Old Testament
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1 राजाओं 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैंने अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनवाने की ठान रखी है अर्थात् उस बात के अनुसार जो यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कही थी, 'तेरा पुत्र जिसे मैं तेरे स्थान में गद्दी पर बैठाऊँगा, वही मेरे नाम का भवन बनवाएगा।'
1 राजाओं 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 राजाओं 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 इतिहास 22:10 (HINIRV) »
वही मेरे नाम का भवन बनाएगा। और वही मेरा पुत्र ठहरेगा और मैं उसका पिता ठहरूँगा, और उसकी राजगद्दी को मैं इस्राएल के ऊपर सदा के लिये स्थिर रखूँगा।'

1 इतिहास 28:6 (HINIRV) »
और उसने मुझसे कहा, 'तेरा पुत्र सुलैमान ही मेरे भवन और आँगनों को बनाएगा, क्योंकि मैंने उसको चुन लिया है कि मेरा पुत्र ठहरे, और मैं उसका पिता ठहरूँगा।

अर्थ शुद्ध सार: 1 राजाओं 5:5
जो शास्त्र संदेश देता है वह स्पष्ट है: राजा सलomon ने यहोवा के नाम के लिए भव्य भवन बनाने की ठान ली है; यह वही योजना है जिसे परमेश्वर ने दाऊद से कही थी, कि उनका पुत्र गद्दी पर बैठकर שם का भवन बनवाएगा। यह वचन स्थायित्व, विश्वसनीयता और परमेश्वर की योजना की निर्भरता को दिखाता है कि परमेश्वर अपने चयनित परिवार के निवास-स्थल को पवित्र स्थान मानकर निर्मित करेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ दाऊदी उत्तराधिकार के संदर्भ में आता है: दाऊद ने מלחמות और प्रशासनिक कार्यों के बीच इसे एक बार फिर दोहराया कि परमेश्वर के लिए एक भव्य भवन (मंदिर) बनवाया जाए। दाऊद की शरण और योजना के अनुसार, उनका पुत्र (सुलैमान) उसी नाम-भवन को निर्माण करेगा। यह कहानी इस बात की पुष्टि करती है कि मंदिर निर्माण का कार्यक्रम परमेश्वर की मर्जी से ही आगे बढ़ता है, और यह सलामनी के राजकीय स्थायित्व का प्रतीक बनता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
कुछ क्रॉस-रेफरेंसेस
- शक्तिशाली आराधना के केंद्र के बारे में: अन्य ग्रंथों में मंदिर/गृह-निर्माण के प्रतीकात्मक महत्व पर चर्चा मिलती है; यह ईश्वर की उपस्थिति के मानवीय स्थान के रूप में समझने में सहायक है।
- वचन के भरोसे का मूल्य: परमेश्वर की योजनाओं का क्रम और उसकी पुष्टि—पिता से पुत्र के माध्यम से—विश्वास-आधार में दृढ़ता देता है।
- दाऊद से सलomon तक का उत्तराधिकार: विद्यापीठ के निर्माण से जुड़ी योजना की निरंतरता दर्शाती है कि परमेश्वर बिरादरी के इतिहास में कैसे कदम-दर-कदम क्रिया करता है।
हिंदी में संकल्पना—सूचनात्मक अवलोकन
इस वचन में हमें यह शिक्षा मिलती है कि परमेश्वर अपने नाम के लिए एक पवित्र स्थान चाहता है जहाँ उसकी उपस्थिति और आराधना केंद्रित हो। यह भवन केवल इमारत नहीं, बल्कि परमेश्वर के बारे में समाज की प्रतिबद्धता का संकेत है। दाऊद से सलomon तक की योजना से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ उनके इतिहास-निर्माण के पथ पर मार्गदर्शक रहता है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
ए. मार्थिया के अनुसार (उद्धरण-उद्धरण के रूप में): अगर आवश्यक हो तो मुख्य संरचनाओं के भीतर आप Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से संक्षिप्त सार ग्रहण कर सकते हैं, परन्तु यहाँ मुख्य विचार यह है कि परमेश्वर अपने नाम के भवन के निर्माण के लिए अपनी योजना स्पष्ट करता है और पुत्र-वंश के साथ उसका क्रम सतत् है।
नोट्स
यह Commentary मूल पाठ पर आधारित है और इसके उद्देश्यों में किसी विशेष denomination के तर्क नहीं हैं। पाठ के अर्थ को सामान्य ईमानदार बोली में प्रस्तुत किया गया है ताकि हिंदी पाठक सरलता से समझ सकें।