1 शमूएल 23:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब उन दोनों ने यहोवा की शपथ खाकर आपस में वाचा बाँधी; तब दाऊद होरेश में रह गया, और योनातान अपने घर चला गया।

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1 शमूएल 23:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 23:18 — दोस्ती और विश्वास की शपथ

यह वच्न हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे दाऊद और योनातन के बीच का रिश्ता मोक्ष के मार्ग की अस्थिरताओं में भी अडिग बना रहा। जब दाऊद पर फिलिस्तीनी खतरे कीembangkan बढ़ते गए, तब योनातन ने दाऊद के प्रति अपनी निष्ठा को एक ऐसे अवसर पर भी जाहिर किया जब स्थिति कठिन थी। यह शपथ भी यह रेखांकित करती है कि परमेश्वर के उद्देश्य में असली मित्रता और विश्वसनीयता किस प्रकार काम करती है।

पार्श्वभूमि और मूल संदर्भ

यहोवा ने दाऊद को एक गहरे संकट से गुजरना सिखाया: उसे राजा सौल के इशारे पर खतरे का सामना करना पड़ रहा है, जबकि जनता उसकी सुरक्षा की प्रतीक्षा कर रही है। योनातन, जो कि सीधा राजा के पुत्र है और दाऊद के मित्र, ने वाचा बाँधी कि वह दाऊद के साथ खड़ा रहेगा और राजा के कदमों के विरुद्ध भी उसे सत्य मार्ग दिखाएगा। इस घटना में दो प्रमुख विषय उभरते हैं—विश्वास की गवाही और साहसपूर्ण मित्रता की भूमिका।

मुख्य संदेश

वचन बताता है कि genuine मित्रता वह है जो समय-समय पर सत्य और करुणा से परखी जाए। योनातन शपथ खाकर दाऊद के पीछे खड़े रहते हैं, भले ही Saul धमकियाँ दें या राजनीतिक खतरे बढ़ें। साथ ही, यह भी दिखता है कि दाऊद ने यह जान लिया कि परमेश्वर उन्हें एक साथ रख रहा है ताकि वे भविष्य की कठिनाइयों में एक-दूसरे के सहारे रहें।

पवित्र बनावट और थीम्स

  • विश्वास और शपथ: परमेश्वर के सामने एक दूसरे के प्रति वफा निभाने की प्रतिज्ञा।
  • जोखिम और रक्षा: मंत्री-रूपी मित्रता में खड़े रहने की हिम्मत।
  • कठिन समय में निकटता: संकट के बीच सगोत्रता से सहयोग।

cross-references (संक्षेप में समझाने के साथ)

- मित्रता की सच्चाई: दाऊद और योनातन की शपथ के संदर्भ में, कुंठित समय में भी विश्वास के साथ खड़े रहने का महत्व।

- शपथ और नीति: ऐतिहासिक राजनीति के दबाव के बावजूद नैतिक दायित्व का पालन।

- समर्पण और मार्गदर्शन: परमेश्वर की योजना में दो मित्रों की सहायता और मार्ग उपलब्ध होना।

देवotional reflection

हमारे जीवन में भी ऐसे क्षण आते हैं जब मित्रता और विश्वास की शुद्धता की मांग होती है। यदि हम कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और प्रेम से आगे बढ़ते हैं, तो nostro जीवन में परमेश्वर की कृपा स्पष्ट रूप से खिल उठती है। दाऊद-योनातन की स्मृति हमें प्रेरित करती है कि हम अपने मित्रों के साथ ईमानदार बने रहें, और जब जरूरत हो, एक-दूसरे के लिए जाना जाए।

निष्कर्ष

1 शमूएल 23:18 बताता है कि शपथ और दोस्ती केवल सुखद क्षणों की नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण समय की भी कसौटी है। इस तरह की एकता से ही भविष्य के निर्णायक कदमों के लिए साहस और मार्गदर्शन मिल पाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 23:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 20:42 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 20:42 (HINIRV) »
तब योनातान ने दाऊद से कहा, “कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे।” तब वह उठकर चला गया; और योनातान नगर में गया।

1 शमूएल 18:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 18:3 (HINIRV) »
तब योनातान ने दाऊद से वाचा बाँधी, क्योंकि वह उसको अपने प्राण के समान प्यार करता था।

2 शमूएल 21:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 शमूएल 21:7 (HINIRV) »
परन्तु दाऊद ने और शाऊल के पुत्र योनातान ने* आपस में यहोवा की शपथ खाई थी, इस कारण राजा ने योनातान के पुत्र मपीबोशेत को जो शाऊल का पोता था बचा रखा।

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