1 शमूएल 25:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए अब सोच विचार कर कि क्या करना चाहिए; क्योंकि उन्होंने हमारे स्वामी की और उसके समस्त घराने की हानि करना ठान लिया होगा, वह तो ऐसा दुष्ट है कि उससे कोई बोल भी नहीं सकता।”

पिछला पद
« 1 शमूएल 25:16
अगला पद
1 शमूएल 25:18 »

1 शमूएल 25:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्यों यह वचन महत्त्वपूर्ण है

1 शमूएल 25:17 में नीतिवचनात्मक चेतावनी है कि किसी भी परिस्थिति में विवेकहीन निर्णय लेने से पहले सोच-विचार आवश्यक है। वाणी का ढंग, नीतिपरक निर्णय और लोगों के साथ व्यवहार वह दिग्भ्रमित बन सकता है जो हमारे परमेश्वर के हित के विरुद्ध चल पड़ते हैं। यह पद बताता है कि राजा देवदत्तों के एक उच्च-स्तर के क्षेत्र में भी, सुरक्षा और संरक्षण के लिए समझदारी की आवश्यकता है; अनिश्चितता में भी निर्णय लेने से पूर्व ठहरकर विचार करना चाहिए ताकि क्षति से बचा जा सके।

पार्श्व प्रतीक और मूल प्रसंग

यह पाठ डाकू और समूहों के बीच के राजनीतिक-व्यावसायिक दबाव के समय का है। नायाबू के शासन के दौरान अबिगेल नामक एक बुद्धिमान स्त्री-समूह के विरुद्ध दुष्टों की गतिविधियाँ सामने आईं। विद्वान कहते हैं कि यहाँ “वह दुष्ट” से अभिप्राय एलन का वह चुस्त और उग्र नेता है जिसने हमारे स्वामी (David) के घराने के लिए खतरा पैदा किया। शब्दार्थ में “अपने स्वामी की और उसके समस्त घराने की हानि” का संकेत है कि व्यक्ति-स्वामित्व से अधिक गिरोह की सुरक्षा और परिवार की शांति का प्रश्न है—जो एक रक्षक की भूमिका और निकट भविष्य के लिए निर्णय लेने की आवश्यकता को दर्शाता है।

मुख्य संदेश

संक्षेप में, यह वाक्य चेतावनी देता है कि किसी भी योजना में, खासकर ऐसे समय जब हमला या हानि संभव हो, फौरन टकराव में कोहराम मचाने से पहले ठोस विचार, रणनीति और उचित मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। एक सच्चा नेता और अनुयायी वही है जो परिस्थिति का प्रत्यक्ष “क्यों” और “कैसे” समझे और उचित कदम उठाए, ताकि प्रायः नुकसान कम हो और दूसरों के हितों की रक्षा हो सके।

सूत्रधारक विचार

नीचे दिए गए बाइबल सिद्धांत इस verse के साथ संगत हैं:

  • विवेक से निर्णय: “सोच विचार कर क्या करना चाहिए” से स्पष्ट है कि बिना विचार के कदम उठाना नुकसानदेह हो सकता है।
  • न्याय और सुरक्षा: समूह के सदस्य और उनके घराने की सुरक्षा के लिए निर्णय की आवश्यकता है ताकि दुश्मनी के कारण हानि न हो।
  • संयम और संयमित प्रतिक्रिया: विद्रोह या उन्मत्त क्रिया से बचना और बुद्धिमान समाधान खोजना चाहिए।

संदर्भ-पत्रों के साथ संबल

यहाँ से तीन समकालीन पाठ एक दूसरे के साथ संगत सोच प्रदान करते हैं:

  • यहोशू 1:7-9 — मार्गदर्शक निर्णय और दृढ़ता के आधिकारिक निर्देश, नीति-निर्णय में सावधानी की सीख।
  • नीतिवचन 3:5-7 — विश्वास पर निर्भर रहने और अपने ज्ञान से आगे न बढ़ने की शिक्षा।
  • उत्पत्ति 3:9-12 — निर्णयों की जवाबदेही और परिस्थिति के अनुसार विचार करने की आवश्यकता।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि विवेक और योजना ही सुरक्षा के पथ हैं, जबकि त्वरित प्रतिक्रिया कभी-कभी नुकसान दे सकती है।

पवित्र-उद्धरण से सम्बद्ध विचार (यानि प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संकेत)

यह पाठ आधुनिक टिप्पणीकारों के साझा नैरेटिव के अनुसार विवेक, नीति और सुरक्षा की आवश्यकता पर बल देता है। नीचे उल्लेखित विचारों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सामान्य टिप्पणियाँ से संकल्प मिलते हैं, परन्तु उनका पूरा पाठ यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है; केवल दर्शनीय शब्द-चिह्न दिए जा रहे हैं:

Matthew Henry: वे कहते हैं कि प्रचलित परिस्थितियों मेंprudence, दया और न्याय-परकता एक साथ चलती है ताकि परमेश्वर की महिमा बनी रहे।

Albert Barnes: विवेक से निर्णय लेने का आग्रह, और समूह हितों की सुरक्षा का विशिष्ट महत्त्व।

Adam Clarke: परिस्थिति के अनुसार चयन और शांति-प्रेमी नीति—यही सही समाधान दिखाती है।

संक्षिप्त देवotional विचार

कभी-कभी जीवन में अत्यधिक दबाव और उथल-पुथल के बीच हमें निर्णय लेने होते हैं। यह पद reminds us कि पहला कदम शांत विचार-विमर्श का होना चाहिए—परिस्थिति का सत्य समझना, किन-किन लोगों पर प्रभाव पड़ेगा, और किस प्रकार का परिणाम ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप होगा। हमारी प्रार्थना यही हो कि हम परिश्रमी, दयालु और न्यायप्रिय हों, ताकि संकट के समय भी प्रेम और सत्य के साथ आगे बढ़ सकें।

छोटा cross-reference मार्गदर्शन

सम्बन्धित बाइबल संदर्भ—संक्षेप:

  • यहोशू 1:7-9 — पूर्ण तत्परता और नीति-निर्णय का आदर्श।
  • नीतिवचन 3:5-7 — विश्वास और विवेक का संयोजन।
  • रोमियों 12:17-21 — बुरे को बदले में जवाब देने की बजाय शांति रखना और ईश्वर के न्याय पर भरोसा करना।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 25:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 शमूएल 20:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 20:7 (HINIRV) »
यदि वह यों कहे, 'अच्छा!' तब तो तेरे दास के लिये कुशल होगा; परन्तु यदि उसका क्रोध बहुत भड़क उठे, तो जान लेना कि उसने बुराई ठानी है।

व्यवस्थाविवरण 13:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 13:13 (HINIRV) »
कि कुछ अधर्मी पुरुषों ने तेरे ही बीच में से निकलकर अपने नगर के निवासियों को यह कहकर बहका दिया है, 'आओ हम अन्य देवताओं की जिनसे अब तक अनजान रहे उपासना करें,'

न्यायियों 19:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
न्यायियों 19:22 (HINIRV) »
वे आनन्द कर रहे थे, कि नगर के लुच्चों ने घर को घेर लिया, और द्वार को खटखटा-खटखटाकर घर के उस बूढ़े स्वामी से कहने लगे, “जो पुरुष तेरे घर में आया, उसे बाहर ले आ, कि हम उससे भोग करें।”

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें