Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



मुख्य बिंदु
1 शमूएल 21:7 में दिखता है कि उसी दिन शाऊल के एक कर्मचारी अस्तित्व में है जो यहोवा के आगे खड़ा रहता है। यह संदर्भ हमारे लिए यह संकेत देता है कि नौकरशाही और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच भी परमेश्वर की योजना काम करती है, और kişinin संदर्भ में दावेदारी के सामने भी सत्यनिष्ठता की परीक्षा चलती है।
साहित्यिक संदर्भ (आख्यान-संदर्भ)
इस पद के आस-पास का पाठ यह दिखाता है कि दाऊद का भाग्य और शाऊल की सत्ता के बीच कसौटी पर कौन खड़ा होता है। योना और सेवक के बीच का यह छोटा विवरण एक बड़े द्वंद्व का पूर्व-आगत बताता है: कि परमेश्वर के लोग अभी भी रास्ते में खड़े लोगों के भरोसे पर निर्भर रहते हैं।
धर्मशास्त्रीय महत्व
यहाँ दो प्रमुख विचार उभरते हैं: एक है- प्रभु के आह्वान के समय सत्ता के मानव स्तम्भ कैसे भूमिका निभाते हैं; दूसरा यह कि परमेश्वर की योजना कभी-भी मानव हस्तक्षेप से परे चलती है। श mouल की सत्ता में भीतर से विरोधाभास और विश्वसनीयता की कसौटी चलती है—कौन से लोग ईमानदारी से परमेश्वर की योजना के अनुरूप कदम उठाते हैं।
पवित्रता के सूत्र और क्रॉस-रेफरेंसे
व्याख्या: इन संदर्भों से दृष्टांत मिलता है कि सत्ता के समय भी ईश्वर की मंजूरी का मान आंतरिक विवेक और सेवक-कर्तव्य से मापा जाता है, न कि केवल बाहरी स्थितियों से।
आत्म-चिन्तन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह छोटा विवरण यह स्पष्ट करता है कि शाऊल के शासनकाल के भीतर भी परमेश्वर की कारीगरी चलती है—जहां एक कर्मचारी, जिसकी भूमिका प्रशासन के ढांचे में है, संभवतः सुरक्षा-प्रशासन के कारण नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना के पालन के लिए भूमिका निभाता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि सत्यनिष्ठ सेवक वही है जो सत्ता की जटिलताओं के बीच भी परमेश्वर की योजना का सम्मान करता है और उसकी दिशा में कदम उठाता है।
पूर्व-रचना उद्धरण (यथातथ)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के प्रकाशित टिप्पणी-उद्धरणों का सटीक उल्लेख चाहते हैं, तो ध्यान दें: इस पाठ से सीधे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; साइट के संदर्भ-उद्धरण के अनुसार, नीचे उल्लेखित विचार उनके सार्वजनिक-डायरेक्ट स्रोतों के सामान्य विवेचन से प्रेरित हैं, जिन्हें आप मूल पाठ में देख सकते हैं।