Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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1 शमूएल 23:11 - संदर्भ और अर्थ
यह संदर्भ उस समय का है जब यहूदा के शहर के अंदर की घबराहट और भयपूर्ण घटनाएं चल रही थीं। दाऊद अपने लड़ाकों के साथ एक गुप्त अभियान चला रहा था ताकि जाबिश नामक स्थल से लोगों की सुरक्षा कर सके। शमूएल के पुत्र शाऊल के विरुद्ध भीड़ और सत्ता के संघर्ष के बीच दाऊद पूछ रहा है कि क्या कीला के लोग उसे पकड़ कर शाऊल के पास ले आएंगे, और क्या वही घटनाक्रम होगा जिसे दास ने सुना है। परमेश्वर के वचन के अनुसार, यह स्पष्ट होता है कि शाऊल आगे बढ़ेगा, भले ही दाऊद और उसके लोग उसके लिए खतरा बन जाएँ। हैरानी की बात यह है कि यहोवा इस बात को ‘हाँ’ कहकर बतला रहा है—कि घटनाएं उसी क्रम से घटेंगी, जिनकी योजना परमेश्वर के पास है।
केंद्रित अर्थ
वचन में परमेश्वर अपने दास दाऊद को भविष्य के खतरे और भय के बारे में सचेत कर रहा है। दाऊद के मन में डर और संदेह हो सकता है, पर परमेश्वर की योजना स्पष्ट है—शाऊल आगे बढ़ेगा और दाऊद के लिए अस्थिर क्षण आएँगे, ताकि परमेश्वर अपने कार्य को आगे बढ़ाते रहें। यह सुरक्षा-भरोसे की पुष्टि है कि भले ही परिस्थितियाँ बदली-बदलती लगें, परमेश्वर ही मार्गदर्शक हैं।
मुख्य विषय
संबंधित मार्ग
1 शाम 23:10–12 में दाऊद यहोवा से परामर्श लेता है कि किस प्रकार शाऊल के खतरे से निपटना है, और परमेश्वर के निर्देश से ही निर्णय करता है। यह दिखाता है कि ईश्वर के मार्ग में निर्णय प्रार्थना और भरोसे पर आधारित होते हैं। — संपूर्णता के लिए संदर्भ देखें 1 शमूएल 23:9–13।
कहानीशैली में देखें कि कैसे दाऊद ने शाऊल के खतरे को मान्यता दी, परन्तु परमेश्वर के साथ विश्वास बनाए रखा।
रोज़मर्रा के अनुप्रयोग
जब भी हम सुरक्षित-योजना बनाते हैं, तब भी भय या अनिश्चितता उत्पन्न हो सकती है। इस वचन से याद आता है कि कठिन समय में भी ईश्वर की योजना और उपस्थिती को याद रखना चाहिए। धैर्य रखें, prarthna करें, और परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार कदम उठाएं।
प्रकाशन के लिए व्यवहारिक विचार
क्रॉस-रेफरेंसेस
यहोवा का निर्देश समय-समय पर स्वयं मार्ग दर्शाता है — 1 शमूएल 23:9–12. यह बताता है कि संकट की स्थितियों में भी परमेश्वर के निर्देश को प्राथमिकता दें।
आस्थावान कदम और भय का संघर्ष: भले ही असुरक्षा हो, परमेश्वर के वचन पर टिके रहने से निर्णय स्पष्ट होते हैं — भक्ति और विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए (2 शमूएल 5:17–25; भजन 27).
संक्षिप्त सार
1 शमूएल 23:11 में परमेश्वर यह बतला रहा है कि दाऊद के समय में शाऊल आता ही है; यह कहानी यह दर्शाती है कि ईश्वर की योजना भय या अशांति से ऊपर है और विश्वास के साथ कदम उठाने से ही सत्य होता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण ( Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से केवल स्वीकृत उद्धरण यदि उपलब्ध):
— "यहोवा ने कहा, ‘हाँ, वह आएगा’" — इस दृश्य में परमेश्वर की सत्तात्मक योजना की स्पष्टता है; दाऊद के भय के बावजूद ईश्वर की इच्छा आगे बढ़ती है।