Old Testament
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1 राजाओं 5:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कि मेरा पिता दाऊद अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन इसलिए न बनवा सका कि वह चारों ओर लड़ाइयों में तब तक उलझा रहा, जब तक यहोवा ने उसके शत्रुओं को उसके पाँव तले न कर दिया।
1 राजाओं 5:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 राजाओं 5:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 इतिहास 28:3 (HINIRV) »
परन्तु परमेश्वर ने मुझसे कहा, 'तू मेरे नाम का भवन बनाने न पाएगा, क्योंकि तू युद्ध करनेवाला है और तूने लहू बहाया है।'

1 इतिहास 22:8 (HINIRV) »
परन्तु यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा, 'तूने लहू बहुत बहाया और बड़े-बड़े युद्ध किए हैं, इसलिए तू मेरे नाम का भवन न बनाने पाएगा, क्योंकि तूने भूमि पर मेरी दृष्टि में बहुत लहू बहाया है।

यहोशू 10:24 (HINIRV) »
जब वे उन राजाओं को यहोशू के पास निकाल ले आए, तब यहोशू ने इस्राएल के सब पुरुषों को बुलाकर अपने साथ चलनेवाले योद्धाओं के प्रधानों से कहा, “निकट आकर अपने-अपने पाँव इन राजाओं की गर्दनों पर रखो” और उन्होंने निकट जाकर अपने-अपने पाँव उनकी गर्दनों पर रखे।
1 राजाओं 5:3 पर उद्धरणीय विचार
यह Verse उन कारणों को समझाता है कि क्यों दाऊद के बाद सुलैमान के समय परमेश्वर की महिमा और लोगों के लिए शांति के बीच एक भवन बनना संभव हो पाया। यह हमें बताता है कि युद्ध-युद्ध की परिस्थितियों में भी परमेश्वर की योजना कैसे आगे बढ़ती है और क्यों एक स्थाई मन्दिर का निर्माण राजा के विश्वस्त विश्वास और परमेश्वर के आग्रह के साथ जुड़ा रहा।
प्र Roman-context: मूल संदर्भ और संदेश
पद क़िताब 1 राजाओं में दाऊद ने यह कहा कि उसका पिता, दाऊद, परमेश्वर यहोवा के नाम का भवन बनवाने में असमर्थ रहते हैं क्योंकि वह निरंतर चारों ओर युद्धों में उलझे रहे, जब तक यहोवा ने उनके शत्रुओं को पाँव तले नहीं रचा दिया। यह कथन इतिहास के एक प्रासंगिक बिंदु की ओर संकेत करता है: परमेश्वर की इबादत और निष्ठा के लिए एक स्थायी घर बनवाने की योजना को पूरा करने का अवसर एक शांति-समय और स्थितियों की स्पष्ट मानदंडों के साथ आता है।
मुख्य संदेश
महत्वपूर्ण थीम्स और पाठ के साथ संबंध
• नेतृत्व और दायित्व: दाऊद का कथन बताता है कि परमेश्वर के काम के लिए उपयुक्त समय और परिस्थिति चाहिए।
• आशीर्वाद का संकेत: मंदिर निर्माण से एक राष्ट्रीय और धार्मिक एकता का प्रतीक बनना था, जो भविष्य के राजाओं के लिए एक स्थायी स्मारक बन गया।
• युद्ध-शांति का विवेक: यहूदियों के इतिहास में युद्ध और शांति के बीच के चयन सतत रहते हैं; परमेश्वर की योजना में शांति के समय का महत्व स्पष्ट होता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संकेत
– यादव से जुड़ी उधृतियाँ: यहोवा के नाम का भवन बनवाने की चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के साथ स्थिर आराधना के लिए उपयुक्त समय और स्थान चाहिए।
– अन्य भाग: यहोवा की योजना और शांति के बारे में संदर्भ, जैसे कि सुलैमान के मंदिर-निर्माण के प्रसंग, और दाऊद के अपने संघर्ष से प्राप्त धैर्य।
संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि मंदिर निर्माण का उद्देश्य व्यक्तिगत भेंट से अधिक समाज-धर्मी विरासत और धार्मिक एकता की प्रतीक है।
उपयोगी उद्धरण (ख़ास दांवित उद्धरण)
मत्ती-हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के पूर्ण वाक्यों का सीधा पाठ नहीं दिया गया है; किन्तु इन प्रसिद्ध पवित्र-विचारकों के सार अब भी इस प्रकार के विषयों पर प्रकट होते हैं—यानी कि परमेश्वर की योजना में शांति और धार्मिक केन्द्रण का महत्त्व, और एक स्थिर आराधनास्थल का उद्देश्य।
व्यावहारिक देवotional reflection
हमारी जिंदगी में भी कभी-कभी हमें अस्थायी अस्तित्व के भीतर स्थिरता चाहिए होती है—जगह, दिशा और आस्था के केन्द्र के रूप में परमेश्वर के सामने एक स्पष्ट स्थान। यह पद हमें याद दिलाता है कि जब जीवन के युद्ध थम जाते हैं और परमेश्वर की कृपा से शांति स्थापित होती है, तब हम अपने आत्मिक भवन की तैयारी कर सकें। एक मंदिर के निर्माण जैसी धारणात्मक प्रेरणा से यह सीख मिलती है कि हमारे भीतर भी एक आदर्श स्थान है, जहाँ परमेश्वर की महिमा और हमारी सेवकई एक साथ उभरती है।
निष्कर्ष
इस verse में सूचित विचार—युद्ध के समय में भी योजनाओं के लिए सही समय और परमेश्वर की मंजूरी कितनी आवश्यक है—हमें विश्वास और धैर्य सिखाते हैं। राजा के अस्तित्व-युग के इतिहास से यह संदेश स्पष्ट है कि परमेश्वर का उद्देश्य पहले शांति और स्थिरता पर टिके रहता है, ताकि धार्मिक-राष्ट्रिक उन्नति संभव हो सके।