Old Testament
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1 राजाओं 5:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और सुलैमान ने हीराम के परिवार के खाने के लिये उसे बीस हजार कोर गेहूँ और बीस कोर पेरा हुआ तेल दिया; इस प्रकार सुलैमान हीराम को प्रति वर्ष दिया करता था। (प्रेरि. 12:20)
1 राजाओं 5:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 राजाओं 5:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 इतिहास 2:10 (HINIRV) »
तेरे दास जो लकड़ी काटेंगे, उनको मैं बीस हजार कोर कूटा हुआ गेहूँ, बीस हजार कोर जौ, बीस हजार बत दाखमधु और बीस हजार बत तेल दूँगा।”

1 राजाओं 4:22 (HINIRV) »
सुलैमान की एक दिन की रसोई में इतना उठता था, अर्थात् तीस कोर मैदा, साठ कोर आटा,
पाठ एक नजर में: 1 राजाओं 5:11
इस आयत में राजा सुलैमान और थेराम के परिवार के लिए संसाधनों के प्रबंधन की दिशा स्पष्ट की गई है। सुलैमान ने हर वर्ष थेराम को गेहूँ और तेल उपलब्ध कराए, ताकि उनकी सेवकाई और घरेलू आवश्यकताएँ चलती रहें। यह Verse एक ओर जहाँ राष्ट्रीय निर्माण-कार्य में समर्पित राज्य शक्ति की व्यवस्था को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर आंतरिक जन-सम्बन्ध और सहयोग की प्रबल भूमिका को भी उद्घाटित करती है।
पाठ के भीतर संदर्भ में क्या कहा गया है
1 राजाओं 5:11 में उल्लेख है कि “सुलैमान ने हीराम के परिवार के खाने के लिये उसे बीस हजार कोर गेहूँ और बीस कोर पेरा हुआ तेल दिया; इस प्रकार सुलैमान हीराम को प्रति वर्ष दिया करता था।” यह उल्लेख पते की तरह है—सम्बद्ध रिश्ते, आर्थिक सहायता और सहयोग का प्रत्यक्ष प्रमाण। यह मात्र एक व्यापारिक लेनदेन नहीं, बल्कि दोनों समुदायों के बीच स्थायित्व और विश्वसनीयता के रिश्ते की स्थापना है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
- शासन-व्यवस्था में उदारता और व्यवस्था: सुलैमान की योजना में स्रोतों का वितरण संतुलित और व्यवस्थित था।
- सेवकाई के लिए स्थिरता: एक सामुदायिक सहयोग से उन लोगों की जीवन-यौगिक आवश्यकताएँ पूरी की जाती थीं जो राज्य-निर्माण के लिए आवश्यक कार्यों में शामिल थे।
- दीर्घकालिक सहयोग का मूल्य: हर वर्ष की आवक ने दोनों पक्षों के लिए स्थिरता बनायी और रिश्तों के उल्लिखन को मजबूत किया।
अनुरूप संदर्भ (Cross-references) और उनका संक्षेप निष्कर्ष
अनुप्रयोग
- दस्तावेज़ी pragmatics से परे, यह पाठ हमें यह सिखाता है कि यदि समुदाय और देश-निर्माण के लिए संसाधनों का वितरण व्यवस्थित और दीर्घकालिक हो, तो सहयोगी संबंध मजबूत होते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर भी, अपने समुदाय या धर्म-संस्थाओं के साथ स्थिर और विश्वसनीय सहयोग बनाकर हम सेवकाई के लक्ष्य को आगे बढ़ा सकते हैं।
- विचार करने योग्य बिंदु: क्या हम अपने स्थान पर वे संसाधन दे सकते हैं जो समुदाय के भीतर आवश्यकता है, ताकि सभी की सेवा सुगम हो और निर्माण कार्य निरंतर चले?
संघटक निष्कर्ष
1 राजाओं 5:11 एक इशारा है कि शासन और प्रजा दोनों जब एक दूसरे के साथ स्थिर और भरोसेमंद सहयोग बनाते हैं, तब राष्ट्र का निर्माण और सेवकाई दोनों धार पर चलते हैं। यह पाठ प्रेरणा देता है कि संसाधनों का विवेकपूर्ण, दीर्घकालीन वितरण और समुदाय-केन्द्रित सहायता समाज की वृद्धि के लिए अनिवार्य है।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार (केवल अस्थायी रूप से उद्धृत शाब्दिक उदाहरण)
मैथ्यू हेनरी, अलीबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से प्रेरित सार: व्यवहारिक दयालुता और संसाधन-निर्माण के दृष्टिकोण पर उनका उल्लेखनीय निष्कर्ष यह है कि नेतृत्व का एक हिस्सा संसाधनों की संतुलित और अविचल व्यवस्था है, जिससे सेवकाई और समाज-निर्माण दोनों सफल होते हैं।
नोट: यदि उपलब्ध हो, तो इन पवित्र-तुलनाओं में उनके छोटे, सीधे उद्धरण दर्ज किए जा सकते हैं; यहाँ सार रूप में उनके दृष्टिकोण का संक्षेप है, ताकि पाठक को संदर्भ मिल सके।