भजन संहिता 146:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह पिसे हुओं का न्याय चुकाता है; और भूखों को रोटी देता है। यहोवा बन्दियों को छुड़ाता है;

भजन संहिता 146:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन 146:7 का अध्ययन — न्याय और दया की बहारी

यह पदभजनकर्ता ईश्वर की ऐसे गुणों का स्मरण करवाता है जो सामाजिक असमानताओं के बीच आशा बनते हैं: वह पिसे हुओं का न्याय चुकाता है, भूखों को रोटी देता है, और बन्दियों को छुड़ाता है। यह पंक्ति इमानदार दृष्टि से बताती है कि परमेश्वर पृथ्वीजगत के भीतर न्याय-पूर्ण शासनकर्ता हैं, जो कमजोरों के साथ होते हैं और उनकी सहायता करते हैं।

पद को उसके अध्याय में

भजन संहिता 146 परमेश्वर की चिरस्थायी स्तुति को उद्घोषित करती है—जो भरोसेमंद प्रभु पर टिके रहने की और_manual भक्ति की ओर बुलाती है। जिस संदर्भ में यह तीसरी-पंक्ति विस्तृत न्याय और दया के उदाहरण देती है, उसमें भजनकार ने स्पष्ट किया है कि मानव-आधारित सफलता या सत्ता से नहीं, बल्कि परमेश्वर की क्रियाओं से वास्तविक कल्याण होता है। यहूदी-युग में और आज भी दीन-दलितों के लिए यह संदेश अत्यंत संवेदनशील है: परमेश्वर ऐसे लोगों की सहायता में सक्रिय रहते हैं।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

मुख्य विचार यह है कि ईश्वर वह है जो निर्बलों के पक्ष में कदम उठाते हैं: न्याय का चुकता करना, भूखे लोगों को भोजन देना, और बन्धनों को खोलना—ये सब उनके उद्धार-कार्य के अभिन्न अंग हैं। इसका अर्थ यह है कि सत्य की व्यवस्था वही स्थापित करते हैं जो दया और न्याय दोनों में पूर्ण हैं; मानवीय सत्ता-प्रणालियाँ कभी-कभी अस्थिर होती हैं, पर परमेश्वर के कार्य पवित्र स्थिरता के प्रतीक हैं।

अनुशासनपूर्ण तुलना

इसी प्रकार के विचार हमारे सामने अन्य कृत्यों में भी मिलते हैं: देवदत्त राज्य के अंग के रूप में न्याय और अनुकम्पा एक साथ चलते हैं (यशायाह 58:6-7; मत्ती 25:35-36)। यह वही क्रम है जिसमें भूखों को भोजन देना केवल भौतिक सहायता नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा की पूर्ति है। बन्दियों की स्वतंत्रता भी यहाँ एक आध्यात्मिक और सामाजिक उद्धार के संकेत के रूप में दिखती है—जो उद्धार केवल व्यक्तिगत पाप-छूट तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक बन्धन से मुक्ति का भी संकेत है।

पठान के लिए व्यावहारिक आवेदन

  • विश्वास में आशा बनाए रखें कि परमेश्वर दीन-हीनों के साथ है और उनसे वादा किया हुआ न्याय व्यवहार में लाते हैं।
  • अपने समुदाय में उन लोगों के लिए मदद के संकेत दें जो भूख, बेरोजगारी या कठिनायों से जूझ रहे हैं।
  • अन्याय के विरुद्ध खड़े हों, न कि केवल व्यक्तिगत पाप-स्वीकृति के पीछे छिप जाएं—क्योंकि उद्धार कार्य व्यापक सामाजिक परिवर्तन से जुड़ा है।

अनukul-वाचन संदर्भ

1) यशायाह 58:6-7 — भौतिक और आत्मिक आत्म-संतोष के लिए प्रभु के उस प्रकार के उपकार।

2) मत्ती 25:35-36 — परमेश्वर के राज्य की दृष्टि में भूखे, प्यासे और दास-बंधुओं की सेवा कैसे वास्तविक धर्म है।

3) विरोधाभास की अनुभूति: कुछ पाठों में न्याय और दया का संतुलन प्रभु की कृपा के साथ देखने को मिलता है, जो मानवीय प्रयासों के साथ प्रभु की योजना को एकीकृत करता है।

हिंदी उद्धरण सहित सीमित टिप्पणियाँ (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke)

आर्टिकल में इन पुरालेखित टिप्पणीकारों के संक्षिप्त आरेख मिलते हैं, परन्तु पाठ में पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जाते हैं। अगर उपयोग हो तो उन्हें संकुचित रूप से ऐसे प्रस्तुत किया गया है: “पवित्र ईश्वर पिसे हुओं के साथ न्याय करते हैं; भूखे को रोटी देते हैं”।

कुल सार

यह भजन संहिता 146:7 का संदेश हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का राज्य दया-न्याय से चलता है। वह कमजोरों का समर्थक है, भूखों को भोजन देता है, और बंदी-स्वातंत्र्य के लिए कार्य करता है। हमारे जीवन में इसका अनुप्रयोग यह है कि हम भी वही दृष्टिकोण अपनाएं: सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध खड़े हों और दीन-हीनों की सहायता करें, क्योंकि ईश्वर की व्यवस्था ऐसे कार्यों से ही प्रकट होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 146:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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