1 शमूएल 23:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तुम चलकर और भी निश्चय कर लो; और देख भालकर जान लो, और उसके अड्डे का पता लगा लो, और पता लगाओ कि उसको वहाँ किसने देखा है; क्योंकि किसी ने मुझसे कहा है, कि वह बड़ी चतुराई से काम करता है।

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1 शमूएल 23:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का उद्घोष

1 शमूएल 23:22 में कहा गया है कि दाऊद को सावधानीपूर्वक चलना चाहिए, वह यह जान ले कि उसके शत्रु कहाँ-कहाँ पहुँचे हैं और किसने उसे देखा है; क्योंकि उसे बड़े तौर पर चालाक माना गया है। यह वाक्य दाऊद के परिस्थिति-नजरिए में खतरे की तीव्रता और उसकी सूझ-बूझ की आवश्यकता को दर्शाता है।

contextual background (पृष्ठभूमि)

इस भाग में दाऊद_filters में पलायन कर रहा है और शाऊल के सैनिकों से बचना उसका प्राथमिक लक्ष्य है। फिलिस्तीनी नगर गाथ-शोख के सामने भी दाऊद ने अपने आप को ज logically ढाला है ताकि वह निर्दोष रक्षा और संघर्ष के बीच संतुलन बनाए रखे। यहाँ संदिग्ध चतुराई और अड्डों की सूचना मिलने पर सावधानी बरतना की आवश्यकता पर बल है।

interpretive observations (व्याख्यात्मक निरीक्षण)

  • सूचनाओं के स्रोत की पहचान: किसी ने बताया है कि वह बड़ा चालाक है, अतः दाऊद को स्रोतों की विश्वसनीयता पर विचार करना चाहिए।
  • ख़तरा-मापन: बिना ठोस जानकारी के आक्रमण का निर्णय न लेना चाहिए; चतुराई के साथ स्थिति को पहचानना जरूरी है।
  • रणनीतिक सावधानी: अड्डे पर पहुँचना, देखना, और किसने देखा—ये क्रम दाऊद के लिए अपनी सुरक्षा की योजना बनाने में अनिवार्य है।

thematic highlights (थीमैटिक बिंदु)

  1. शत्रु की चालाकी का आकलन और उसका सामना करना।
  2. सूचना-संग्रह की महत्ता और सत्यापित सूचना पर भरोसा।
  3. विपत्ति के समय गुप्तचर-चाल का चयन और जागरूकता।

cross-references (अन्य सम्बद्ध पद)

1) 1 शमूएल 21:10-11 — दाऊद के पीछे पड़े खतरे और अस्थायी आश्रयों का वर्णन; यह बताता है कि भय के समय भी सुरक्षा-युक्त निर्णय कैसे लिए जाते हैं।

2) 1 शमूएल 24:3 — दाऊद का सीमा-पार करने वाले अवसरों में धैर्य और धीमी चाल; यह दिखाता है कि स्थिरता जोखिमों को कम करती है।

3) भजन 11:4-5 आदि शास्त्रीय पाठ: परमेश्वर की निगहबानी में स्थितियों के मूल्यांकन का संतुलन; सत्यापन और विवेक के साथ कार्य।

brief editorial synthesis (संक्षिप्त संपादन-सार)

यह पद हमें याद दिलाता है कि खतरों के समय सहज-भाव से नहीं, बल्कि सूझ-बूझ, सत्य-संग्रह और तार्किक चेष्टा से आगे बढ़ना चाहिए। दाऊद के लिए यह सलाह नहीं कि कभी भी भागना चाहिए, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाकर चलना जरूरी है—जैसे कि हमें भी कठिन समय में विवेक से कदम बढ़ाने हैं।

practical takeaway (व्यावहारिक निष्कर्ष)

  • अपनी सुरक्षा के लिए चुपके-चाल और सावधानी अपनाएं, पर निष्ठा और साहस भी बनाए रखें।
  • परिस्थितियों का मूल्यांकन करते समय विश्वसनीय स्रोतों पर निर्भर रहें और स्वतंत्र सोच विकसित करें।

इस पाठ के दो प्रेरक संकेत: पहली बात, चालाकी के साथ आगे बढ़ना—पर यह भावना न बने कि हर जोखिम उठाना उचित है; दूसरी बात, सीमाओं के भीतर संदेह-सत्यापन की बुलंदी पर रहना ताकि गलत-फहमी के कारण नुकसान न हो।


उद्धृत निष्कर्ष (जहाँ लागू): Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विवेचनात्मक विचारों से संकेत मिलते हैं कि सूझ-बूझ के साथ सुरक्षा और नैतिक विवेक की आवश्यकता पर बल है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 23:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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वह बुद्धिमानों को उनकी धूर्तता ही में फँसाता है; और कुटिल लोगों की युक्ति दूर की जाती है। (1 कुरि. 3:19-20)

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