भजन संहिता 104:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसमें जहाज भी आते जाते हैं, और लिव्यातान भी जिसे तूने वहाँ खेलने के लिये बनाया है।

भजन संहिता 104:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 104:26 का सीधे–सीधे अर्थ

यह पद परमेश्वर के सृजनात्मक शासन का एक व्यापक दृश्य प्रस्तुत करता है: समुद्रों में चलने वाले जहाज़ और लLivyatān (विशाल समुद्री जीव) दोनों वही बनाते हैं, जो दयालु पिता ने समुद्रों को सृजित किया है। यहाँ बोध यह है कि ब्रह्मांड की विशालताओं के पीछे भी उसकी सत्ता है और वह हर चीज को अपने नियमन में रखते हैं।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

गीतकार भजन 104 परमेश्वर की सृष्टि-चक्र की महिमा का गीत है। यह मानवों के सहयोगात्मक अस्तित्व के साथ–साथ समुद्री जीवन, आकाश, वनस्पति, और पृथ्वी की बहुरंगी गतिविधियों को एक मंच पर लाता है: दिन–प्रतिदिन की प्राकृतिक क्रियाओं के पीछे परमेश्वर का हाथ स्पष्ट है। यहाँ लिव्यातान जैसे निर्भीक समुद्री जीव का उल्लेख विशेष रूप से उसकी शक्तिशाली, पर शासन-संयमित नियंत्रण की याद दिलाने के लिए है, ताकि लोग उसकी क्षमता के साथ उसकी योजना के नियम को समझें।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • जहाज़… आने-जाने का संकेत: मानव इतिहास में नावें समुद्री मार्गों की साधन बनकर जाते-आते रहे हैं, जिससे जीवन के चक्र का सच्चा सामंजस्य दिखता है—व्यवहारिक अनुकूलन और विविधताओं के बीच एक नियमन।
  • लिव्यातान का संदर्भ: पुरातन साहित्य में लिव्यातान एक महासागर के विशाल प्राणी के रूप में माना गया, जो परमेश्वर द्वारा बनाए गए संसार की महिमा और सीमाओं की याद दिलाता है—कि भय के बावजूद वह प्रभु के अधीन है।
  • नियामक प्रभु का चरित्र: सभी घटक तत्व एक ऐसे स्वामी के द्वारा संचालित हैं जो क्रियाओं के पीछे योजना और दया रखता है; हमारी सुरक्षा और आशा उसी में है।

मुख्य निष्कर्ष (थीमैटिक प्वाइंट्स)

अन्य पार्श्व संदर्भ (Cross-references)

यशायाह 43:2 – कठिनाई के समय भी परमेश्वर के संरक्षण का आश्वासन, जैसे नावों के मार्गों पर एक सुरक्षित किनारा।

भजन 33:7 – समुद्र और जल-प्रवाहों की रचना के पीछे परमेश्वर की उच्च शक्ति का उद्घोष; उसका भाष्य संपूर्ण ब्रह्मांड को संचालित करता है।

व्यवस्थावली 10:14 – पृथ्वी और आकाश सब परमेश्वर की रचना और अधिकार में हैं; हमारी दया भी उसकी दयालु योजना के अनुरूप होनी चाहिए।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

डर से नहीं, बल्कि श्रद्धा से देखें—जिन चीजों पर हम निर्भर हैं, वे भी परमेश्वर की योजना और नियंत्रण में हैं। जब समुद्री जहाज़ डगमगाते हैं या लहरें ऊँची जाती हैं, तब भी ईश्वर की सत्ता स्थिर रहती है। प्रेरणा पाएं कि आपको अपने जीवन के हर भाग में His दिशा–निर्देशन पर भरोसा हो।

टिप्पणियाँ—पूर्वकालीन टिप्पणीकारों से संक्षेप

यह दृश्यMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के प्रकाश में एक सरल, एकीकृत संदेश देता है: पृथ्वी की समस्त गतिविधियाँ और प्राणी परमेश्वर के अधिकार के अधीन हैं, और उसकी रचना-योजना में सभी तत्व एक दूसरे के साथ एक गहरे उद्देश्य के लिए जुड़े हैं।

सीमित उद्धरण: पुराने टिप्पणीकर्ताओं के संकलन में इस प्रकार के कथन मिलते हैं: “सृष्टि का राज−सूत्र परमेश्वर की शक्तिशाली व्यवस्था में छिपा है” (युक्तियों के लिए संदर्भित टिप्पणियाँ) — अतः पाठकों को यह स्मरण रहे कि हर दृश्य से ईश्वर की महिमा प्रकट होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 104:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर होकर व्यापार करते हैं;

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तूने तो लिव्यातान के सिरों को टुकड़े-टुकड़े करके जंगली जन्तुओं को खिला दिए।

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उस समय यहोवा अपनी कड़ी, बड़ी, और दृढ़ तलवार से लिव्यातान नामक वेग और टेढ़े चलनेवाले सर्प को दण्ड देगा, और जो अजगर समुद्र में रहता है उसको भी घात करेगा।

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