भजन संहिता 104:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा की महिमा सदा काल बनी रहे, यहोवा अपने कामों से आनन्दित होवे!

भजन संहिता 104:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 104:31 — इसो नहीं महिमा कैसे स्थिर रहे

पद्य का अभीष्ट सेटिंग: यह भजन संहिता 104 परमेश्वर की सृष्टि-यात्रा, उसकी ज्ञान-सम्पन्नता और सृष्टि के प्रत्येक पदार्थ में उसकी साक्षात्कारशील महिमा के बारे में एक वृत्त-वृत्त कथा है। यह पद विशेषकर परमेश्वर के कार्यों की महिमा को अनवरत बनाए रखने की मंगल-गाथा के रूप में प्रस्तुत करता है: यहोवा की महिमा सदा काल बनी रहे, यहोवा अपने कामों से आनन्दित होवे! यह छोटे-से पंक्ति में समाहित बड़े दार्शनिक-भाव है कि ईश्वर की लौकिक क्रियाओं का निरंतर प्रभाव उसके चरित्रीक गुणों को दर्शाता है और उसके उद्देश्य का उल्लास बनाये रखता है।

इस पाठ से ईश्वर या विश्वास के बारे में जो समझ मिलती है

यह Verse यह सिखाता है कि परमेश्वर की महिमा समय के साथ नहीं घटती, बल्कि उसकी महान उपस्थिति हर रचना में पुनः-पुनः दिखाई देती है। यह विश्वास देता है कि ईश्वर का मनोरथ और उसकी रचना के हर ताजा चरण में उसकी महिमा प्रकाशित होती है; वह अपने कार्यों से खुशी पाते हैं और उनके उद्गार से विश्व-व्यवस्था संचालित रहती है। यह पाठ धार्मिक उत्साह को प्रेरित करता है कि हमें भी ईश्वर की महिमा की सराहना करते हुए उनके द्वारा स्थापित पथ पर स्थिर रहना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता

  • महिमा सदा काल बनी रहे— यह वाक्य ईश्वर की महिमा की शाश्वतता और स्थायित्व को दर्शाता है; उसकी महिमा कबूल करने का कोई समाप्तिकाल नहीं है।
  • अपने कामों से आनन्दित होवे— परमेश्वर अपनी सृष्टि-क्रियाओं में प्रसन्न रहते हैं; उनके खिताब और कार्य उनके चरित्र के साथ मेल खाते हैं और यह संतोष का स्रोत बनता है।

संबद्ध पवित्र ग्रंथ से कुछ संदर्भ

– अन्य भजन या भविष्यवाणी में परमेश्वर की महिमा और उसकी क्रियाओं के स्थायित्व पर जोर मिलता है; उदाहरण के रूप में भजन 19:1-2 और रोम 11:36-36 में उसकी रचना, शक्ति और ज्ञान का व्यापक प्रभाव दिखता है। इन जगहों पर समझ आता है कि परमेश्वर की गतिविधियाँ एक निरंतर क्रिया हैं जो विश्वासियों को उसकी महिमा की स्मृति दिलाती हैं।

एप्रोच और पारिवारिक-जीवन में आज कैसे अपनाएं

1) प्रतिदिन ईश्वर की महान कार्यों के बारे में विचार करें—हर सुबह उसकी रचना की विशालता से प्रेरणा लें।

2) अपने अनुभवों में उसकी महिमा को पहचानें—क्योंकि उसकी रचना और संरक्षण आपके जीवन में खुशी के ठहराव का कारण बनते हैं।

3) समुदाय के लिए दया, प्रेम और देखभाल द्वारा उन क्रियाओं को प्रतिबिंबित करें जो परमेश्वर के कामों से उत्पन्न होती हैं; वे आपके विश्वास को और मजबूत बनाएंगी।

सार-संयोजन

यह verse एक सरल लेकिन गहरे सत्य को दोहराता है: ईश्वर की महिमा और उसका आनन्द उनके सारे कार्यों में एकसाथ चलते हैं। हमें उनके क्रिया-कार्य की निरंतरता को देखते हुए अपनी दृष्टि वहीं केंद्रित करनी चाहिए, ताकि हमारे जीवन में भी उनकी महिमा सदा प्रकाशित रहे।

सूत्र-आगे बढ़ने के लिए 2-3 क्रॉस-रेफरेंस

  • भजन संहिता 19:1 — आकाश उनकी महिमा व्यक्त करते हैं; यह पाठ भी प्रकृति के माध्यम से परमेश्वर की महिमा को दिखाता है।
  • रोम 11:36 — सभी चीज़ उनके द्वारा उत्पन्न और स्थापित हैं; उनके लिये सब कुछ हैं और उनसे ही सभी वस्तुएँ संपूर्ण हैं।
  • याकूब 1:17 — हर अच्छे उपहार और पूर्ण देह परमेश्वर से आते हैं; उसकी इच्छा उनके कामों में प्रतिफलित होती है।

नोट: इस साइट के उद्देश्यानुसार इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरणों के शाब्दिक पूर्ण पाठ नहीं दिए गए हैं, पर उनके प्रकार के विचार इस सार में सम्मिलित हैं ताकि एक सामंजस्यपूर्ण, निर्भर-योग्य व्याख्या मिल सके।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 104:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 1:31 (HINIRV) »
तब परमेश्‍वर ने जो कुछ बनाया था, सबको देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवाँ दिन हो गया। (1 तीमु. 4:4)

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और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्वर्गीय राज्य में उद्धार करके पहुँचाएगा उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

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निर्गमन 31:17 (HINIRV) »
वह मेरे और इस्राएलियों के बीच सदा एक चिन्ह रहेगा, क्योंकि छः दिन में यहोवा ने आकाश और पृथ्वी को बनाया, और सातवें दिन विश्राम करके अपना जी ठण्डा किया'।”

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