Old Testament
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1 शमूएल 23:1 1 शमूएल 23:2 1 शमूएल 23:3 1 शमूएल 23:4 1 शमूएल 23:5 1 शमूएल 23:6 1 शमूएल 23:7 1 शमूएल 23:8 1 शमूएल 23:9 1 शमूएल 23:10 1 शमूएल 23:11 1 शमूएल 23:12 1 शमूएल 23:13 1 शमूएल 23:14 1 शमूएल 23:15 1 शमूएल 23:16 1 शमूएल 23:17 1 शमूएल 23:18 1 शमूएल 23:19 1 शमूएल 23:20 1 शमूएल 23:21 1 शमूएल 23:22 1 शमूएल 23:23 1 शमूएल 23:24 1 शमूएल 23:25 1 शमूएल 23:26 1 शमूएल 23:27 1 शमूएल 23:28 1 शमूएल 23:29



पाठ का संक्षिप्त परिचय (1 शमूएल 23:10)
यह पाठ दाऊद के कठिन समय की एक संवेदनशील बिंदु को उजागर करता है—जब मंच पर भय और विश्वास दोनों चल रहे हों। दाऊद अपने परमेश्वर की सहायता से शाऊल से पीछे नहीं हटना चाहता, बल्कि उसकी योजना और परमेश्वर के मार्ग के बीच संतुलन खोजने की कोशिश करता है। शाब्दिक संदर्भ में यह बोलता है कि दाऊद ने यहोवा के साथ एक स्पष्ट पूछताछ की है: उनके दास को शाऊल के नगर-नष्ट करने के इरादे के बारे में पता चला है। यह दाऊद की आस्था, विवेक और प्रभु کی सुरक्षा की अभिलाषा का संकेत है।
पल्ले में अध्याय के संदर्भ में
23वां अध्याय कुल मिलाकर दाऊद की स्थिति—उसके विरुद्ध शाऊल की निगाह, गिल्बाल और आदि शहरों में सुरक्षित रहने की कोशिश—का चित्र देता है। इस verse में दाऊद न सिर्फ युद्ध-स्थिति से जूझ रहा है बल्कि एक नैतिक निर्णय भी ले रहा है: क्या परमेश्वर की राह पर चलते हुए डर के संकेतों को समझना और सही कदम उठाना चाहिए? दाऊद यहाँ यह मान रहा है कि परमेश्वर ने उसे सुरक्षित रखने और शाऊल के खतरे से बचाने की योजना बनाई है, और वे उस योजना के अनुसार आगे बढ़ना चाहते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वाक्य से एक सार ग्रहण થાય कि आपत्तियाँ आने पर भी ईश्वर के मार्ग की पुष्टि के लिए पूछना चाहिए; भयग्रस्त हों पर-faithful निर्भरता बनाए रखना चाहिए। दाऊद यह जानता है कि परमेश्वर उसकी रक्षा कर रहा है और वह अपने दायित्व के अनुसार उचित कदम उठाने की कोशिश कर रहा है।
महत्वपूर्ण उद्धरण और प्रेरणा
यहाँ दाऊद यह कह रहा है कि शाऊल के विरुद्ध कीला नगर के नष्ट करने की योजना उनके कारण आना चाहती है—यानी दाऊद को खतरा स्पष्ट है, पर वह परमेश्वर की सुरक्षा पर भरोसा करता है।
पवित्र शास्त्र से तुलनात्मक विचार
क्रॉस-रेफरेंसेस: 1 शमूएल 23:7-13 (शाऊल के संदेश और दाऊद की सुरक्षा के स्थितियाँ), 1 शमूएल 24 (दाऊद ने शाऊल के साथ दया दिखाकर जवाब दिया), भजन 56:3 (डर के समय भरोसा बनाए रखना)।
उपयोगी अनुप्रयोग
संक्षेप
पाद 10 में दाऊद का उत्तरदायित्व, परमेश्वर के साथ उसकी निर्भरता और खतरे के बीच संतुलन का चित्र है। यह संदेश देता है कि भय के समय भी ईश्वर के मार्ग पर पूछताछ और उचित कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य की सुरक्षा और शांति परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हो सके।
प्रमुख प्रसंग-संदर्भ
1) शाऊल की ललकार के बीच दाऊद की सुरक्षा-चेतना; 2) परमेश्वर के संरक्षण में डर को परास्त कर विश्वास की तरफ बढ़ना; 3) दाऊद के नैतिक विवेक और सीधे-सीधे संवाद की महत्ता।
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