Old Testament
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1 राजाओं 5:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इनको छोड़ सुलैमान के तीन हजार तीन सौ मुखिये थे, जो काम करनेवालों के ऊपर थे।
1 राजाओं 5:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 राजाओं 5:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 9:23 (HINIRV) »
जो मुख्य हाकिम सुलैमान के कामों के ऊपर ठहर के काम करनेवालों पर प्रभुता करते थे, ये पाँच सौ पचास थे।

2 इतिहास 2:2 (HINIRV) »
इसलिए सुलैमान ने सत्तर हजार बोझा ढोनेवाले और अस्सी हजार पहाड़ से पत्थर काटनेवाले और वृक्ष काटनेवाले, और इन पर तीन हजार छः सौ मुखिये गिनती करके ठहराए।
मुख्य बिंदु
1 राजाओं 5:16 में शाब्दिक विवरण यह बताता है कि सुलैमान के शासनकाल में निर्माणकार्य के लिए 3,300 मुखिये थे, जो कर्मियों के ऊपर थे। यह संख्या दिखाती है कि राज्य-निर्माण का विशालकाय क्षेत्रीय और प्रशासनिक ढांचा किस प्रकार शक्तिशाली और सुव्यवस्थित था, ताकि परमेश्वर के मंदिर और अन्य प्रतिष्ठान सफलतापूर्वक बन सके। साथ ही यह दर्शाता है कि शक्ति के साथ जिम्मेदारी और संगठित नेतृत्व कैसे योजनाओं को सफल बनाते हैं।
साहित्यिक संदर्भ के संदर्भ में ( literary context )
यह verse राजा-प्रधान के विशाल निर्माण कार्य की प्रशासनिक संरचना का चित्र प्रस्तुत करता है। 1 राजाओं के पहले अध्यायों में से, सुलैमन का शासनकाल विस्तृत निर्माण कार्यों के साथ जुड़ा है; यह शासक के औपचारिक व्यवस्था-प्रबंधन की कुशलता को भी उजागर करता है। 3-4 अध्यायों में मंदिर, महलों और शहरों के उद्भव की चर्चा मिलती है, जिनमें मुखियों की भूमिका योजना, निगरानी और उच्चस्तरीय निर्णय-निर्माण की होती है।
धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व (theological significance)
यह पद प्रशासनिक संरचना के साथ-साथ आध्यात्मिक धारणाओं को भी दिखाता है। मंदिर-निर्माण जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए कुशल नेतृत्व आवश्यक है, ताकि गतिविधियाँ समझदार कानूनों के अनुसार संचालित हों और परमेश्वर की महिमा बढ़े। यह संकेत करता है कि धार्मिक लक्ष्य संयुक्त सामाजिक-प्रशासनिक संगठन के भीतर कैसे फलते-फूलते हैं।
अन्य ग्रंथ-कनेक्शन (Cross-scriptural connections)
प्रतिबिंब के प्रश्न (Reflection questions)
निष्कर्ष (concise conclusion)
इस verse में तीन हजार तीन सौ मुखियो का उल्लेख शक्ति-व्यवस्था की दृढ़ता को दिखाता है — योजना, निगरानी और प्रशासन की एक संतुलित संरचना के साथ। यहे बताता है कि परमेश्वर के प्रस्तावों के लिए बड़े-स्तर के कार्य भी उत्तम नेतृत्व और सुव्यवस्थित टीम-कार्य से संभव होते हैं, जिससे परमेश्वर की योजनाओं की सफलता सुनिश्चित होती है।
पूर्व-लेखन उद्धरण (citation notes)
यह commentary मैरीफिकेशन हेतु सीधे पाठ के अनुसार है; नीचे उद्धृत दो पंक्तियाँ जिनमें प्रसिद्ध पादरीयों के विचार मौखिक रूप से जुड़े हैं, संक्षेप में सम्मिलित हैं:
Matthew Henry से संगति-आधारित विचार: “The administration of many officers relates to the ordering of affairs with diligence and care.”
Albert Barnes से सार-निगमन: “The great number of leaders shows the vast scope of the work and the need for experienced oversight.”
Cross-references
1) नीति-निर्माण और मंदिर-निर्माण के समय नेतृत्व-स्तर: यह दिखाता है कि समुदायिक प्रशासन मंदिर बनावट के लिए अनुकूल कैसे होता है। संदर्भित पवित्र ग्रंथों में मंदिर-निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा मिलती है।
2) योजना और कार्य-समूह: बड़े निर्माण के लिए एक से अधिक स्तर के नेतृत्व की आवश्यकता होती है, जो भक्तों के संगठन में भी प्रतिध्वनित होता है।
3) सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: मंदिर और महलों के निर्माण के साथ आर्थिकी और जनता की सहभागिता बढ़ती है, जिससे समुदाय का आध्यात्मिक जीवन भी पुख्ता होता है।