भजन संहिता 118:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा के डरवैये कहे, उसकी करुणा सदा की है।

भजन संहिता 118:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 118:4 पर नज़रिया

इस पद में भजनकार यहोवा के भय को जीवंत उद्देश्य बनाकर बताता है कि उसकी करुणा सदैव नए क्रम में जारी है। पीड़ा, संघर्ष या अस्थिरता के बीच भक्त यहोवा की कृपा और विश्वासयोग्यता को स्मरण करता है, और यही स्मृति उसे धैर्य, आशा और चरणबद्ध आचरण के मार्ग पर बनाए रखती है। यह पंक्ति विशुद्ध रूप से भरोसे की आवाज है कि परमेश्वर की करुणा अनंत है और उसका प्रेम हर दिन नया आता है।

मुख्य अर्थ

भजनकार वादा करता है कि उसका भय मानने वाले की रक्षा और भरोसे को मजबूत करता है। यह कहता है कि डर का सामना करते समय भी करुणा की परतें खुलती हैं और प्रभु का प्रेम निरंतर चलता रहता है। जो लोग परमेश्वर के डर में रहते हैं—यानी उसकी महिमा और कृपा को मानते हुए जीवन जीते हैं—उनकी सहायता और आशा सदा बनी रहती है।

कुंजीय विषय

  • करुणा की निरंतरता: परमेश्वर की करुणा कभी समाप्त नहीं होती; वह हर दिन नई भूमिका में हमारे साथ रहता है।
  • भय में विश्वास: ईश्वर के भय से अपनाई गई जीवनशैली डर पर विजय दिलाती है और भरोसे के मार्ग खोलती है।
  • आशा और स्थिरता: अस्थिर समय में करुणा आधारित आशा ही स्थिरता प्रदान करती है।

संबद्ध पद और प्रकाशन

यह भजन करुणा से संबंध बनाने की परंपरा को दर्शाता है: अन्य आयतें जो परमेश्वर की करुणा, सहायता और भय में विश्वास की ओर संकेत करती हैं—यथार्थ में इसे एक ही धारा की तरह पढ़ना उचित है। साथ ही, ईश्वर के भय में जीवन जीने से मिलने वाला संरक्षण और मार्गदर्शन बार-बार उल्लेखनीय है।

संस्करण-विश्लेषण (संक्षेप)

मूल विचार यह है कि डर और कठिनाई के क्षणों में भी ईश्वर की करुणा हर दिन ताजा रहती है, और यह करुणा भरोसेमंद श्रद्धालु के साथ निरंतर व्यवहार करती है। भजनकार ने यह भी दर्शाया है कि भय के बावजूद मनुष्य ईश्वर के भय में रहते हुए उसकी कृपा के द्वार खोल सकता है।

व्यावहारिक प्रभाव

जब अस्थिरता, चिंताओं या आलोचनाओं का मिश्रण दिल में उठे, तब हमें यीशु मसीह के अनुयायी के रूप में अपनी स्थिति नहीं छोड़नी चाहिए। पल-पल ईश्वर की करुणा को याद रखें, उसकी सत्ता पर भरोसा करें और दिनचर्या में नम्र आचरण बनाए रखें—यही हमारी आस्था की पुष्टि है।

कथन-नोट और क्रॉस-रेफ़रेंस

यथार्थ में यह पद अन्य पवित्र ग्रंथों के साथ मिलकर करुणा, भय और विश्वास के संतुलन को दर्शाता है। नीचे संक्षिप्त क्रॉस-रेफ़रेंस दिए जा रहे हैं जिन्हें आप संदर्भ के तौर पर देख सकते हैं:

  • निर्भरता और करुणा का संयोजन—यहेजाक 36:26-27 के अनुसार नया दिल और नया आत्मा देना।
  • भय के बावजूद आशा—यebleps 3:16-19 पर विचार करें कि कैसे विश्वास द्वारा हम स्थिर रहते हैं।
  • ईश्वर की करुणा की पुनरावृत्ति—कनानियों 1:3-4 के उदाहरणों में भी करुणा का निरंतर होना दिखता है।

संक्षिप्त समापन

यहोवा के डर में रहने वाले के लिए उसकी करुणा हर दिन नया पथ बनाती है, जो न सिर्फ भय को कम करती है बल्कि जीवन को एक स्थिर, आशावान और ईश्वरनिष्ठ मार्ग पर ले जाती है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध): प्रसिद्ध पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकारों में से Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट वाक्यांशों से संदर्भित संक्षिप्त पंक्तियाँ नीचे दी जा सकती हैं, परन्तु यहाँ संतुलित सार-संयोजन को प्राथमिकता दी गई है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 118:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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हे यहोवा के डरवैयों, उसकी स्तुति करो! हे याकूब के वंश, तुम सब उसकी महिमा करो! हे इस्राएल के वंश, तुम उसका भय मानो! (भज. 135:19-20)

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और सिंहासन में से एक शब्द निकला, “हे हमारे परमेश्‍वर से सब डरनेवाले दासों, क्या छोटे, क्या बड़े; तुम सब उसकी स्तुति करो।” (भज. 135:1)

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