Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31
1 शमूएल 21:15 — एक दृश्य विवेचन
सीधे अर्थ में यह पद बताता है कि दाऊद ने यहूदा के भोज-स्थल पर पहुँचकर क्षणिक भय, और बहस के बीच अपनी सुरक्षा के लिए पैरवी माँगी। अंततः यह नहीं कि उसने बावलों के प्रति अनादर किया, बल्कि अस्तित्व में संकट के समय उसकी स्थिति की नाजुकता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस अध्याय में दाऊद, जो अनजानी सुरक्षा के लिए पथभ्रष्ट हो गया था, मूसा के परिवार के एक सदस्य के घर गया। इस समय उसकी मानसिक स्थिति तनावग्रस्त है और वह अपने केश-विवरण, भोजन, और स्थान के लिए संघर्ष कर रहा है। यह पंक्ति बताती है कि वह किस प्रकार एक विशिष्ट स्थल पर, एक प्रमुख व्यक्ति के घर में, सुरक्षा और भोजन के लिए गवाही दे रहा है।
अनुवाद से देखे जाने वाले नोट्स
• “क्या मेरे पास बावलों की कुछ घटी है...?”—यह तुष्टिकरण, भय और असुरक्षा की स्थिति को उद्घाटित करता है। दाऊद अपने सामाजिक स्थान और धार्मिक संवेदना के बीच फँसा हुआ लगता है।
• “तुम उसको मेरे सामने बावलापन करने के लिये लाए हो?”—यह सवाल सुरक्षा-चिन्ता के अनुरूप है; वह दर्शाता है कि किन ग़लतफहमियों या दबावों के कारण वह असुरक्षित अनुभव कर रहा है।
interpretive observations
2-3 cross-references (संक्षेप स्पष्टीकरण)
• शमूएल 22:1-2 — दाऊद ने शरण पाने के लिए गुप्त स्थलों की तलाश की; सुरक्षा अपेक्षा वास्तविक भरोसे के साथ संतुलित है।
• 1 शमूएल 23:11-12 — संकट के समय दाऊद को डर और सुरक्षा-चिंता का सामना करना पड़ता है, जबकि परमेश्वर की योजना उसके साथ बनी रहती है।
• भजन 27:3 — विपत्तियों के बीच भी भरोसा रखने की प्रेरणा, यह दिखाता है कि ईश्वर पर दृढ़ विश्वास से भय शांत हो सकता है।
परमुख्य निष्कर्ष
यह पद मानवीय स्थिति की सच्चाई को उद्घाटित करता है—जब भय और संकट मिलकर व्यक्ति की सुरक्षा-धारणाओं को चुनौती देते हैं, तब भी परमेश्वर की राह में भरोसा बनाए रखना चाहिए। दाऊद की परिस्थिति हमें यह स्मरण कराती है कि सुरक्षा स्थान सुलभ हो या न हो, परमेश्वर की उपस्थिति और भरोसा ही स्थिर सुरक्षा देते हैं।
ध्यान दें और जीवन में लागू करें
टिप्पणी: नीचे उद्धृत प्रसिद्ध प्रकाशक के संक्षिप्त विचार इसका मेल नहीं रखते, परंतु उनके प्रकाशनों के सिद्धांत समान सुरक्षा और विश्वास की दिशा में संकेत देते हैं।