Old Testament
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1 राजाओं 5:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस प्रकार हीराम सुलैमान की इच्छा के अनुसार उसको देवदार और सनोवर की लकड़ी देने लगा।
1 राजाओं 5:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 राजाओं 5:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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अर्थ का सीधे-संदेश
पहली राजाओं 5:10 में कहा गया है कि थिराम ने सुलैमान की इच्छा के अनुसार देवदार और सनोवर की लकड़ी दी। इसका साधारण अर्थ है कि राजा का उद्देश्य और मित्रता में प्रकट होने वाली सहायता एक उद्देश्यसूत्र के रूप में काम करती है: दोनों की सामंजस्यपूर्ण सहयोग से अभीष्ट निर्माण हुआ।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वचन सुलैमान के मंदिर निर्माण की तैयारी का भाग है। राजा डेवदार के देवदार के विशाल वृक्ष और सनोवर (सीनोर) के विभिन्न प्रकार के लकड़ी से मंदिर, महलों तथा भवनों के लिए सामग्री प्राप्त करते हैं। थिराम तिब्बत के नहीं, बल्कि फिनीशिया के एक प्रसिद्ध राजा थे, जिन्होंने सामरिक और व्यापारी सम्बन्धों के माध्यम से इस सहयोग को संभव बनाया। यह एक पारस्परिक सौहार्द की दुनिया है जिसमें स्थानीय साधन-सामग्री की उपलब्धता और वैश्विक व्यापार-सम्बन्ध दोनों सम्मिलित हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटा थीमैटिक लिस्ट
अन्य संदर्भ-क्रॉस संदर्भ
• दाऊद की समय-सीमा में भी सामर्थ्य और संसाधनों का समुचित आवंटन दिखता है—यह मंदिर-निर्माण के लिए एक स्थापित परंपरा है।
• परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप शक्ति और साधनों का वितरण—यह सूचीबद्ध व्यवस्थाओं से पुष्ट होता है कि परमेश्वर के उद्देश्य के लिए विश्वसनीय सहयोग आवश्यक है।
• अन्य प्रकल्पों में भी विदेशी सहायता की ओर संकेत मिलता है कि समुदाय-निर्माण में विविध लोग शामिल होते हैं ताकि महत्त्वपूर्ण लक्ष्य हल हो सके।
क्लीन कट-निष्कर्ष
इस वचन से सिख मिलती है कि परमेश्वर के काम के लिए समर्पित संरचना और नेतृत्व में बहु-स्तरीय सहयोग आवश्यक है। साथ ही यह दिखाता है कि भीतर से विश्वास और शीघ्रता के साथ किए गए कृत्य बाहरी सहयोग से समर्थ होते हैं—जो एक संतुलित और सुव्यवस्थित निर्माण-कार्य का आधार बनता है।
सूक्ष्म संदर्भों के साथ सतर्कता
1) संदर्भ बताता है कि मंदिर के लिए सामग्री जुटाने की योजना एक सुव्यवस्थित शासन-योजना का हिस्सा थी।
2) राज्य-स्तर पर असाधारण सहयोग का उदाहरण है; यह दिखाता है कि ईश्वर के काम के लिए दुनिया के संसाधन उपयोगी हो सकते हैं यदि उद्देश्य पवित्र रहता है।
3) व्यक्तिगत संबंधों और बंधनों की भूमिका भी उल्लेखनीय है—राजा और विदेश-शासक के बीच मित्रतापूर्ण व्यवहार निर्माण के लिए आवश्यक था।
पूर्व-चिह्न उद्धरण (कथन-उद्धारण)
ईमानदार पाठकों के लिए: यह पाठ एक स्पष्ट दृश्य देता है कि किस प्रकार संसाधन और सहयोग परमेश्वर के उद्देश्य के साथ संरेखित होते हैं—यहNTs में दर्ज अन्य निर्माण-कार्य के संदर्भों से मेल खाता है।