भजन संहिता 138:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और वे यहोवा की गति के विषय में गाएँगे, क्योंकि यहोवा की महिमा बड़ी है।

भजन संहिता 138:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 138:5 विश्लेषण

पद का संदर्भ एक ऐसी स्थिति में आता है जहाँ भक्त यहोवा की करूणा, सत्य और महिमा के प्रति समर्पण का उद्घोष करते हैं। भजनकार ने धार्मिक विश्वास के भीतर गहराई से स्थापित एक क्रमबद्ध चरण दिखाए हैं: प्रेमपूर्ण चयन, आशीष और पथ का सत्यापन। यह मुक्तिकामी आश्वासन भी देता है कि यहोवा की महिमा सभी प्राणियों के लिए एक सार्वभौमिक प्रेरणा है, जिन्हें ईश्वर के Ancient of Days के साथ जुड़ना है।

मुख्य अर्थ

इस वचन में कवि यहोवा की महिमा और उसकी गति (यानी उसकी योजना, मार्गदर्शन और कार्य-प्रेरणा) के विषय में गाने से प्रेरित है। महिमा का सम्मान, भीतर की आस्था और बाहर की भक्तिधारा—तीनों मिलकर जीवन की दशाओं में ईश्वर के स्थिर प्रेम का प्राकृतिक परिणाम बनाते हैं।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वर की महिमा का सार्वभौमिक चित्कार: यह घोषित करता है कि विश्व के हर आयाम में ईश्वर का नाम उपाधियों से परे महिमा प्राप्त करता है।
  • यात्रा में आस्था और अभिवादन: भजनकार जानता है कि जीवन की गति में ईश्वर की योजना के अनुसार आचा-चरण लेना चाहिए, ताकि उन्हें पूर्णता में praise किया जा सके।
  • आत्म-समर्पण और आशीर्वचन: यहोवा के मार्गों के अनुरूप जीवन बिताने से विश्वास को और गहरा किया जा सकता है, क्योंकि उसकी महिमा बढ़ती रहती है।

संबंधित पारायणियाँ (Cross-references)

1) भजन 145:3 — “यहोवा की महिमा महान है; वह महान गति से राज कर सकता है” — यहोज़ पैगंबर की महिमा की निरंतरता और विश्व-प्रवेश की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।

2) भजन 115:1 — “हमारे लिए नहीं, परन्तु तेरे नाम के कारण” — महिमा का उद्धोष ईश्वर के नाम की महिमा के प्रति समर्पण को प्रकट करता है।

3) योहान 17:4 — “मैं ने पृथ्वी पर तुम्हारे लिए प्रज्ञापूर्ण काम किये” — यह यहोवा की महिमा के लिए जीवन-कार्य को मान्यता देता है।

मूल संदेश पर टिप्पणी

हे प्रभु, जब भजनकार इस प्रकार की वाणी से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं, तब वह कभी-भी आलोचना नहीं करते; बल्कि वे यह दर्शाते हैं कि जीवन की सभी गतिविधियाँ—गायन, प्रार्थना, मान-प्रतिष्ठा—आत्मिक और बाहरी दोनों रूपों में तेरी महिमा के लिए हैं। यहोवा की गति का मतलब है कि उसका मार्ग, उसकी शिक्षा और उसकी कृपा निरंतर गतिमान हैं और उनके अनुसार जीवन का हर कदम लेना चाहिए।

व्यावहारिक विचार

  • अपने दिन की शुरुआत ईश्वर के मार्गों के अनुरूप करने के लिए संकल्प लें; इससे आपकी योजनाएँ उसकी महिमा में योगदान देंगी।
  • कठिन परिस्थितियों में भी यहोवा की महिमा को स्मरण करें और अपने गाने, प्रार्थना और सेवा के माध्यम से उसका नाम ऊँचा उठाएं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन संहिता 138:5 एक प्रेरक स्मारक है कि ईश्वर की गति और महिमा हर क्रिया का केंद्र होनी चाहिए। इसकी गहराई यह है कि जीवन की हर दिशा—आस्था, आशीर्वचन, और सामूहिक वर्तन—ईश्वर की महिमा बढ़ाने के लिए कर्म में बदले जाएं।

इन्हीं विचारों के संग भजनकार की धुन सुनें: यहोवा की महिमा बड़ी है, इसलिए वह गायन के साथ हर राह में मान-सम्मान पाया जाए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 138:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“हे हमारे प्रभु, और परमेश्‍वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ्य के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएँ सृजीं और तेरी ही इच्छा से, वे अस्तित्व में थे और सृजी गईं।”

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क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक अन्यजातियों में मेरा नाम महान है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है; क्योंकि अन्यजातियों में मेरा नाम महान है, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। (प्रका. 15:4)

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“आमीन*, हमारे परमेश्‍वर की स्तुति, महिमा, ज्ञान, धन्यवाद, आदर, सामर्थ्य, और शक्ति युगानुयुग बनी रहें। आमीन।”

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