Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 23:1 1 शमूएल 23:2 1 शमूएल 23:3 1 शमूएल 23:4 1 शमूएल 23:5 1 शमूएल 23:6 1 शमूएल 23:7 1 शमूएल 23:8 1 शमूएल 23:9 1 शमूएल 23:10 1 शमूएल 23:11 1 शमूएल 23:12 1 शमूएल 23:13 1 शमूएल 23:14 1 शमूएल 23:15 1 शमूएल 23:16 1 शमूएल 23:17 1 शमूएल 23:18 1 शमूएल 23:19 1 शमूएल 23:20 1 शमूएल 23:21 1 शमूएल 23:22 1 शमूएल 23:23 1 शमूएल 23:24 1 शमूएल 23:25 1 शमूएल 23:26 1 शमूएल 23:27 1 शमूएल 23:28 1 शमूएल 23:29

सीधे अर्थ का उद्घोष
1 शमूएल 23:22 में कहा गया है कि दाऊद को सावधानीपूर्वक चलना चाहिए, वह यह जान ले कि उसके शत्रु कहाँ-कहाँ पहुँचे हैं और किसने उसे देखा है; क्योंकि उसे बड़े तौर पर चालाक माना गया है। यह वाक्य दाऊद के परिस्थिति-नजरिए में खतरे की तीव्रता और उसकी सूझ-बूझ की आवश्यकता को दर्शाता है।
contextual background (पृष्ठभूमि)
इस भाग में दाऊद_filters में पलायन कर रहा है और शाऊल के सैनिकों से बचना उसका प्राथमिक लक्ष्य है। फिलिस्तीनी नगर गाथ-शोख के सामने भी दाऊद ने अपने आप को ज logically ढाला है ताकि वह निर्दोष रक्षा और संघर्ष के बीच संतुलन बनाए रखे। यहाँ संदिग्ध चतुराई और अड्डों की सूचना मिलने पर सावधानी बरतना की आवश्यकता पर बल है।
interpretive observations (व्याख्यात्मक निरीक्षण)
thematic highlights (थीमैटिक बिंदु)
cross-references (अन्य सम्बद्ध पद)
1) 1 शमूएल 21:10-11 — दाऊद के पीछे पड़े खतरे और अस्थायी आश्रयों का वर्णन; यह बताता है कि भय के समय भी सुरक्षा-युक्त निर्णय कैसे लिए जाते हैं।
2) 1 शमूएल 24:3 — दाऊद का सीमा-पार करने वाले अवसरों में धैर्य और धीमी चाल; यह दिखाता है कि स्थिरता जोखिमों को कम करती है।
3) भजन 11:4-5 आदि शास्त्रीय पाठ: परमेश्वर की निगहबानी में स्थितियों के मूल्यांकन का संतुलन; सत्यापन और विवेक के साथ कार्य।
brief editorial synthesis (संक्षिप्त संपादन-सार)
यह पद हमें याद दिलाता है कि खतरों के समय सहज-भाव से नहीं, बल्कि सूझ-बूझ, सत्य-संग्रह और तार्किक चेष्टा से आगे बढ़ना चाहिए। दाऊद के लिए यह सलाह नहीं कि कभी भी भागना चाहिए, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाकर चलना जरूरी है—जैसे कि हमें भी कठिन समय में विवेक से कदम बढ़ाने हैं।
practical takeaway (व्यावहारिक निष्कर्ष)
इस पाठ के दो प्रेरक संकेत: पहली बात, चालाकी के साथ आगे बढ़ना—पर यह भावना न बने कि हर जोखिम उठाना उचित है; दूसरी बात, सीमाओं के भीतर संदेह-सत्यापन की बुलंदी पर रहना ताकि गलत-फहमी के कारण नुकसान न हो।
उद्धृत निष्कर्ष (जहाँ लागू): Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विवेचनात्मक विचारों से संकेत मिलते हैं कि सूझ-बूझ के साथ सुरक्षा और नैतिक विवेक की आवश्यकता पर बल है।