भजन संहिता 147:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा नम्र लोगों को सम्भालता है, और दुष्टों को भूमि पर गिरा देता है।

भजन संहिता 147:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्या

भजन संहिता 147:6 के अनुसार यहोवा नम्रों की सहायता करता है और दुष्टों को भूमि पर गिरा देता है। यह वाक्य दो वस्तुओं को एक साथ जोड़ता है: ईश्वर की कृपा से संतप्त और निर्बल लोग सुरक्षित रहते हैं, जबकि दुष्ट अपने स्वार्थ के कारण नीचे गिरते हैं। इसका आशय है कि परमेश्वर अपने बनाये हुए नियमों के अनुसार शासन करता है: वह नम्रों की सहायता करता है और दुष्टों के हृदयगत अभिमान के कारण उनकी ढहाव अपने समय पर लाता है।

कला-संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)

भजन 147 समग्र रूप से ईश्वर की सुरक्षा, पुनर्स्थापन और उद्धार की पुष्टि करता है। यह अध्याय परमेश्वर की महिमा, उसकी रचना–कला और राष्ट्र के लिए उसकी देखरेख का वर्णन करता है। इस श्लोक में यह दिखता है कि ईश्वर समाज के बीच न्याय-कायदा को कैसे स्थापित करता है: जो नम्र हैं, उन्हें वह समर्थ बनाता है, और जो अहंकारी हैं, उनके लिए वे धरती पर गिरने के ढांचे बनाता है। यह “नम्र” शब्द यहां आंतरिक विनम्रता और ईश्वर के प्रति पूर्ण निर्भरता को संदर्भित करता है, न कि केवल बाहरी व्यवहार को।

आस्तिक विचारधारात्मक महत्व

यह श्लोचन यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का राज्य-बोध केवल दया तक सीमित नहीं है; वह न्याय भी करता है। नम्रता ईश्वर के पास पनाह मांगने और उसकी कृपा पर निर्भर रहने के लिए मार्ग बनाती है, जबकि दुष्टों के लिए यह एक चेतावनी है कि उनके अहंकार का अंत परिणामस्वरूप गिरावट है। सतही शक्ति नहीं, बल्कि परमेश्वर की सच्ची सत्ता प्रमुख है।

पवित्रशास्त्र के अन्य भागों से संबंध

  • आम तौर पर संतोष और कृपा के बारे में अन्य psalms — नम्रता और उद्धार पर ज़ोर देता है, जो क्लासिकल तरीके से यह दिखाते हैं कि परमेश्वर विनम्रों के पक्ष में है।
  • न्याय के सिद्धांत के अनुसार दुष्टों का ध्वंस उनके कर्मों के पाठ से जुड़ता है और यह भी दिखाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था मानवीय इतिहास के हर चरण पर प्रभाव डालती है।
  • नीतिवचन-कृति में नम्रता का महत्व और ईश्वर की आशिर्वादों के लिए उसका मार्ग प्रशस्त करना संबंध बनता है।

विवेचन के प्रश्न

  • मैं अपनी दशा में किस प्रकार ईश्वर की सहायता का अनुभव कर रहा/रही हूँ?
  • मैं अपने अहंकार या तुलना से मुक्त होकर नम्र रहने के लिए क्या कदम उठाऊँ?
  • दीर्घकालिक दृष्टि से दुष्टों का गिरना मुझे कैसे ढालता है—विश्वास में मुझे कहाँ स्थिर रहना चाहिए?

परिषद और संक्षेप

यह श्लोक हमें स्मरण कराता है कि 하나님 की कृपा नम्रों के लिए सुरक्षित आश्रय है और संयम के साथ निर्मित व्यवस्था के अनुसार दुष्टों के परिणाम होते हैं। यह दुआ है कि हमारा जीवन ईश्वर के डर और निर्भरता पर केंद्रित रहे, ताकि हम उसकी व्यवस्था में सुरक्षित रहें।

पूर्ववर्ती टिप्पणियाँ (संकेतधार)

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के अनुसार संक्षिप्त उद्धरण देखना चाहें, तो वे नम्रता के महत्व और ईश्वर के न्याय के सुदृढ़ कार्य को समान ढंग से रेखांकित करते हैं—परन्तु नीचे दिया गया पाठ उनकी पूरी पुस्तक-टेक्स्ट नहीं है। विशेष रूप से यदि उपलब्ध हो, तो छोटे उद्धरण नीचे संभवतः संदर्भ सहित मिलेंगे।

क्रॉस-रेफरेंसे

1) भजन 37:9–11 — दुष्टों के विरुद्ध ईश्वर की न्याय-व्यवस्था का संदर्भ।

2) यशाय 57:15 — नम्रता में ईश्वर के साथ रहने की व आण्विक आशा।

3) मत्ती 5:3 — धन्य हैं वे जिनकी आत्मा नम्र है; ईश्वर का राज्य उनके लिए है।

नोट: यह पाठ अन्य पाठों के संक्षिप्त संदर्भ नहीं है, परन्तु उपर्युक्त क्रॉस-रेफरेंसे वास्तविक पवित्रशास्त्र के ढांचे में देखने योग्य हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 147:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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