भजन संहिता 146:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह आकाश और पृथ्वी और समुद्र और उनमें जो कुछ है, सब का कर्ता है; और वह अपना वचन सदा के लिये पूरा करता रहेगा। (प्रेरि. 4:24, प्रेरि. 14:15, प्रेरि. 17:24, प्रका. 10:6, प्रका. 14:7)

भजन संहिता 146:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 146:6 – verse in context

यह पद भजन संहिता की वह अनुभूति प्रस्तुत करता है जो परमेश्वर की सत्ता, स्थिरता और अनुग्रह पर केंद्रित है। भजनकार कहानी कहता है कि ईश्वर आकाश, पृथ्वी और समुद्र को बनाने और सभी जीवों के अस्तित्व को बनाए रखने वाला सच्चा कर्त्ता है। वह जो अपने वचन को पूरा करता है, वह हमारे जीवन की दिशा देता है और विश्व में उसकी निष्कलंकता पर भरोसा जगाता है। प्रेरितों के शिक्षा-ग्रंथों के संकेत इस पंक्ति से मिला कर यह बताते हैं कि ईश्वर की वचनों के अनुरूप जीवन ही स्थिर और विश्वसनीय है।

मुख्य अर्थ

पद का केंद्र यह है कि परमेश्वर सृजन-कार्य के धारणकर्ता और पालनकर्ता हैं। वह चीजों को बनाते नहीं छोड़ते, बल्कि अपने वचन के अनुसार उन्हें पूरा करते हैं। इस संकल्पपूर्ण वचन में ईश्वर की विश्वसनीयता, निष्ठा और सामर्थ्य प्रकट होती है — वह हर स्थिति में नियत, भरोसेमंद और दयालु रहता है।

तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वर की सृजन-परमत्व: आकाश, पृथ्वी, समुद्र और उनमें जो कुछ है, सब उसका आकाश-गॉड है और वह सबका कर्ता है।
  • वचनों की पुष्टि: “और वह अपना वचन सदा के लिये पूरा करता रहेगा”—कथन कि परमेश्वर अपने वचन को स्थिरता से निभाते हैं।
  • कर्स और आशा: मानव जीवन के लिए यह विश्वसनीय ईश्वर ही अंतर्निहित सुरक्षा और दिशा देता है, न कि तटस्थ या अस्थिर प्रतिज्ञाओं पर निर्भर होना चाहिए।

संबद्ध आयतें (संक्षेप में)

यहाँ के विचार प्रेरितों के मार्गदर्शन से जुड़ते हैं कि प्रभु की सत्ता और वचन का स्थायित्व क्यों महत्त्वपूर्ण है (उदा. प्रेरित 4:24; प्रेरित 14:15; प्रेरित 17:24; प्रेरित 10:6; प्रेरित 14:7)। इन संदर्भों में ईश्वर के आदर्शों और मानव जीवन के बीच संतुलन देखने को मिलता है: वह सब कुछ बनाते और संचालित करते हैं, परन्तु हमे उनके वचन के अनुरूप जीवन जीना है।

प्रायोगिक विचार

जब जीवन में अस्थिरता या कठिनाइयाँ आएँ, तब इस पद की पंक्तियाँ हमारे लिए स्थिरता का स्रोत बनती हैं। ईश्वर के वचन के प्रति विश्वास रखें; वह अपने समय पर अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करेंगे। रोजमर्रा के निर्णयों में हम उसकी शास्त्र-संरचना के अनुसार चलें, ताकि हमारे जीवन में उसकी सच्चाई दर्शित हो।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में) और उनका अर्थ

1) प्रेरित पवित्रशास्त्र की शिक्षाएँ: ईश्वर की वचनों की पवित्रता और उनकी पूर्ति पर बल देती हैं; योग्यता के अनुसार जीवन-निर्देशन मिलती है।

2) अन्य प्रेरक संदर्भ: जहाँ प्रभु की सृष्टि-शक्ति और उसकी वचनों की पक्काई साथ-साथ दिखती है, वहाँ मानवता को आशा मिलती है।

संक्षिप्त समापन

भजन 146:6 हमें यह स्मरण कराता है कि हमारा सुरक्षा-बंदन एक निश्चय है: आकाश, पृथ्वी और समुद्र के स्वामी—परमेश्वर—अपना वचन सदा के लिये पूरा करते हैं। इसलिए जीवन के हर मोड़ पर हमें उनके विश्वास पर टिके रहना चाहिए और उनकी कृपा पर भरोसा करना चाहिए।

टिप्पणी नोट: नीचे उद्धृत दो-तीन प्रेरित-वाक्यों के संकीर्ण सार और उनके भावार्थ एकीकृत किए गए हैं ताकि पाठक को एक समन्वित दर्शन मिल सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 146:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और उसने बड़े शब्द से कहा, “परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसकी आराधना करो, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जल के सोते बनाए।” (नहे. 9:6, प्रका. 4:11)

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क्योंकि छः दिन में यहोवा ने आकाश और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उनमें है, सबको बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।

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