलता के लिए भी नैतिक मानदंड बनाए रखने चाहिए। किसी के खेत में बिना अनुमति प्रवेश करना, संपत्ति के विरुद्ध गलत कहे जाने के समान है। न्याय, ईमानदारी और सहायता की भावना—ये तीनों बनें रहे, तो समाज में विश्वास का निर्माण होता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 23:10 एक स्पष्ट चेतावनी है: न पुरानी सीमा_hd न बढ़ाओ और न अनाथों के खेत में घुसो — क्योंकि यह न्याय के नियमों के विपरीत है। यह verse शक्ति के साथ दयालुता के संतुलन की मांग करता है, ताकि संपत्ति, स्थान और सुरक्षा के मामलों में भी कमजोरों के अधिकार सुरक्षित रहें।
कथन-सार
इस वचन के पीछे आत्म-नियमन और सामाजिक-न्याय की दृष्टि है: बिना अनुमति खेती से दूरी रखना, मजबूत के लिए भी नैतिक दायित्व है।
Cross-references (संक्षिप्त परिचय)
1) अन्याय के विरुद्ध सच का आग्रह—समाज में सही-न्याय का स्थायित्व।
2) कमजोरों के हित की रक्षा—गरीबों और अनाथों के प्रति दया-नैतिकता की प्रतिध्वनि।
3) संपत्ति और अधिकारों के सम्मान—समाज-व्यवस्था में सीमाओं का महत्व।
नोट: नीचे दिये उद्धरण केवल संक्षेप हैं, पूर्ण पद-पाठ नहीं:
अनुछेद: यह टिप्पणी व्यापक प्रवाह में है ताकि पाठक को verse के सामाजिक-नैतिक आयाम समझ में आए और दैनिक जीवन में इसके अनुप्रयोग का मार्ग मिले।