1 शमूएल 21:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या मेरे पास बावलों की कुछ घटी है, कि तुम उसको मेरे सामने बावलापन करने के लिये लाए हो? क्या ऐसा जन मेरे भवन में आने पाएगा?”

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1 शमूएल 21:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 21:15 — एक दृश्य विवेचन

सीधे अर्थ में यह पद बताता है कि दाऊद ने यहूदा के भोज-स्थल पर पहुँचकर क्षणिक भय, और बहस के बीच अपनी सुरक्षा के लिए पैरवी माँगी। अंततः यह नहीं कि उसने बावलों के प्रति अनादर किया, बल्कि अस्तित्व में संकट के समय उसकी स्थिति की नाजुकता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

इस अध्याय में दाऊद, जो अनजानी सुरक्षा के लिए पथभ्रष्ट हो गया था, मूसा के परिवार के एक सदस्य के घर गया। इस समय उसकी मानसिक स्थिति तनावग्रस्त है और वह अपने केश-विवरण, भोजन, और स्थान के लिए संघर्ष कर रहा है। यह पंक्ति बताती है कि वह किस प्रकार एक विशिष्ट स्थल पर, एक प्रमुख व्यक्ति के घर में, सुरक्षा और भोजन के लिए गवाही दे रहा है।

अनुवाद से देखे जाने वाले नोट्स

• “क्या मेरे पास बावलों की कुछ घटी है...?”—यह तुष्टिकरण, भय और असुरक्षा की स्थिति को उद्घाटित करता है। दाऊद अपने सामाजिक स्थान और धार्मिक संवेदना के बीच फँसा हुआ लगता है।

• “तुम उसको मेरे सामने बावलापन करने के लिये लाए हो?”—यह सवाल सुरक्षा-चिन्ता के अनुरूप है; वह दर्शाता है कि किन ग़लतफहमियों या दबावों के कारण वह असुरक्षित अनुभव कर रहा है।

interpretive observations

  • मानवीय भय बनाम ईश्वरीय भरोसा: दाऊद की यह स्थिति दर्शाती है कि मंज़िल चाहे परम प्रिय के लिए हो, पर अस्त-व्यस्त समय में मानव मन 错 गलत रास्तों पर भी आ सकता है।
  • स्थिति की असत्वरता: यह वाक्य दिखाता है कि एक नेता के घर में भी भीतर से सुरक्षा की कमी हो सकती है, और सामाजिक मान्यताओं के बीच दाऊद को स्वयं को सुरक्षित रखने की कोशिश करनी पड़ी।
  • नैतिक जोखिम: बिना स्पष्ट सहमति के किसी को भी अपने सामने लाने की माँग में दाऊद के सामाजिक-धार्मिक दायित्वों के टकराव उजागर होते हैं।

2-3 cross-references (संक्षेप स्पष्टीकरण)

• शमूएल 22:1-2 — दाऊद ने शरण पाने के लिए गुप्त स्थलों की तलाश की; सुरक्षा अपेक्षा वास्तविक भरोसे के साथ संतुलित है।

• 1 शमूएल 23:11-12 — संकट के समय दाऊद को डर और सुरक्षा-चिंता का सामना करना पड़ता है, जबकि परमेश्वर की योजना उसके साथ बनी रहती है।

• भजन 27:3 — विपत्तियों के बीच भी भरोसा रखने की प्रेरणा, यह दिखाता है कि ईश्वर पर दृढ़ विश्वास से भय शांत हो सकता है।

परमुख्य निष्कर्ष

यह पद मानवीय स्थिति की सच्चाई को उद्घाटित करता है—जब भय और संकट मिलकर व्यक्ति की सुरक्षा-धारणाओं को चुनौती देते हैं, तब भी परमेश्वर की राह में भरोसा बनाए रखना चाहिए। दाऊद की परिस्थिति हमें यह स्मरण कराती है कि सुरक्षा स्थान सुलभ हो या न हो, परमेश्वर की उपस्थिति और भरोसा ही स्थिर सुरक्षा देते हैं।

ध्यान दें और जीवन में लागू करें

टिप्पणी: नीचे उद्धृत प्रसिद्ध प्रकाशक के संक्षिप्त विचार इसका मेल नहीं रखते, परंतु उनके प्रकाशनों के सिद्धांत समान सुरक्षा और विश्वास की दिशा में संकेत देते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 21:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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