Old Testament
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1 राजाओं 5:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर राजा की आज्ञा से बड़े-बड़े अनमोल पत्थर इसलिए खोदकर निकाले गए कि भवन की नींव, गढ़े हुए पत्थरों से डाली जाए।
1 राजाओं 5:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 राजाओं 5:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 6:7 (HINIRV) »
बनाते समय भवन ऐसे पत्थरों का बनाया गया, जो वहाँ ले आने से पहले गढ़कर ठीक किए गए थे, और भवन के बनते समय हथौड़े, बसूली या और किसी प्रकार के लोहे के औज़ार का शब्द कभी सुनाई नहीं पड़ा।

1 इतिहास 22:2 (HINIRV) »
तब दाऊद ने इस्राएल के देश में जो परदेशी थे उनको इकट्ठा करने की आज्ञा दी, और परमेश्वर का भवन बनाने को पत्थर गढ़ने के लिये संगतराश ठहरा दिए।

1 राजाओं 7:9 (HINIRV) »
ये सब घर बाहर भीतर नींव से मुंडेर तक ऐसे अनमोल और गढ़े हुए पत्थरों के बने जो नापकर, और आरों से चीरकर* तैयार किये गए थे और बाहर के आँगन से ले बड़े आँगन तक लगाए गए।
मुख्य व्याख्या सलारना
यह आयत बताती है कि राजा के आदेश से बड़े-बड़े अमूल्य पत्थर खोदकर निकाले गए ताकि भवन की नींव गढ़े हुए पत्थरों पर डाली जाए। यह संकेत करता है कि निर्माण कार्य की योजना और दृढ़ नींव पर बल दिया गया है, जिससे सृजित कार्य स्थायित्व प्राप्त करे। जहाँ मानव कौशल और संसाधन जुटते हैं, वहीं परमेश्वर की कृपा द्वारा सुरक्षित और संरक्षित योजना आगे बढ़ती है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी-context)
यह वाक्य सार्वजनिक-निर्माण की प्रकिया का वर्णन करता है, जिसमें राजा के शासन के अधीन पत्थरों की महत्त्वपूर्ण कारीगरी का उल्लेख है। गढ़े हुए पत्थरों (चट्टाननुमा नींव) और अनमोल पत्थरों के साथ एक पवित्र मंदिर के नयेतर निर्माण की मजबूत नई नींव उभरती है। यह पुरातन-निर्माण की तकनीक और एकेश्वर-योजना दोनों का संकेत देता है—परमेश्वर के स्वीकृत स्थल और उसके पवित्र कार्य के लिए उपयुक्त आधार बनना।
धार्मिक-तात्त्विक महत्त्व
नींव का क्षेत्र भवन के स्थायित्व का प्रतीक है। परमेश्वर के उद्देश्य के लिए बनाई गई संरचना में मानवीय सहायता आवश्यक है, पर नियोजन और निर्देश परमेश्वर के होते हैं। इससे सुरक्षा, प्रशंसा और एकता की भावना उभरती है, क्योंकि हर पत्थर एक योजना के अंग के रूप में जुड़ता है।
पवित्रशास्त्र से संबंध (Cross-references)
इन संदर्भों से समझ में आता है कि निर्माण के हर चरण में परमेश्वर की योजना और मानव प्रयास एक साथ चलते हैं, ताकि मंदिर स्थूल और आंतरिक रूप से दीर्घकालिक हो सके।
विचार-प्रश्न (Questions for Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह आयत प्रेरणा देती है कि भय-रहित योजना और समर्पित परिश्रम से परमेश्वर के कार्य की नींव मजबूत होती है। बड़े निर्माण के पीछे एक सुविचारित ढांचा और परमेश्वर की कृपा जुड़ी होती है, जो भवन को समय के साथ टिकाऊ बनाती है।
पिछले साहित्य से संक्षेपित दृष्टिकोण
1) Matthew Henry: “…नींव की गहराई में विश्वास का अंकुर होता है”—परंतु यहां मानव न vitrage नहीं, बल्कि पत्थर भी उनकी सहायता से आते हैं।
2) Albert Barnes: “नींवें दिखाती हैं कि कर्म और योजना का समन्वय किस प्रकार से ईश्वर के लक्ष्य को पूरा करता है”।
3) Adam Clarke: “महान भवन के लिए साधन और परिश्रम आवश्यक है; पर परमेश्वर के निर्देश ही भवन को टिकाऊ बनाते हैं”।
उपर्युक्त तीनों टिप्पणीकारों के सार से समन्वित उद्घोषणा यह है कि निर्माण का कार्य प्रभु के उद्देश्य के अनुरूप और मानव-परिश्रम के मिलन से ही सफल होता है।